नहाय खाय के साथ आज से चार दिवसीय छठ महापर्व प्रारंभ
आज से छठ पूजा का आरंभ नहाय खाय के साथ हो गया है। इस दिन छठ के व्रती स्नान करके पूजा करते हैं। साथ ही, लौकी की सब्जी, दाल और कुछ विशेष चीजों को शुद्धता के साथ बनाकर ग्रहण करती हैं। लौकी के साथ तीन चीजों का सेवन करने का बेहद खास महत्व होता है।
आगरा/टूंडला। 25 अक्टूबर, शनिवार को नहाय खाय के साथ छठ पर्व की शुरुआत हो चुकी है। वहीं, उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देने के साथ यानी 28 अक्टूबर, मंगलवार को इसका समापन हो जाएगा। आज नहाय खाय के दिन महिलाएं सुबह उठकर स्नान करती हैं और पूजा-पाठ करके सात्विक भोजन ग्रहण करती हैं। वहीं, इस दिन लौकी के साथ तीन चीजों को खाने का भी खास महत्व होता है।
छठ पूजा में नहाय खाय के दिन छठ करने वाले व्रती लौकी की सब्जी के साथ-साथ चने की दाल, सरसों का साग और गुड़ से बनी कोई चीज ग्रहण करते हैं। इस दिन भोजन पकाने के लिए घी और शुद्ध सेंधा नमक का ही प्रयोग किया जाता है। व्रती के साथ-साथ परिवार के सभी सदस्य भी यही भोजन करते हैं। इस दिन लौकी की सब्जी, चने की दाल, गुड़ से बनी चीज और सरसों का साग खाने का खास महत्व होता है।
नहाय खाय के दिन बिना लहसुन-प्याज वाली लौकी की सब्जी सेंधा नमक में जरूर बनाई जाती है। इस दिन से व्रती महिलाएं और परिवार के सदस्य सात्विक भोजन करते हैं। लौकी की सब्जी एक हल्का भोजन है और यह आसानी से पच जाता है। ऐसे में व्रती महिला को कठिन व्रत रखने की शक्ति मिलती है। साथ ही, इससे पाचन भी अच्छा बना रहता है। यही कारण है कि नहाय खाय के दिन लौकी की सब्जी बनती है क्योंकि, अगले दिन से उनका व्रत शुरू हो जाता है।
लौकी की सब्जी के साथ नहाय खाय वाले दिन चने की दाल भी बनाई जाती है। इसे शुद्ध माना जाता है और छठ के पर्व में पवित्रता व शुद्धता का खास महत्व होता है। यही कारण है की नहाय खाय के दिन चने की दाल भी बनाई जाती है। साथ ही, इसे बल वृद्धि कारक माना जाता है। ऐसे में चने की दाल का सेवन करने से कठिन व्रत करने की शक्ति मिलती है और सात्विक भोजन से मन में श्रद्धा भाव बना रहता है।
नहाय खाय के बाद से व्रत का आरंभ हो जाता है। साथ ही, छठ पूजा के दिन व्रती को नदी में खड़े होकर अर्घ्य देना होता है। वहीं, सरसों के साग की तासीर गर्म होती है। जिसका सेवन करने से शरीर को गर्माहट मिलती है और ठंड के मौसम में नदी में खड़े होने की शक्ति मिलती है। इससे व्रती सर्दी से बची रहती हैं। यही कारण है कि नहाय खाय के दिन सरसों का साग भी खाया जाता है।
छठ पूजा के त्योहार में गुड़ को पूजा में भी प्रयोग किया जाता है और इसी से बनी खीर खरना के दिन बनाई जाती है। गुड़ का संबंध सीधा सूर्य से भी होता है। इसी वजह से छठ की पूजा में गुड़ प्रयोग करने का खास महत्व होता है। साथ ही, स्वास्थ्य की दृष्टि से भी गुड़ बेहद लाभदायक होता है और इसकी तासीर गर्म होने की वजह से यह शरीर को गर्म बनाए रखने में मदद करता है। इससे महिलाओं को व्रत में भी ठंडे पानी में खड़े होकर सूर्यदेव को अर्घ्य देने की शक्ति मिलती है।