भाजपा का सम्मान कार्यक्रम बना अव्यवस्था का मंच, पसीने में डूबी रहीं वसुंधरा, मंच पर भीड़ और हंगामा
आगरा। आपातकाल के 50 वर्ष पूरे होने पर भारतीय जनता पार्टी द्वारा आज आयोजित किये गये लोकतंत्र सेनानी सम्मान समारोह की तस्वीरें बेहद शर्मनाक बन गईं। आयोजन स्थल पर अव्यवस्थाओं ने ऐसा रूप लिया कि कार्यक्रम की मुख्य अतिथि भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व राजस्थान पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया तक को बार-बार पसीना पोंछते और हाथ से हवा करते देखा गया। मंच और सभागार में इस कदर अव्यवस्था फैली कि लोकतंत्र रक्षक सेनानी, जिन्हें सम्मानित करने के लिए यह कार्यक्रम रखा गया था, खुद मंच से दूर धक्के खाते और हंगामा करते दिखे।
हॉल से बाहर तक भीड़, एसी फेल, कुर्सियां नदारद
कार्यक्रम आरबीएस डिग्री कॉलेज के रावकृष्ण पाल ऑडिटोरियम में आयोजित किया गया था, लेकिन हॉल की क्षमता से कई गुना ज्यादा भीड़ पहुंच गई। एसी काम नहीं कर रहा था। पंखे नाकाफी थे और उमस से लोग बेहाल हो गए। मंच पर बैठे नेता पसीना पोंछते रहे, और कार्यकर्ता जमीन पर बैठे हुए थे। कुछ तो कार्ड और पर्चियों से हवा करते दिखे।
मंच पर कब्जा, नीचे धक्का-मुक्की
कार्यकर्ताओं ने मंच पर इस कदर कब्जा कर लिया कि संचालक की लगातार घोषणाएं भी बेअसर रहीं। यह अव्यवस्थाएं देख मंच के सामने लगी कुर्सियों पर बैठे लोकतंत्र रक्षक सेनानी नाराज़ हो गए। जब उन्होंने खड़े कार्यकर्ताओं से बैठने को कहा तो बात बहस और फिर धक्का-मुक्की तक पहुंच गई। स्थिति बिगड़ती देख विधायक पुरुषोत्तम खंडेलवाल को खुद मंच से उतरकर बीच में आना पड़ा। उन्होंने माफी मांगी और कार्यकर्ताओं को मंच खाली करने की फटकार भी लगाई।
विधायक पुरुषोत्तम खंडेलवाल मंच से बोले, ये फोटो सेशन नहीं है, यहां केवल लोकतंत्र सेनानी बैठेंगे, बाकी कार्यकर्ता नीचे जाएं। इसके बाद भी कार्यकर्ताओं पर इसका कोई असर नहीं दिखा और मंच पर भीड़ जमी रही।
सम्मान के नाम पर अपमान, सेनानियों को नहीं मिला मंच
इस कार्यक्रम का उद्देश्य था लोकतंत्र सेनानियों का सम्मान था, लेकिन अव्यवस्था के चलते अधिकांश सेनानी मंच तक पहुंच ही नहीं पाए। जो किसी तरह पहुंचे भी, उन्हें नाम पुकारने या औपचारिकता के बिना जल्दबाजी में शॉल थमाकर भेज दिया गया। पूरा कार्यक्रम एक फोटो सेशन शो में तब्दील होता दिखाई दिया।
वसुंधरा ने ली चुटकी- ‘जैसे घर में हूं!’
अपने संबोधन की शुरुआत में वसुंधरा राजे ने कार्यक्रम की अराजक स्थिति पर चुटकी लेते हुए कहा, यहां आकर लग रहा है जैसे घर आ गई हूं। किसी को बाहर भेजना पड़ा, कोई मंच पर लड़ रहा था, कोई नीचे। ऐसा लग रहा है जैसे घरेलू कार्यक्रम हो।
आयोजन की चूक जो सामने आईं
दरअसल कार्यक्रम में हॉल की क्षमता से अधिक भीड़ आ गई थी। एसी और पंखों के काम न करने से बंद हॊल के अंदर गर्मी और घुटन का माहौल था। कुर्सियां कम होने से लोग ज़मीन पर भी बैठे हुए थे। मंच पर अवांछित भीड़ मौजूद थी, जो भाजपा के कार्यक्रमों में प्रायः नहीं दिखती। यही वजह रही कि जिन्हें सम्मानित किया जाना था, उन तक को उचित स्थान नहीं मिल सका।