आग उगल रहा यूरोप, रिकॉर्डतोड़ हीटवेव से जनजीवन बेहाल, ब्रिटेन में जून का सबसे अधिक तापमान, फ्रांस-इटली-स्पेन-जर्मनी में स्कूल बंद, परिवहन और स्वास्थ्य सेवाएं चरमराईं; वैज्ञानिक बोले- जलवायु परिवर्तन के बिना संभव नहीं ये हालात
ब्रुसेल्स। पश्चिमी यूरोप इन दिनों इतिहास की सबसे भीषण और व्यापक हीटवेव की चपेट में है। रिकॉर्डतोड़ तापमान ने ब्रिटेन, फ्रांस, स्पेन, इटली, जर्मनी, स्विट्जरलैंड, बेल्जियम और नीदरलैंड सहित कई देशों में जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। ब्रिटेन में जून महीने का अब तक का सर्वाधिक तापमान दर्ज किया गया है, जबकि फ्रांस ने अपने इतिहास का सबसे गर्म जून दिवस दर्ज किया। अत्यधिक गर्मी के कारण हजारों स्कूल बंद कर दिए गए हैं। रेल और सड़क परिवहन प्रभावित हुआ है। अस्पतालों में मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है तथा कई देशों में रेड अलर्ट जारी कर लोगों को घरों से बाहर न निकलने की सलाह दी गई है।
जलवायु वैज्ञानिकों ने इसे मानवजनित जलवायु परिवर्तन से जुड़ी अब तक की सबसे गंभीर घटनाओं में से एक बताया है और चेतावनी दी है कि यदि ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन नहीं रुका तो भविष्य में ऐसी हीटवेव और भी अधिक विनाशकारी हो सकती हैं।
ब्रिटेन में टूटा जून का तापमान रिकॉर्ड
द गार्डियन की रिपोर्ट के अनुसार ब्रिटेन के मौसम विभाग ने जानकारी दी है कि समरसेट के योविल्टन क्षेत्र में तापमान 36.7 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जो जून महीने में अब तक का सर्वाधिक दर्ज तापमान है। लगातार दूसरे दिन नया रिकॉर्ड बनने से पूरे देश में स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय प्रशासन हाई अलर्ट पर है। कई क्षेत्रों में स्कूलों का संचालन प्रभावित हुआ है तथा लोगों को अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी गई है।
फ्रांस में हजारों स्कूल बंद, कई शहरों में रेड अलर्ट
फ्रांस में तापमान कई स्थानों पर 43 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच गया। राजधानी पेरिस में भी जून का रिकॉर्ड तापमान दर्ज किया गया। भीषण गर्मी को देखते हुए 13 हजार से अधिक स्कूल बंद कर दिए गए हैं और अनेक स्थानों पर परीक्षाओं एवं सार्वजनिक गतिविधियों के समय में बदलाव किया गया है। सरकार ने अधिकांश क्षेत्रों में रेड हीट अलर्ट जारी करते हुए लोगों से दोपहर के समय घरों में रहने की अपील की है।
स्पेन और इटली में बढ़ीं मौतें, स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव
स्पेन और इटली में भीषण गर्मी के चलते हीट स्ट्रोक और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के मामलों में तेजी आई है। इटली में बाहरी कार्यों पर कई क्षेत्रों में समयबद्ध प्रतिबंध लगाए गए हैं ताकि श्रमिकों को अत्यधिक तापमान से बचाया जा सके। अस्पतालों में आपातकालीन मरीजों की संख्या बढ़ने से स्वास्थ्य सेवाओं पर अतिरिक्त दबाव बन गया है।
जर्मनी में परिवहन व्यवस्था प्रभावित
जर्मनी में अत्यधिक गर्मी के कारण रेल परिचालन प्रभावित हुआ है। रेलवे प्रशासन ने यात्रियों को यात्रा स्थगित करने अथवा टिकट रद्द करने की विशेष सुविधा दी है। कई क्षेत्रों में पटरियों और विद्युत ढांचे पर गर्मी का प्रभाव पड़ने की आशंका के चलते अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है।
'हीट डोम' बना संकट की बड़ी वजह
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार उत्तरी अफ्रीका से उठी अत्यधिक गर्म और शुष्क हवाओं ने यूरोप के ऊपर 'हीट डोम' जैसी स्थिति पैदा कर दी है। इस कारण गर्म हवा लंबे समय तक एक ही क्षेत्र में फंसी रही और तापमान लगातार बढ़ता गया। पश्चिमी यूरोप के अनेक हिस्सों में दिन का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच गया, जबकि रात में भी तापमान सामान्य से काफी अधिक बना रहा, जिससे लोगों को राहत नहीं मिल सकी।
वैज्ञानिकों की चेतावनी- जलवायु परिवर्तन के बिना संभव नहीं थी यह गर्मी
विश्व मौसम विश्लेषण समूह के वैज्ञानिकों ने कहा है कि पश्चिमी यूरोप में आई यह रिकॉर्डतोड़ हीटवेव मानवजनित जलवायु परिवर्तन के बिना लगभग असंभव थी। अध्ययन के अनुसार पिछले कुछ दशकों में पृथ्वी के औसत तापमान में वृद्धि के कारण ऐसी भीषण गर्मी की संभावना कई गुना बढ़ गई है। वैज्ञानिकों ने कहा कि आज जो अत्यधिक गर्म रातें देखने को मिल रही हैं, उनकी संभावना पहले की तुलना में लगभग 100 गुना बढ़ चुकी है।
बिजली, कृषि और अर्थव्यवस्था पर भी असर
भीषण गर्मी का असर केवल जनजीवन तक सीमित नहीं है। बिजली की मांग रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है, कृषि फसलें प्रभावित हो रही हैं, जंगलों में आग का खतरा बढ़ गया है और औद्योगिक गतिविधियों पर भी असर पड़ रहा है। कई देशों में जल संरक्षण और ऊर्जा बचत के लिए विशेष दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
विशेषज्ञों ने दी वैश्विक चेतावनी
जलवायु विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने के लिए ठोस वैश्विक कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में यूरोप ही नहीं बल्कि दुनिया के अन्य हिस्सों में भी ऐसी चरम मौसमीय घटनाएं अधिक बार और अधिक तीव्रता के साथ देखने को मिलेंगी। उन्होंने सरकारों से जलवायु अनुकूल बुनियादी ढांचे, हरित ऊर्जा और हीट एक्शन प्लान पर तेजी से निवेश करने का आह्वान किया है।