आगराः छह दिन चली तलाश, उटंगन में डूबे कुसियापुर के सभी 12 लाल मिले मृत, रेस्क्यू पूरा

छह दिन तक चली लाशों की तलाश मंगलवार को पूरी हो गई। खेरागढ़ थाना क्षेत्र के कुसियापुर गांव के उटंगन नदी हादसे में डूबे सभी बारह युवकों के शव मिल गए। मंगलवार को सुबह से शुरू हुए सर्च ऑपरेशन में एक-एक कर सचिन, दीपक, हरेश और गजेन्द्र के शव निकाले गये। जैसे ही कोई शव बाहर निकाला जाता, गांव में कोहराम मच जाता। गुरुवार को देवी प्रतिमा विसर्जन के दौरान हुए हादसे के बाद गांव में बचा है तो मातम सन्नाटा। जिन युवाओं ने उत्सव में हाथों से मूर्तियां उठाईं, वे अर्थियों पर दुनिया से विदा हो गये।

Oct 7, 2025 - 19:25
 0
आगराः छह दिन चली तलाश, उटंगन में डूबे कुसियापुर के सभी 12 लाल मिले मृत, रेस्क्यू पूरा
खेरागढ़ के कुसियापुर गांव के वे युवक जिनकी उटंगन नदी में डूबने से दर्दनाक मौत हो गई।

आगरा। खेरागढ़ थाना क्षेत्र के कुसियापुर गांव में गुरुवार को देवी मूर्ति विसर्जन के दौरान हुआ हादसा अब शोक का स्थायी अध्याय बन गया है। छह दिन के अथक रेस्क्यू अभियान के बाद मंगलवार को सभी लापता चारों शव मिल गए। सोमवार तक आठ शव मिल चुके थे, जबकि चार की तलाश जारी थी। मंगलवार को सुबह 10:30 बजे सचिन का शव सबसे पहले मिला, दोपहर 12 बजे दीपक का, फिर तीन बजे हरेश और अंत में गजेन्द्र का शव निकाला गया।

सभी शव नदी की तलहटी में 15 से 20 फीट गहराई में दलदल में फंसे मिले। पानी में लंबे समय तक रहने के कारण शव फूल चुके थे और उनकी पहचान मुश्किल हो रही थी। परिजन जब अंतिम बार अपने बेटों को देखने पहुंचे तो गांव नदी का किनारा विलाप से हर किसी की आंख को नम कर गया।

गुरुवार को मूर्ति विसर्जन के समय 13 युवक नदी में उतरे थे। उनमें से एक को जिंदा बचा लिया गया था, जबकि शेष 12  नदी की जलराशि में समा गये थे। पहले दिन तीन शव मिले थे, फिर एक-एक कर छह और शव निकले और मंगलवार को बाकी चारों का मिलना अंतिम पड़ाव साबित हुआ।

हादसे के बाद प्रशासन ने रेस्क्यू के लिए एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और सेना की 411 पैरा फील्ड यूनिट को लगाया। यह यूनिट उत्तराखंड समेत कई राज्यों में बड़े बचाव अभियानों का हिस्सा रह चुकी है। गहरे पानी में उतरने वाले इन जवानों ने 19 सदस्यीय टीम के साथ लगातार दिन-रात खोज अभियान चलाया।

गांव में अब सिर्फ एक ही आवाज सुनाई दे रही है- रोते परिजनों की और गूंजता एक सवाल- अगर खनन से नदी इतनी गहरी न हुई होती, तो क्या हमारे बच्चों को जान गंवानी पड़ती?

SP_Singh AURGURU Editor