देसी श्वानों से क्रूरता नहीं, करुणा चाहिए: रीलोकेशन और नसबंदी विफलता से बढ़ रहे हैं रेबीज के मामले

समस्या श्वानों की नहीं, सोच की है। जब तक समाज उन्हें बोझ समझेगा, समाधान असंभव रहेगा। अब वक्त है कि हम सह-अस्तित्व को अपनाएं, न कि उन्मूलन को। यह आवाज आगरा से उठी है।

May 16, 2025 - 18:18
 0
देसी श्वानों से क्रूरता नहीं, करुणा चाहिए: रीलोकेशन और नसबंदी विफलता से बढ़ रहे हैं रेबीज के मामले
देशी श्वानों के करुणा का भाव रखने की अपील करते आगरा के पशु प्रेमी।

शहर में बढ़े रेबीज के मामले, कारण है जबरन रीलोकेशन

आगरा। शहर में आवारा श्वानों के काटने और रेबीज के मामलों में तेजी से इजाफा हो रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पीछे सबसे बड़ा कारण रेजीडेंशियल वेलफेयर सोसायटियों  द्वारा देसी श्वानों को जबरन उनके स्थान से हटाया जाना है। इससे उनकी प्रवृत्ति आक्रामक होती है और संक्रमण फैलने की संभावना भी बढ़ जाती है।

नसबंदी प्रोग्राम ज़मीन पर फेल, कोर्ट के आदेशों की अनदेखी

श्वानों की आबादी नियंत्रण के लिए चलाया जा रहा एबीसी (एनिमल बर्थ कंट्रोल) प्रोग्राम शहर में पूरी तरह विफल साबित हो रहा है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए स्पष्ट निर्देशों के बावजूद रेजिडेंसियल सोसाइटीज न केवल इन प्रोग्रामों में सहयोग नहीं कर रही हैं, बल्कि संस्थाओं पर श्वानों को हटाने का दबाव भी बना रही हैं।

कैस्पर्स होम में हुई बैठक, देसी श्वानों के पक्ष में उठी आवाज़

खंदारी स्थित कैस्पर्स होम में शुक्रवार को आयोजित बैठक में पशु प्रेमियों ने देसी श्वानों के प्रति बढ़ती क्रूरता और प्रशासनिक उदासीनता पर चिंता जताई। ऒनरेरी एनिमल वेलफेयर रिप्रजेंटिव्स (एचएडब्ल्यूआर) और कैस्पर्स होम की निदेशक विनीता अरोड़ा ने कहा कि देसी श्वान क्षेत्र के लिए एक प्राकृतिक सुरक्षा तंत्र हैं। उन्हें जबरन हटाने के बजाय उनके मूल स्थान पर ही रहने दिया जाना चाहिए।

आरडब्ल्यूए को करनी होगी ज़िम्मेदारी निभाने की शुरुआत

विनीता अरोड़ा ने सुप्रीम कोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि आरडब्ल्यूए को अपने क्षेत्र में श्वानों के लिए खाने-पीने और आश्रय की व्यवस्था करनी है, लेकिन कई जगहों पर इन्हें बोरों में भरकर नालों में फेंका जा रहा है। यह न केवल कानूनन अपराध है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं के भी खिलाफ है।

पुलिस को नहीं कानून की जानकारी, प्रशासन से अपेक्षित सहयोग नहीं

बैठक में यह भी सामने आया कि कई बार जब बर्बरता के मामले पुलिस तक पहुंचते हैं तो कानून की जानकारी के अभाव में मदद नहीं मिल पाती। ऐसे में जरूरत है कि पुलिस और स्थानीय प्रशासन को पशु अधिकारों से जुड़ी जानकारी दी जाए।

पशु कल्याण समितियों का गठन करें

बैठक में सर्वसम्मति से यह प्रस्ताव पारित किया गया कि आरडब्ल्यूए को नगर निगम व पशु संगठनों के साथ मिलकर एनिमल वेलफेयर कमेटी का गठन करना चाहिए, ताकि समस्या का संवेदनशील और स्थायी समाधान निकाला जा सके।

बैठक में ये पशु प्रेमी मौजूद रहे

इस अवसर पर यश रहेजा, डॉ. तूलिका अग्रवाल, शांतनु बंसल, अंकित शर्मा, गुंजन, प्रतिभा गोस्वामी, गरिमा शर्मा सहित कई पशु प्रेमियों ने शिरकत की और देसी श्वानों के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने की अपील की।

SP_Singh AURGURU Editor