छावनी विस क्षेत्र का घमासान, ‘भतीजे श्री’ बनाम कद्दावर खेमा, सपा में शुरू हुई सियासी शतरंज

आगरा की छावनी विधानसभा सीट को लेकर समाजवादी पार्टी के भीतर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। चर्चा है कि बसपा से भाजपा में आए एक पूर्व विधायक फिर सक्रिय हैं और छावनी क्षेत्र से टिकट की दावेदारी को लेकर पर्दे के पीछे समीकरण साधे जा रहे हैं। सपा सांसद के करीबी बताए जा रहे एक "भतीजे श्री" के लिए पूर्व जनप्रतिनिधि के पति और एक प्रभावशाली ठेकेदार लॉबिंग में जुटे हैं, जबकि पार्टी का एक कद्दावर नेता और मौजूदा जनप्रतिनिधि इस प्रयास से असहज बताए जा रहे हैं। दोनों खेमों के बीच टिकट को लेकर शुरू हुई सियासी रस्साकशी अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा का प्रमुख विषय बन गई है।

Jun 14, 2026 - 18:25
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छावनी विस क्षेत्र का घमासान, ‘भतीजे श्री’ बनाम कद्दावर खेमा, सपा में शुरू हुई सियासी शतरंज

छावनी सीट पर बढ़ी हलचल, टिकट को लेकर तेज हुए समीकरण

आगरा। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 अभी दूर हैं, लेकिन राजनीतिक दलों में टिकट की लड़ाई ने अभी से रफ्तार पकड़ ली है। आगरा की छावनी विधानसभा सीट भी इन दिनों सियासी चर्चाओं के केंद्र में है। पार्टी के भीतर चल रही गतिविधियों को देखकर यह साफ महसूस किया जा रहा है कि कई दावेदार अभी से अपनी-अपनी जमीन मजबूत करने में जुट गए हैं।

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि बसपा से भाजपा में गए एक पूर्व विधायक एक बार फिर सक्रिय भूमिका में दिखाई दे रहे हैं। उनकी सक्रियता को आगामी चुनावी तैयारियों और टिकट के समीकरणों से जोड़कर देखा जा रहा है। सूत्रों का दावा है कि छावनी क्षेत्र से सपा सांसद के करीबी माने जाने वाले "भतीजे श्री" के लिए माहौल बनाने की कोशिशें लगातार चल रही हैं।

भतीजे श्री के समर्थन में उतरा प्रभावशाली खेमा

कहा जा रहा है कि इस दावेदारी को मजबूत करने के लिए एक पूर्व जनप्रतिनिधि के पति और सपा के करीबी एक प्रभावशाली ठेकेदार ने मोर्चा संभाल रखा है। संगठन और नेतृत्व स्तर पर लगातार संपर्क साधे जा रहे हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि छावनी सीट पर सामाजिक और जातीय समीकरणों को साधने की रणनीति के तहत यह पूरा अभियान चलाया जा रहा है। हालांकि पार्टी के भीतर हर कोई इस प्रयास से सहमत नहीं दिख रहा। एक कद्दावर नेता और मौजूदा जनप्रतिनिधि का खेमा इस दावेदारी को लेकर असहज बताया जा रहा है। उनका तर्क है कि टिकट ऐसे चेहरे को मिलना चाहिए जो संगठन और कार्यकर्ताओं के बीच अधिक स्वीकार्य हो।

कद्दावर नेता ने भी बिछाई अपनी बिसात

सूत्रों के अनुसार, विरोधी खेमा भी पूरी तरह सक्रिय हो चुका है। बताया जा रहा है कि उन्होंने एक पूर्व विधायक को आगे कर नया राजनीतिक समीकरण तैयार किया है। इसका उद्देश्य टिकट की दौड़ को बहुकोणीय बनाना और "भतीजे श्री" की राह को कठिन करना माना जा रहा है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि सपा के भीतर यह लड़ाई सिर्फ एक सीट की नहीं, बल्कि भविष्य के शक्ति संतुलन की भी है। छावनी सीट पर जीत का मतलब पार्टी संगठन और क्षेत्रीय राजनीति में प्रभाव बढ़ाना भी माना जा रहा है।

गुपचुप मुलाकात ने बढ़ाई चर्चाएं

सपा सुप्रीमो अखिलेश  के हालिया आगरा दौरे के दौरान पूर्व विधायक की उनसे हुई कथित मुलाकात ने राजनीतिक चर्चाओं को और हवा दे दी है। मुलाकात को बेहद गोपनीय रखने की कोशिश की गई, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसकी खबर तेजी से फैल गई। अब इस मुलाकात को टिकट की दावेदारी, संगठनात्मक भूमिका या भविष्य के राजनीतिक समीकरणों से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि किसी भी पक्ष की ओर से आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है।

प्रसाद, पैरवी और प्रत्याशा की राजनीति

राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि "भतीजे श्री" पिछले दो चुनावों में भी टिकट की उम्मीद लेकर सक्रिय रहे थे, लेकिन मनोकामना पूरी नहीं हो सकी। ऐसे में इस बार फिर से प्रयासों का दौर शुरू हो गया है। समर्थक इसे राजनीतिक धैर्य बता रहे हैं, जबकि विरोधी इसे बार-बार की दावेदारी के रूप में देख रहे हैं।

फिलहाल छावनी सीट पर टिकट को लेकर तस्वीर साफ नहीं है। लेकिन इतना तय है कि पर्दे के पीछे चल रही सियासी शतरंज आने वाले दिनों में और दिलचस्प होने वाली है। अब देखना यह होगा कि ठेकेदार और समर्थक खेमे का गणित असर दिखाता है या कद्दावर नेता का संगठनात्मक अंकगणित भारी पड़ता है।