655 रुपये समर्थन मूल्य पर भड़के किसान नेता राकेश टिकैत, बोले- 1200 रुपये लागत वाले आलू पर सरकार कर रही अन्याय
आगरा/नई दिल्ली। आलू उत्पादक किसानों की बदहाल स्थिति को लेकर भारतीय किसान यूनियन ने केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने केंद्र सरकार पर किसानों के साथ छल करने का गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार की नीतियां किसानों को राहत देने के बजाय उन्हें बर्बादी की ओर धकेल रही हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि आलू खरीद नीति में बदलाव नहीं किया गया और किसानों को लागत के अनुरूप उचित मूल्य नहीं मिला, तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
राकेश टिकैत ने बताया कि उन्होंने 2 मार्च 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर आलू किसानों की समस्याओं से अवगत कराया था। सरकार ने संज्ञान लेने का दिखावा तो किया, लेकिन जो समर्थन मूल्य तय किया गया, वह किसानों के जख्मों पर मरहम नहीं बल्कि नमक छिड़कने जैसा है।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने आलू का समर्थन मूल्य मात्र 655 रुपये 90 पैसे प्रति कुंतल तय किया है, जबकि एक कुंतल आलू पैदा करने में किसान की लागत लगभग 1200 रुपये तक पहुंच रही है। बीज, खाद, कीटनाशक, सिंचाई, मजदूरी और भंडारण की लगातार बढ़ती लागत ने किसानों की कमर तोड़ दी है। ऐसे में यह समर्थन मूल्य किसानों के साथ खुला अन्याय है।
राकेश टिकैत ने सरकार की खरीद नीति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार ने आलू खरीद के लिए ऐसी शर्तें लागू कर दी हैं, जिन्हें पूरा करना सामान्य किसानों के लिए लगभग असंभव है। सरकार केवल 45 से 85 एमएम आकार का आलू खरीदेगी। इसके अलावा आलू पूरी तरह साफ-सुथरा, बिना मिट्टी, मजबूत, रोगमुक्त, बिना कटे-फटे और धूप से अप्रभावित होना चाहिए। टिकैत ने कहा कि इन अव्यावहारिक नियमों के जरिए सरकार किसानों को खरीद प्रक्रिया से बाहर करना चाहती है।
उन्होंने बताया कि सातनपुर आलू मंडी में जब सरकारी खरीद शुरू हुई तो किसानों ने इन शर्तों के विरोध में आलू बेचने से साफ इनकार कर दिया। किसानों का कहना था कि खेत में पैदा होने वाला आलू मिट्टी से ही निकलता है, यदि उसमें मिट्टी नहीं होगी तो क्या उसमें सोना लगा होगा।
राकेश टिकैत ने आरोप लगाया कि सरकार वातानुकूलित कमरों में बैठकर खेती की नीतियां बना रही है, जबकि उसे खेत और किसान की वास्तविक परिस्थितियों का कोई अंदाजा नहीं है। किसान पहले ही मौसम की मार, बिजली संकट, महंगे डीजल और बढ़ती लागत से जूझ रहा है, ऊपर से सरकार की ऐसी नीतियां उसकी मुश्किलें और बढ़ा रही हैं।
भारतीय किसान यूनियन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जल्द नीति में बदलाव नहीं किया तो संगठन सड़क से लेकर संसद तक व्यापक आंदोलन करने को मजबूर होगा।