बहन नहीं थी तो 101 बेटियों का भाई बन गया कारोबारी, शाहजहांपुर में 93 हिंदू और 8 मुस्लिम कन्याओं की कराई शादी

-राजीव शर्मा- शाहजहांपुर। अपनी बहनों की कमी को जरूरतमंद बेटियों का भाई बनकर पूरा करने की कोशिश में जुटे नमकीन कारोबारी विनय अग्रवाल ने शाहजहांपुर में 101 कन्याओं का सामूहिक विवाह कराकर अनूठी मिसाल पेश की है। खिरनी बाग में रविवार को आयोजित समारोह में 93 हिंदू और आठ मुस्लिम जोड़ों ने अपने-अपने धर्म की परंपराओं के अनुसार विवाह किया। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों के इस आयोजन में न जाति की दीवार आड़े आई और न मजहब का बंधन। सभी नवविवाहित जोड़ों को गृहस्थी का जरूरी सामान भी उपहार में दिया गया, ताकि वे नई जिंदगी की शुरुआत कर सकें।

Oct 27, 2026 - 21:01
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बहन नहीं थी तो 101 बेटियों का भाई बन गया कारोबारी, शाहजहांपुर में 93 हिंदू और 8 मुस्लिम कन्याओं की कराई शादी
कारोबारी विनय अग्रवाल द्वारा शाहजहांपुर में आयोजित गरीब बेटियों के सामूहिक विवाह समारोह की एक झलक।

विनय अग्रवाल ने बताया कि उन्हें अपनी बहनों की कमी हमेशा महसूस होती थी। इसी भावना ने उन्हें जरूरतमंद परिवारों की बेटियों की शादी में मदद करने के लिए प्रेरित किया। शुरुआत में वह दूसरों के विवाह समारोहों में बिन बुलाए मेहमान की तरह पहुंचकर सहयोग करते थे, लेकिन बाद में उन्होंने इस पहल को व्यवस्थित रूप देने का फैसला किया। उनकी मां सरोज अग्रवाल की सलाह पर सामूहिक विवाह समारोह आयोजित करने की शुरुआत हुई।

11 से 101 कन्याओं तक पहुंचा कारवां

विनय अग्रवाल के मुताबिक, वर्ष 2023 में उन्होंने 11 कन्याओं का विवाह कराया था। अगले वर्ष यह संख्या बढ़कर 21 और उसके बाद 51 हो गई। इस बार 101 कन्याओं का विवाह कराया गया। उन्होंने कहा कि यह सिलसिला आगे भी जारी रहेगा और कन्याओं की संख्या घटने नहीं दी जाएगी।

रविवार को खिरनी बाग में आयोजित समारोह में हिंदू जोड़ों का विवाह वैदिक रीति-रिवाजों से संपन्न हुआ, जबकि मुस्लिम जोड़ों का निकाह उनके धर्मगुरुओं ने पढ़ाया। सभी दुल्हनों को ब्यूटी पार्लर में तैयार कराया गया। दूल्हा-दुल्हनों को 101 कारों में विवाह स्थल तक लाया गया। पूरे आयोजन में ऐसा पारिवारिक माहौल रहा, मानो विनय अग्रवाल का परिवार अपनी ही बेटियों का विवाह करा रहा हो।

मुस्कान की शादी से परिवार को कर्ज से राहत

समारोह में शामिल 24 वर्षीय मुस्कान के भाई शाहिद के लिए यह आयोजन बड़ी राहत लेकर आया। शाहिद ने बताया कि उनके पिता रिक्शा चलाते हैं और मां पान-पुड़िया बेचती हैं। परिवार के लिए दो वक्त के भोजन का इंतजाम करना भी मुश्किल होता है। ऐसे में बहन की शादी के लिए कर्ज लेना पड़ सकता था।

शाहिद ने कहा, ''ऐसे में हमारी बहन की शादी इस समारोह में बड़ी धूमधाम से हो रही है। यह अल्लाह का करम है।'' आर्थिक तंगी के बीच परिवार को अपनी बेटी की शादी सम्मानपूर्वक करने का अवसर मिला।

