आगरा का नॉर्दर्न बाईपास चालू, फिर भी शहर में भारी वाहनों की एंट्री, वैधानिक प्रतिबंध के लिए सुप्रीम कोर्ट में लड़ाई लड़ रहे एडवोकेट केसी जैन, विचाराधीन याचिका पर आज सुनवाई नहीं हो सकी

आगरा। सालों से जाम, दुर्घटनाओं और प्रदूषण की मार झेल रहे आगरा शहर के लिए अब कुछ कर दिखाने का वक्त है। आगरा नॉर्दर्न बाईपास के पूर्ण होकर 4 दिसंबर 2025 से चालू हो जाने के बावजूद गैर-आगरा-गंतव्य भारी वाणिज्यिक वाहन अब भी शहर के भीतर से गुजर रहे हैं। इसे अनावश्यक, असंगत और जन-जीवन के लिए घातक बताते हुए स्थायी, बाध्यकारी और वैधानिक प्रतिबंध की मांग तेज़ हो गई है। इस मामले को लेकर आगरा के वरिष्ठ अधिवक्ता केसी जैन ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका भी दाखिल की हुई है, जिस पर आज होने वाली सुनवाई समयाभाव के कारण नहीं हो सकी।

Jan 21, 2026 - 20:42
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आगरा का नॉर्दर्न बाईपास चालू, फिर भी शहर में भारी वाहनों की एंट्री, वैधानिक प्रतिबंध के लिए सुप्रीम कोर्ट में लड़ाई लड़ रहे एडवोकेट केसी जैन, विचाराधीन याचिका पर आज सुनवाई नहीं हो सकी

यह मामला लंबे समय से सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है। रिट याचिका (सिविल) संख्या 13381/1984, एम.सी. मेहता बनाम भारत संघ एवं अन्य, जहां आगरा में वायु प्रदूषण और भारी वाहनों के प्रवेश को गंभीर जन-स्वास्थ्य का प्रश्न माना गया है।

वर्षों के इंतज़ार बाद बना बाईपास फिर भी समस्या यथावत

सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता एवं आगरा के सामाजिक कार्यकर्ता केसी जैन, एडवोकेट  बताते हैं कि 30 दिसंबर 1996 को सर्वोच्च न्यायालय ने आगरा में वायु प्रदूषण व भारी वाहनों पर कड़े निर्देश दिए। 07 अगस्त 2006 को गैर-आवश्यक भारी वाहनों के प्रवेश पर नियंत्रण की पुनः पुष्टि हुई। 09–10 दिसंबर 2016 को आगरा नॉर्दर्न बाईपास की सार्वजनिक घोषणा हुई। 19 जुलाई 2019 को यूपी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की कार्ययोजना में गैर-आगरा-गंतव्य भारी वाहन प्रमुख प्रदूषण स्रोत घोषित किये गये।

श्री जैन के अनुसार 25 फरवरी 2023 को नॉर्दर्न बाईपास निर्माण का औपचारिक आरंभ हुआ। 03 सितंबर 2024 को  एनएचएआई ने निर्माण के अंतिम चरण की सूचना दी। 04 दिसंबर 2025 को महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई जब लगभग 12.67 किमी लंबा नॉर्दर्न बाईपास यातायात हेतु चालू हो गया।

श्री जैन ने बताया कि आज 21 जनवरी 2026 को  यह मामला सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की पीठ (न्यायमूर्ति सूर्यकांत) के समक्ष सूचीबद्ध था, लेकिन समयाभाव के कारण आज सुनवाई नहीं हो सकी। इस मामले के शीघ्र पुनः सूचीबद्ध होने की संभावना है।

इसलिए ज़रूरी है सख़्त कदम

केसी जैन एडवोकेट ने सवाल उठाया है कि उत्तरी बाईपास चालू होने के बावजूद शहर से भारी वाहन क्यों गुजर रहे हैं? इससे राष्ट्रीय राजमार्ग-19 पर लगातार घातक दुर्घटनाए रही हैं। इससे नागरिकों के जीवन, स्वास्थ्य और सुरक्षा पर सीधा खतरा पैदा हो रहा है।  यह स्थिति अब किसी भी तर्क से जायज़ नहीं ठहराई जा सकती।

डायवर्जन नहीं, कानून बनाने से ही हल होगी समस्या

एडवोकेट केसी जैन ने बताया कि आगरा में भारी वाहनों के सिर्फ अस्थायी डायवर्जन नहीं, बल्कि कानून के तहत बाध्यकारी प्रतिबंध की मांग की जा रही है। मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 115 के तहत गैर-आगरा-गंतव्य भारी वाणिज्यिक वाहनों के शहर में प्रवेश पर औपचारिक अधिसूचना जारी हो। धारा 116 के तहत ऐसे वाहनों का अनिवार्य रूप से नॉर्दर्न बाईपास/वैकल्पिक मार्गों से आवागमन हो। धारा 119 के तहत  उल्लंघन पर दंडात्मक कार्रवाई की जाए ताकि आदेश कागज़ी न रह जाए।

आगरा के लिए इसलिए निर्णायक है यह मुद्दा

श्री जैन ने कहा कि उत्तरी बायपास चालू होने के बाद कोई प्रशासनिक बाधा नहीं रह गई है। इसके बावजूद भारी वाहनों के शहर में प्रवेश पर रोक न होने से हर दिन की देरी मानव जीवन की कीमत पर हो रही है। यह ट्रैफिक मैनेजमेंट नहीं, पब्लिक सेफ्टी और पब्लिक हेल्थ का प्रश्न है। बिना वैधानिक अधिसूचना के प्रवर्तन एजेंसियां भी बेबस नजर आ रही हैं।

केसी जैन एडवोकेट ने उम्मीद जताई है कि शीघ्र पुनः सुनवाई में सर्वोच्च न्यायालय नॉर्दर्न बायपास के चालू होने को निर्णायक आधार मानते हुए आगरा में भारी वाहनों के प्रवेश को रोकने के लिए स्पष्ट, वैधानिक और लागू करने योग्य प्रतिबंध लगाएगा। यह निर्णय आगरा की जनता के लिए वर्षों से लंबित समस्या का स्थायी समाधान साबित होगा।

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SP_Singh AURGURU Editor