नगर निगम में टकराव चरम पर: बिना अधिकारियों के सदन, 72 पार्षदों का हंगामा, निंदा प्रस्ताव पास
आगरा। आगरा नगर निगम में महापौर और नगरायुक्त के बीच चल रहा टकराव अब खुलकर सामने आ गया है। सोमवार को महापौर हेमलता दिवाकर कुशवाहा द्वारा बुलाई गई सदन की बैठक नगरायुक्त की अनुपस्थिति के चलते हंगामे में बदल गई। पार्षदों ने इसे सदन का अपमान बताते हुए नगरायुक्त के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित कर दिया, जिस पर 72 पार्षदों ने हस्ताक्षर किए।
नगरायुक्त की गैरहाजिरी पर फूटा गुस्सा
सदन की कार्यवाही बिना किसी निर्धारित एजेंडे के शुरू हुई, क्योंकि नगर निगम सचिवालय ने बैठक का एजेंडा जारी नहीं किया था। नगरायुक्त की अनुपस्थिति पर पार्षदों ने सदन में जमकर हंगामा किया। महापौर ने कड़े तेवर दिखाते हुए कहा कि सदन की गरिमा सर्वोपरि है और अधिकारियों का अनुपस्थित रहना जनप्रतिनिधियों की अनदेखी है।
मुख्यमंत्री तक पहुंचेगा मामला
महापौर ने स्पष्ट किया कि पार्षदों द्वारा पारित निंदा प्रस्ताव को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेजा जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि अधिकारियों की अनुपस्थिति के फोटो प्रमुख सचिव को भेजे जा चुके हैं और मंडलायुक्त से भी शिकायत की गई है।
40-50 करोड़ के कार्यों में अनियमितता के आरोप
इस विवाद की जड़ हाल ही में मुख्यमंत्री से हुई मुलाकात के बाद और गहरी हो गई है। महापौर ने आरोप लगाया है कि नगर निगम ने अधिनियम 1959 की धारा 117(6)बी का दुरुपयोग कर कार्य ऑफलाइन प्रक्रिया से आवंटित किए। उनका दावा है कि इससे निगम को करीब 9 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। साथ ही रोस्टर प्रणाली को दरकिनार कर ठेकेदारों को एकतरफा काम देने के आरोप भी लगाए गए हैं।
सदन की बैठक पर आज सुबह था असमंजस बरकरार
आज सुबह तक 23 मार्च को प्रस्तावित सदन की बैठक को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई थी। एक ओर महापौर ने बैठक बुलाने के निर्देश दिए थे, वहीं नगर निगम सचिवालय ने एजेंडा जारी नहीं किया। अधिकारियों का कहना था कि शासन के ही निर्देश हैं कि संसद और विधानसभा सत्र के दौरान नगर निगम सदन की बैठक नहीं बुलाई जानी चाहिए क्योंकि सांसद-विधायक भी नगर निगम सदन के सदस्य होते हैं। चूंकि इन दिनों संसद का सत्र चल रहा है, इसलिए शासन के इन्हीं निर्देशों के क्रम में नगर निगम अधिकारियों ने एजेंडा जारी नहीं किया।
उधर महापौर कार्यालय द्वारा जारी पत्र के अनुसार 23 मार्च को सदन की सामान्य बैठक बुलाने के निर्देश दिए गए थे। इसके क्रम में 13 मार्च को विस्तृत नोटिस प्रस्तुत कर सुझाव दिया गया था कि वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए बजट सदन आयोजित करना अधिक उपयुक्त रहेगा ताकि वित्तीय वर्ष 2025 26 की समाप्ति में पहले नगर निगम का बजट पास कराया जा सके।
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज
विपक्ष ने इस पूरे घटनाक्रम को ट्रिपल इंजन सरकार की विफलता करार दिया है। वहीं भाजपा पार्षदों का कहना था कि यह सामान्य सदन है, इसलिए सांसद-विधायकों की अनुपस्थिति से कार्यवाही प्रभावित नहीं होनी चाहिए।