जीवन प्रमाण पत्र अपडेट करने के नाम पर ठगी, आगरा के बुजुर्ग के खाते से उड़ाए दो लाख रुपये

आगरा। ताजनगरी में साइबर अपराधियों ने एक बार फिर नया फॉर्मूला अपनाकर ठगी को अंजाम दिया है। ‘जीवन प्रमाण पत्र’ अपडेट करने का झांसा देकर सिकंदरा क्षेत्र के एक बुजुर्ग व्यक्ति के बैंक खाते से दो लाख रुपये उड़ा लिए गए। यह मामला न केवल साइबर सुरक्षा पर सवाल उठाता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि ठग अब सरकारी योजनाओं और वरिष्ठ नागरिकों की जरूरतों को निशाना बना रहे हैं।

Nov 8, 2025 - 12:02
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जीवन प्रमाण पत्र अपडेट करने के नाम पर ठगी, आगरा के बुजुर्ग के खाते से उड़ाए दो लाख रुपये
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आगरा। ताजनगरी में साइबर अपराधियों ने एक बार फिर नया फॉर्मूला अपनाकर ठगी को अंजाम दिया है। ‘जीवन प्रमाण पत्र’ अपडेट करने का झांसा देकर सिकंदरा क्षेत्र के एक बुजुर्ग व्यक्ति के बैंक खाते से दो लाख रुपये उड़ा लिए गए। यह मामला न केवल साइबर सुरक्षा पर सवाल उठाता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि ठग अब सरकारी योजनाओं और वरिष्ठ नागरिकों की जरूरतों को निशाना बना रहे हैं।

सिकंदरा थाना क्षेत्र की आवास विकास कॉलोनी, सेक्टर-9 के निवासी नरेंद्र मोहन अग्रवाल ने पुलिस में तहरीर दी है। उन्होंने बताया कि 28 अक्टूबर 2025 को उनके फेसबुक अकाउंट पर ‘जीवन प्रमाण पत्र अपडेट करने’ का एक लिंक प्राप्त हुआ। लिंक देखने के तुरंत बाद, उन्हें दो अलग-अलग मोबाइल नंबरों से कॉल आईं। कॉल करने वालों ने खुद को बैंक अधिकारी और सर्विस प्रतिनिधि बताते हुए उनसे खाता संबंधित गोपनीय जानकारी हासिल कर ली।

खाते से उड़ाए दो लाख रुपये

पीड़ित के अनुसार, 29 अक्टूबर 2025 की दोपहर करीब 4:42 बजे, उनके पंजाब नेशनल बैंक, सिकंदरा बोदला रोड शाखा के खाते से ₹2,00,000 रुपये निकाल लिए गए। उन्हें इस ठगी का पता तब चला जब मोबाइल पर डेबिट अलर्ट संदेश आया।

पुलिस की कार्रवाई

पीड़ित नरेंद्र मोहन अग्रवाल ने तुरंत सिकंदरा थाना पहुंचकर लिखित शिकायत दी। पुलिस ने उनकी तहरीर पर अज्ञात साइबर अपराधियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। मामले की जांच सूचना प्रौद्योगिकी (संशोधन) अधिनियम, 2008 के तहत की जा रही है। साथ ही, साइबर टीम भी लिंक और कॉल नंबरों की तकनीकी जांच में जुटी है।

पुलिस की अपील

पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध लिंक या संदेश पर क्लिक न करें। जीवन प्रमाण पत्र जैसी सरकारी सेवाओं से संबंधित अपडेट केवल आधिकारिक वेबसाइटों या निकटतम बैंक या जन सूचना केंद्र से ही करें। बैंक अधिकारी कभी भी फोन पर ओटीपी, एटीएम या पासवर्ड नहीं मांगते।

साइबर ठगी का नया ट्रेंड

इस घटना ने यह साफ कर दिया है कि ठग अब वरिष्ठ नागरिकों और पेंशनभोगियों को निशाना बना रहे हैं। सोशल मीडिया के माध्यम से भेजे जाने वाले नकली लिंक लोगों की बचत पर खतरा बनते जा रहे हैं।