दिव्यांग पूजा और रामनिवास ने शुरू की नई जिंदगी

जमुका गांव की रहने वाली दिव्यांग पूजा और उनके होने वाले पति रामनिवास के लिए भी यह दिन खास रहा। दोनों के पैर दिव्यांग हैं। उनके पास न खेती है और न ही आय का कोई स्थायी साधन। मुश्किल परिस्थितियों में जीवन गुजार रहे इस जोड़े ने सामूहिक विवाह समारोह में शादी कर नई जिंदगी की शुरुआत की। विवाह के बाद दोनों के चेहरों पर खुशी साफ झलक रही थी।

टीवी, फ्रिज और वाशिंग मशीन समेत गृहस्थी का सामान

विनय अग्रवाल का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल विवाह की रस्में पूरी कराना नहीं, बल्कि बेटियों को नई गृहस्थी बसाने में मदद करना भी है। इसी के तहत प्रत्येक नवविवाहित जोड़े को टेलीविजन, फ्रिज, वाशिंग मशीन, बिस्तर, अलमारी और रोजमर्रा की जरूरत की अन्य वस्तुएं उपहार में दी गईं। इससे नवदंपतियों को वैवाहिक जीवन की शुरुआत में जरूरी सामान जुटाने के आर्थिक बोझ से राहत मिलेगी।

इस आयोजन में विनय अग्रवाल की पत्नी श्वेता, भाई कुणाल, भाभी नेहा और मां सरोज अग्रवाल ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। परिवार के सदस्य विवाह की रस्मों से लेकर आयोजन की व्यवस्थाओं तक में जुटे रहे।

तीन चरणों में जांच के बाद हुआ 101 कन्याओं का चयन

विनय अग्रवाल ने बताया कि वह अपने दिवंगत पिता अशोक अग्रवाल के जन्मदिन के अवसर पर रामनवमी के आसपास इस सामूहिक विवाह समारोह का आयोजन करते हैं। इस बार करीब 200 आवेदन मिले थे। तीन स्तरों पर जांच के बाद 101 कन्याओं का चयन किया गया। दोबारा शादी करने वाली और आर्थिक रूप से संपन्न कन्याओं के आवेदन निरस्त कर दिए गए।

उन्होंने स्पष्ट किया कि वह इस आयोजन के लिए किसी से आर्थिक सहयोग नहीं लेते। पहले कुछ लोगों ने मदद की पेशकश की थी, लेकिन उन्होंने उनसे कहा कि वे भी जरूरतमंद कन्याओं के विवाह कराएं। जरूरत पड़ने पर वह स्वयं उनकी मदद करेंगे।

समाजसेवी ने बताया अनुकरणीय पहल

शहर के चिकित्सक और समाजसेवी डॉ. सत्य प्रकाश मिश्रा ने कहा कि शाहजहांपुर के लिए यह गर्व की बात है कि 101 कन्याओं का विवाह पारिवारिक माहौल में उनकी जरूरतों का ध्यान रखते हुए कराया गया। उन्होंने समाज के दूसरे लोगों से भी जरूरतमंद परिवारों की मदद के लिए आगे आने की अपील की।

डॉ. मिश्रा ने कहा कि सच्ची मदद जाति, धर्म, गरीबी या अमीरी देखकर नहीं की जाती। निस्वार्थ भाव से जरूरतमंदों की सहायता करना ही वास्तविक समाजसेवा है।

शाहजहांपुर में विनय अग्रवाल की यह पहल केवल 101 जोड़ों के विवाह तक सीमित नहीं है। अपनी बहनों की कमी को जरूरतमंद बेटियों का भाई बनकर पूरा करने की उनकी कोशिश सामाजिक समरसता और मानवीय संवेदना की मिसाल बन गई है। अलग-अलग धर्मों के जोड़ों का उनकी परंपराओं के अनुसार विवाह और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को सहयोग इस आयोजन की खास पहचान रहा।

SP_Singh AURGURU Editor