यूक्रेन विवाद में रूस का 'मध्यस्थ' बने  पूर्व चीफ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़,  यूक्रेन का  बैंक मांग रहा मुआवजा,  युद्ध में हुआ है संपत्ति का काफी नुकसान

भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ को यूक्रेन के ओस्चैडबैंक मामले में रूस का मध्यस्थ नियुक्त किया गया है। यूक्रेन का सरकारी बैंक रूस से युद्ध के दौरान खोई हुई संपत्तियों के मुआवजे की मांग कर रहा है। यह विवाद रूस-यूक्रेन निवेश संधि में निहित सुरक्षा उपायों पर निर्भर हो सकता है।

Aug 12, 2026 - 18:39
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यूक्रेन विवाद में रूस का 'मध्यस्थ' बने  पूर्व चीफ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़,  यूक्रेन का  बैंक मांग रहा मुआवजा,  युद्ध में हुआ है संपत्ति का काफी नुकसान

मॉस्को। रूस ने भारत के पूर्व मुख्य न्यायधीश डी वाई चंद्रचूड़ को यूक्रेन से संपत्तियों को लेकर विवाद के एक मामले में अपना मध्यस्थ नियुक्त किया है। दरअसल, यूक्रेन के सरकारी स्वामित्व वाले ओस्चादबैंक ने डोनेट्स्क, लुहांस्क, खेरसोन और जापोरिजिया में संपत्तियों को लेकर एक विवाद दाखिल किया है। इसमें उसने रूस से इन इलाकों में युद्ध से हुए नुकसान की भरपाई के लिए मुआवजे की मांग की है।

ओस्चैडबैंक का कहना है कि रूस के आचरण के कारण उसे चारों क्षेत्रों में अपनी संपत्ति और परिचालन का काफी नुकसान हुआ है। बैंक ने 24 जुलाई 2025 को रूस को विवाद की सूचना भेजने के बाद 7 अप्रैल 2026 को औपचारिक रूप से मध्यस्थता प्रक्रिया शुरू की। ऐसे में रूस ने अपनी तरफ से इस मध्यस्थता कार्यवाही में पूर्व भारतीय मु्ख्य न्यायधीश जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ को मध्यस्थ नियुक्त किया है।

ग्लोबल आर्बिट्रेशन रिव्यू ने अगस्त 2025 में अपनी रिपोर्ट में बताया था कि रूस ने विंटरशाल डीया मामले और यूक्रेनी उपयोगिता कंपनी उक्रेनर्गो से जुड़े एक अन्य विवाद में मध्यस्थ के रूप में कार्य करने के लिए एक पूर्व भारतीय मुख्य न्यायाधीश से संपर्क करने की बात स्वीकार की थी। लेकिन इस नियुक्ति का यह मतलब नहीं है कि चंद्रचूड़ रूस के वकील के रूप में काम करेंगे या उसके पक्ष को रखेंगे, बल्कि वे एक पक्ष द्वारा नियुक्त मध्यस्थ के रूप में, तीन सदस्यीय न्यायाधिकरण के एक सदस्य के रूप में बैठेंगे। इन तीनों से स्वतंत्र निर्णय लेने की अपेक्षा की जाती है।

ओस्चैडबैंक ने रूस और यूक्रेन के बीच निवेश के संवर्धन और पारस्परिक संरक्षण पर 1998 में हस्ताक्षरित समझौते के तहत मामला दर्ज किया है। इसे आमतौर पर रूस-यूक्रेन द्विपक्षीय निवेश संधि या बीआईटी के रूप में जाना जाता है। बैंक का कहना है कि रूस के आचरण के परिणामस्वरूप डोनेट्स्क, लुहांस्क, खेरसोन और जापोरिजिया में उसकी काफी संपत्ति और परिचालन का नुकसान हुआ है। अप्रैल 2026 में जारी अपनी घोषणा में बैंक ने मध्यस्थता नोटिस में संधि के तहत रूस के दायित्वों के उल्लंघन के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय कानून के मूलभूत मानदंडों के उल्लंघन का आरोप लगाया है।

यह संधि एक पक्ष के निवेशकों को दूसरे पक्ष के क्षेत्र में किए गए निवेशों के लिए सुरक्षा प्रदान करती है। अनुच्छेद 9 में यह प्रावधान है कि यदि वार्ता विफल हो जाती है, तो एक पक्ष और दूसरे पक्ष के निवेशक के बीच विवादों को मध्यस्थता के माध्यम से सुलझाया जा सकता है। संधि में भूमि अधिग्रहण और मुआवजे से संबंधित सुरक्षा प्रावधान भी शामिल हैं। ऐसे में न्यायाधिकरण को यह निर्धारित करना पड़ सकता है कि ओस्चादबैंक के दावे वाली संपत्तियां, परिचालन संधि के संरक्षित निवेश और क्षेत्रीय दायरे में आते हैं या नहीं। इसके बाद उसे यह विचार करना पड़ सकता है कि क्या रूस के कथित आचरण ने संधि के संरक्षण प्रावधानों का उल्लंघन किया है, जिनमें जब्ती और मुआवजा संबंधी प्रावधान भी शामिल हैं।