बरेली में बीमार पत्नी को ठेले पर ले गया बुजुर्ग, जिला अस्पताल की संवेदनहीनता ने शर्मसार की स्वास्थ्य व्यवस्था, बेबस पति बोला- एम्बुलेंस नहीं, इलाज नहीं… अगर मरना ही है तो घर पर क्यों न मरें, डीएम ने जांच कमेटी बनाकर तीन दिन में मांगी रिपोर्ट
-आरके सिंह- बरेली। उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था के दावों की पोल खोलती एक बेहद मार्मिक और शर्मनाक तस्वीर बरेली जिला अस्पताल से सामने आई है। यहां एक गरीब बुजुर्ग अपनी बीमार पत्नी को इलाज दिलाने जिला अस्पताल पहुंचा, लेकिन घंटों इंतजार के बाद भी न तो उसे समुचित इलाज मिला और न ही अस्पताल से एम्बुलेंस की सुविधा। आखिरकार लाचार पति अपनी पत्नी को ठेले (रिक्शा ट्रॉली) पर लादकर वापस घर ले जाने को मजबूर हो गया।
इस दर्दनाक घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी अविनाश सिंह ने तीन वरिष्ठ अधिकारियों की जांच कमेटी गठित कर तीन दिन में रिपोर्ट तलब की है।
इलाज नहीं मिलेगा तो घर पर ही मर जाएं
रविवार सुबह वायरल हुए वीडियो में बुजुर्ग का दर्द और गुस्सा साफ दिखाई दे रहा है। वीडियो में उसकी पत्नी बेहद कमजोर हालत में ठेले पर लेटी नजर आ रही है, जबकि बुजुर्ग अस्पताल प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जाहिर करते हुए कहता सुनाई दे रहा है- अगर इलाज नहीं मिलना है तो घर पर ही क्यों न मर जाएं।
बताया जा रहा है कि बुजुर्ग अपनी पत्नी को एम्बुलेंस से इलाज के लिए जिला अस्पताल लेकर आया था। आरोप है कि घंटों इंतजार के बावजूद महिला को न तो समय पर भर्ती किया गया और न ही उचित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई।
थक-हारकर बुजुर्ग ने पत्नी को वापस घर ले जाने का फैसला किया। अस्पताल परिसर से बाहर निकलते समय कोई वाहन या एम्बुलेंस उपलब्ध नहीं हुई, जिसके बाद उसने मजबूरी में ठेले का सहारा लिया।
वीडियो वायरल होते ही हरकत में आया प्रशासन
घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने के बाद लोगों में भारी आक्रोश फैल गया। कई लोगों ने इसे सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली और अस्पताल प्रशासन की संवेदनहीनता का प्रतीक बताया।
मामले की जानकारी मिलते ही जिलाधिकारी अविनाश सिंह ने एडीएम सिटी सौरभ दुबे, एडीएम एफआर संतोष कुमार सिंह और सीएमओ डॉ. विश्राम सिंह की तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय जांच कमेटी गठित कर दी। कमेटी को तीन दिन के भीतर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।
डॉक्टर को नोटिस, दोषियों पर होगी कार्रवाई
सीएमओ डॉ. विश्राम सिंह ने बताया कि मरीज को पर्याप्त सुविधा दिए बिना रेफर करने वाले संबंधित डॉक्टर को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
वहीं डीएम अविनाश सिंह ने कहा कि जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि अस्पतालों में लापरवाही और संवेदनहीनता किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
सरकारी दावों पर खड़े हुए सवाल
इस घटना ने आयुष्मान भारत और मुफ्त इलाज जैसी सरकारी योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक तरफ सरकार बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के दावे करती है, वहीं दूसरी तरफ एक गरीब बुजुर्ग अपनी बीमार पत्नी को ठेले पर ले जाने को मजबूर दिखाई देता है।
यह तस्वीर केवल एक परिवार की पीड़ा नहीं, बल्कि उस सिस्टम की हकीकत भी बयां करती है जहां कई बार गरीब मरीज अस्पतालों में इलाज से ज्यादा उपेक्षा का शिकार होते हैं।