आगरा में करबला की याद में निकला चेहल्लुम का जुलूस, नौहे और मातम की सदा
आगरा। गुरुवार को मजलिस-ए-चेहल्लुम के अवसर पर करबला के शहीदों को याद करते हुए मातम किया गया। मिर्जा बाबर अली इमामबाड़ा, माल का बाजार में आयोजित मजलिस के बाद जुलूस निकाला गया, जिसमें ‘खून से रंगी हुई करबला, आज भी है करबोबला…’ की सदा गूंज उठी।
सैयद अली रजा रिजवी ने खिताब करते हुए कहा कि इमाम हुसैन और उनके परिवार पर यजीदी फौज ने अमानवीय अत्याचार किए, उन्हें भूखा-प्यासा रखा गया। चार साल की बच्ची जनाबे सकीना को पानी तक नहीं दिया गया, जिससे उनकी शहादत हो गई। इस दर्दनाक वाकये को याद करते हुए माहौल ग़मगीन हो उठा।
मजलिस के बाद निकला जुलूस मिर्जा बाबर के इमामबाड़े से शुरू होकर मरहूम ए.यू.एच चिश्ती के इमामबाड़े, कटरा काछियान से होता हुआ मस्जिद आगा साहब पर जाकर संपन्न हुआ। रास्ते में शहर की कई अंजुमनों, अंजुमने पंजतेनी शाहगंज, अंजुमने अतफाले गुलामाने हुसैनी, न्यू आगरा अंजुमने हुसैनी, और नाई की मंडी ने गुदड़ी मंसूर खां चौराहा पर ब्लेड व जंजीर कमा का मातम किया।
जुलूस में नजमी जाफरी, एहतराम जाफरी, आफताब जाफरी, अफरोज अब्बास, इंसाफ अली चिश्ती, इम्तियाज हुसैन, प्रिंस चिश्ती, आगाज हैदर, आसिफ चिश्ती, औसाफ चिश्ती, यामीन हुसैन आदि शामिल रहे। पूरे कार्यक्रम के दौरान पुलिस-प्रशासन की भारी मुस्तैदी रही।
गुरुवार को गुदड़ी मंसूर खां चौराहा पर जुलूस-ए-चेहल्लुम के मौके पर मातम करते मुस्लिम समाज के युवक।