डोनाल्ड ट्रंप का नया दावा, ईरान समझौते की भीख मांग रहा है, हमनें उनकी नेवी को तबाह कर दिया
इन बनते बिगड़ते संबंधों के बीच भारत समेत कई देश अब लंबे समय के लिए प्लानिंग करने लगे हैं। आशंका है कि अभी ये युद्ध लंबा खिंच सकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कल सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों से बात करेंगे।
वाशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अब बेहद आक्रामक हो गए हैं। उन्होंने ईरान से चल रही लड़ाई के बीच गुरुवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान उन्होंने दावा किया कि ईरान उनसे समझौता करने की भीख मांग रहा है। हमने ईरान की नेवी को तबाह कर दिया है। हमने ईरान को न सिर्फ हराया है बल्कि उन्हें तबाह भी किया है। इस प्रेस वार्ता के दौरान नाटो देशों को लेकर भी बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि हमें उनकी नहीं बल्कि उन्हें हमारी जरूरत है।
इस प्रेस कॉन्फ्रेंस से कुछ देर पहले ही डोनाल्ड ट्रंप ने अपने ट्रूथ सोशल पर ईरान को नई धमकी दी। उन्होंने साफ किया है कि अगर जल्द समझौते पर नहीं माने तो परिणाम भयानक होंगे। इसके साथ ही उन्होंने नाटो को भी धमकी दी है कि वो और अमेरिका ईरान युद्ध में नाटो के रवैये को कभी नहीं भूलेंगे।
ट्रंप ने कहा कि ईरानी वार्ताकार बहुत अलग और "अजीब" हैं। वे हमसे समझौता करने की "भीख" मांग रहे हैं, जो उन्हें करना ही चाहिए क्योंकि वे सैन्य रूप से पूरी तरह पराजित हो चुके हैं और उनके वापसी की कोई संभावना नहीं है, फिर भी वे सार्वजनिक रूप से कह रहे हैं कि वे केवल "हमारे प्रस्ताव पर विचार कर रहे हैं." गलत!!! उन्हें जल्द ही गंभीरता दिखानी चाहिए, इससे पहले कि बहुत देर हो जाए, क्योंकि एक बार ऐसा हो गया तो फिर पीछे मुड़ना संभव नहीं होगा, और परिणाम अच्छे नहीं होंगे!"
ईरान युद्ध नये समीकरण गढ़ रहा है। दोस्त और गठबंधन टूट और छूट रहे हैं। नाटो और अमेरिका का नाता दूसरे विश्व युद्ध के बाद से अटूट रहा है, लेकिन ईरान युद्ध में तो दूर नाटो देश होर्मुज खुलवाने के ट्रंप के प्लान में भी बहुत ज्यादा दिलचस्पी नहीं ले रहे। यही कारण है कि इस युद्ध में ट्रंप कई बार नाटो को सुना चुके हैं और आज तो उन्होंने कह दिया कि इस बात को अमेरिकी लोगों और नाटो को कभी नहीं भूलना चाहिए।
अपने सोशल ट्रूथ पर ट्रंप ने लिखा, "नाटो देशों ने ईरान जैसे विक्षिप्त राष्ट्र की मदद के लिए सरासर कुछ नहीं किया है, जो अब सैन्य रूप से पूरी तरह तबाह हो चुका है। अमेरिका को नाटो से कुछ भी नहीं चाहिए, लेकिन इस बेहद महत्वपूर्ण क्षण को "कभी मत भूलना"!"
साफ जाहिर है कि ट्रंप अब नाटो से बेहद निराश हो चुके हैं और ऐसा लगता है कि वो अब मन बना चुके हैं कि नाटो के अस्तित्व से अमेरिका को कोई लाभ नहीं है। ट्रंप कुछ दिनों पहले ही नाटो को डरपोक तक कह चुके हैं। इससे पहले वो नाटो देशों को अमेरिका के भरोसे बैठे रहने वाले देश भी बता चुके हैं। नाटो की तरफ से भी ईरान युद्ध के बाद आधिकारिक बयान आ चुका है कि नाटो के सिद्धांत के अनुसार, सिर्फ हमला होने की स्थिति में ही नाटो के सभी देश एकजुट होकर मुकाबला करेंगे। नाटो के किसी देश ने अगर दूसरे देश पर हमला किया तो फिर नाटो देश उसका हिस्सा नहीं होंगे। साफ है कि नाटो भी अब अमेरिका के भरोसे नहीं रहना चाहता और अपनी लकीर खुद खींचने में लगा है। इसीलिए पश्चिमी देश ब्रिटेन, फ्रांस, इटली और जर्मनी के नेतृत्व में अब अपनी सुरक्षा को मजबूत करने में जुटे हैं।
उधर, क्रेमलिन ने गुरुवार को कहा कि रूसी सांसदों का एक समूह मॉस्को और वाशिंगटन के बीच संबंधों को "पुनर्जीवित" करने के उद्देश्य से संयुक्त राज्य अमेरिका का दौरा कर रहा है.।रूसी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस सप्ताह वाशिंगटन में होने वाली बैठकों में वे अमेरिकी सांसदों से मुलाकात करेंगे।