आगरा की हवा जहरीली या नगर निगम के सेंसर खराब? 39 में से 22 स्थानों पर बढ़ा PM2.5, आईएसबीटी की रीडिंग 8.54 से उछलकर 555.37 पहुंची
आगरा। ताजनगरी में वायु प्रदूषण की निगरानी के लिए लगाए गए नगर निगम के 39 सेंसरों के आंकड़े हवा की बिगड़ती स्थिति के साथ ही उनकी विश्वसनीयता पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं। जनवरी से मई 2026 के आंकड़ों की पिछले वर्ष की इसी अवधि से तुलना में 22 स्थानों पर PM2.5 का औसत बढ़ा, जबकि 17 स्थानों पर गिरावट दर्ज की गई। कुछ स्थानों पर प्रदूषण के स्तर में असाधारण उछाल और कई सेंसरों की रीडिंग में एक जैसी संख्याएं सामने आने के बाद पर्यावरण कार्यकर्ता एवं अधिवक्ता केसी जैन ने सभी सेंसरों का स्वतंत्र तकनीकी ऑडिट कराने की मांग की है।
आईएसबीटी की रीडिंग में असाधारण उछाल
आंकड़ों के अनुसार, आईएसबीटी पर PM2.5 का औसत जनवरी-मई 2025 में 8.54 था, जो इसी अवधि में 2026 में बढ़कर 555.37 दर्ज हुआ। शहीद नगर/वैभव नगर में यह आंकड़ा 19.10 से बढ़कर 260.57 पहुंच गया। ईदगाह चौराहे पर औसत 8.83 से बढ़कर 227.31 और अग्रसेन मूर्ति, दिल्ली गेट पर 17.26 से बढ़कर 213.37 दर्ज किया गया। आगरा फोर्ट रेलवे स्टेशन पर भी औसत 23.50 से बढ़कर 198.86 हो गया, जबकि यहां जनवरी 2026 की रीडिंग 597 तक पहुंची। नया पुल तिराहे पर जनवरी में 389 और संबंधित अवधि का औसत 119.87 दर्ज किया गया।
धूलियागंज में गिरावट, दूसरे स्थानों पर बढ़ोतरी
सभी स्थानों पर प्रदूषण बढ़ने की तस्वीर नहीं है। धूलियागंज में PM2.5 का औसत 2025 के 377 से घटकर 2026 में 232.72 दर्ज हुआ। दूसरी ओर, आरओबी चौराहे पर औसत लगभग दोगुना होकर 90.06 पहुंच गया। बाग फरजाना में यह 84.96 और स्पीड कलर लैब पर 81.36 दर्ज किया गया। संजय टॉकीज पर PM प्रदूषण में 234 प्रतिशत और पृथ्वीनाथ गेट पर 101 प्रतिशत वृद्धि के आंकड़े सामने आए, लेकिन मूल रिपोर्ट की तालिका में इन स्थानों को ‘इम्प्रूव्ड’ यानी सुधार वाली श्रेणी में भी दिखाया गया है। यह विसंगति आंकड़ों के विश्लेषण और रिपोर्टिंग की जांच की जरूरत बताती है।
कई सेंसरों की रीडिंग पर संदेह
आंकड़ों में कुछ सेंसरों पर बार-बार 990 से 999 के आसपास की अधिकतम जैसी रीडिंग दर्ज होने का उल्लेख है। वर्ष 2026 में पांच स्थानों पर कुल नौ शून्य रीडिंग भी दर्ज की गईं। ईदगाह सेंसर पर मई 2026 की रीडिंग 996.44 रही, जो मई 2024 के आंकड़े के बिल्कुल समान बताई गई है। इसके अलावा नौ स्थानों पर 2026 के कम से कम तीन महीनों की रीडिंग 2024 के आंकड़ों से हूबहू मेल खाती है। रिपोर्ट में आईएसबीटी, शहीद नगर, ईदगाह, दिल्ली गेट और फोर्ट स्टेशन सहित पांच प्रमुख स्थानों को ‘रीडिंग इश्यू’ वाली श्रेणी में रखा गया है। तालिका में माप की इकाई का उल्लेख न होना भी एक महत्वपूर्ण कमी है।
मानकों से तुलना जरूरी, लेकिन आंकड़ों की पुष्टि भी हो
भारत में PM2.5 की वार्षिक औसत सीमा 40 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर और 24 घंटे की औसत सीमा 60 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर निर्धारित है। जनवरी और फरवरी में प्रदूषण की स्थिति आम तौर पर अधिक गंभीर होती है, जबकि अप्रैल और मई में इसमें कुछ सुधार दिखाई दे सकता है। ऐसे में सर्दियों के प्रदूषण से निपटने के लिए अक्टूबर-नवंबर में ही प्रभावी कदम उठाना जरूरी है। हालांकि, असामान्य रीडिंग वाले सेंसरों के आंकड़ों को वास्तविक वायु गुणवत्ता का अंतिम प्रमाण मानने से पहले उनकी तकनीकी जांच और स्वतंत्र माप से पुष्टि करना आवश्यक है।
सात दिन में ऑडिट, 30 दिन में सार्वजनिक रिपोर्ट की मांग
पर्यावरण कार्यकर्ता एवं अधिवक्ता केसी जैन ने नगर निगम से सभी 39 सेंसरों का सात दिन के भीतर स्वतंत्र तकनीकी ऑडिट कराने की मांग की है। इसमें सेंसरों की कैलिब्रेशन रिपोर्ट, रखरखाव अनुबंध और वास्तविक डेटा लॉग की जांच शामिल करने को कहा गया है। उन्होंने उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से भी 10 प्रमुख स्थानों पर स्वतंत्र रूप से वायु गुणवत्ता मापने और नगर निगम के आंकड़ों से उसकी तुलना सार्वजनिक करने की मांग की है।
जैन ने यह भी कहा है कि नगर निगम, यातायात पुलिस, परिवहन विभाग और रेलवे को मिलकर सड़क की धूल, कचरा जलाने, निर्माण स्थलों से उड़ने वाली धूल और यातायात जाम से होने वाले प्रदूषण पर तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने 30 दिन के भीतर प्रगति रिपोर्ट सार्वजनिक करने तथा प्रत्येक सेंसर की रीडिंग, माप की इकाई और वैध आंकड़ों का प्रतिशत ऑनलाइन उपलब्ध कराने की मांग की है।
‘साफ हवा सुविधा नहीं, जीवन के अधिकार का हिस्सा’
केसी जैन का कहना है कि स्वच्छ हवा कोई सुविधा नहीं, बल्कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का हिस्सा है। ताज ट्रेपेजियम जोन में स्थित आगरा में प्रदूषण की निगरानी की व्यवस्था विश्वसनीय और पारदर्शी होनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि सेंसरों की आखिरी बार कैलिब्रेशन कब हुई, उनका रखरखाव कौन कर रहा है और गलत रीडिंग देने वाले उपकरणों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है।
जैन ने आईएसबीटी, फोर्ट स्टेशन, दिल्ली गेट, ईदगाह और धूलियागंज जैसे क्षेत्रों में धूल और धुएं पर नियंत्रण के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है। उनका कहना है कि सर्दियों का मौसम सामने है और प्रदूषण का बोझ बच्चों तथा बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर पड़ सकता है। यदि संबंधित विभाग समय रहते कार्रवाई नहीं करते, तो वह इस मामले को उचित न्यायिक मंच पर भी उठाएंगे।