गधापाड़ा मालगोदाम से पेड़ काटने पर सीईसी सख्त, रिपोर्ट लिखाने को तैयार नहीं कोई

आगरा। रेलवे गधापाड़ा मालगोदाम की जमीन का आवंटन और उस पर ऒफिसियल तौर पर कब्जे के बगैर ही शहर के बीचोंबीच स्थित इस बड़े भूखंड से रातोंरात तमाम पेड़ काट दिए जाने का मामला अब रेलवे के ही गले की फांस बन गया है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित एम्पावर्ड कमेटी (सीईसी) ने शुक्रवार को आगरा पहुंचकर गधापाड़ा मालगोदाम का मुआयना किया। सीईसी इस मामले में मुकदमा दर्ज करने के लिए कह रही है। जमीन का आवंटन करने वाली रेलवे लैंड डवलेपमेंट अथॊरिटी यह कहकर पल्ला झाड़ रही है कि रिपोर्ट तो आगरा के डीआरएम कराएंगे। डीआरएम ऒफिस भी इसके लिए तैयार नहीं है।

Dec 19, 2024 - 23:06
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गधापाड़ा मालगोदाम से पेड़ काटने पर सीईसी सख्त, रिपोर्ट लिखाने को तैयार नहीं कोई
गधापाड़ा रेलवे मालगोदाम परिसर में जलाए गए पेड़, जिनकी अब राख ही नजर आती है।

-दो दिन सुनवाई के बाद सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी ने आगरा में मालगोदाम पहुंचकर की जांच

-रेल लैंड डेवलपमेंट अथॊरिटी के के गले की फांस बन चुका है यह मामला

-डॊ. शरद गुप्ता ने सीईसी से कहा- यह जमीन आगरा शहर की है, रेलवे अब शहर को ही वापस लौटा दे

 

गधापाड़ा मालगोदाम की जमीन का हाल ही में रेल लैंड डेवलपमेंट अथॊरिटी ने गणपति बिल्डर्स को आवंटन किया था। अथॊरिटी ने अभी बिल्डर को केवल अलॊटमेंट लेटर ही दिया था। इधर बिल्डर ने मालगोदाम की जमीन पर अपना कब्जा मानकर वहां अंदर खड़े पेड़ों को साफ करना शुरू कर दिया था। कुछ पेड़ जला दिए गए तो कुछ कटवा दिए गए।

शहर के पर्यावरण के लिए लड़ाई लड़ रहे पर्यावरणविद डॊ. शरद गुप्ता इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में ले गए। अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी देख रही है। सीईसी के दिल्ली में चाणक्यपुरी स्थित कार्यालय में लगातार दो दिन तक इस मामले को सुना गया। इसमें डॊ. शरद गुप्ता के अलावा रेल लैंड डेवलपमेंट अथॊरिटी के अलावा रेलवे, वन विभाग, टीटीजेड की चेयरपर्सन के प्रतिनिधि के रूप में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी मौजूद रहे।

सीईसी के समक्ष सुनवाई के दौरान सीईसी के एक सदस्य सुनील लिमये तो गधापाड़ा मालगोदाम की जमीन से पेड़ साफ किए जाने को बहुत सख्त दिखे। सीईसी की ओर से रेल लैंड डेवलपमेंट अथॊरिटी (आरएलडीए) के अधिकारियों से कहा गया कि वे पेड़ काटने के मामले में मुकदमा दर्ज कराएं। इस पर आरएलडीए की ओर से कहा गया कि रिपोर्ट आगरा के डीआरएम कराएं। इस पर सीईईसी में सवाल उठा कि जमीन का आवंटन आप करें और रिपोर्ट कोई और क्यों कराएगा। यह भी चर्चा हुई कि रिपोर्ट वन विभाग दर्ज कराए।

पर्यावरणविद डॊ. शरद गुप्ता ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि गधापाड़ा का मालगोदाम ब्रिटिश काल में बना था। जिस जगह पर मालगोदाम बना है, वह आगरा शहर की जमीन है। अब जबकि मालगोदाम का उपयोग नहीं हो रहा है तो रेलवे को यह जमीन आगरा शहर को ही लौटा देनी चाहिए। डॊ. गुप्ता ने कहा कि आगरा में बच्चों से खेल के मैदान छिन गए हैं।

आगरा में मेट्रो की वजह से आरबीएस इंटर कालेज, आगरा कॊलेज, एसएन मेडिकल कॊलेज, पीएसी ग्राउंड आदि खत्म हो चुके हैं। बच्चों के खेलने के लिए जगह नहीं बची है। इसलिए उनका अनुरोध है कि रेलवे इस जगह को आगरा के बच्चों की खातिर छोड़ दे। यहां सिटी फॊरेस्ट के साथ बच्चों के खेलने के लिए स्थान विकसित किया जाए। डॊ. शरद गुप्ता के इस प्रस्ताव से सीईसी के सदस्य सुनील लिमये ने सहमति जताई।

दो दिन की सुनवाई के बाद सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी की एक टीम आज रेलवे के गधापाड़ा स्थित मालगोदाम का मुआयना करने भी पहुंची। टीम ने मालगोदाम परिसर की वीडियोग्राफी कराकर अन्य जांच पड़ताल भी की।  

SP_Singh AURGURU Editor