डीईआई में चेतना से एआई तक गूंजा वैश्विक अकादमिक विमर्श, डीएससी-एनएससी सम्मेलन के दूसरे दिन शोध और विचारों का संगम

आगरा। दयालबाग एजुकेशनल इंस्टीट्यूट (DEI), आगरा में चल रहे दयालबाग (कला), विज्ञान एवं अभियांत्रिकी—विकासवादी/पुनर्विकासवादी चेतना (DSC) पर 8वें अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन और 49वें (अंतरराष्ट्रीय) राष्ट्रीय प्रणाली सम्मेलन (NSC) के दूसरे दिन चेतना, ब्रह्मांड, एआई, भौतिक नेटवर्क, क्वांटम फाउंडेशन और सामाजिक-तकनीकी प्रणालियों जैसे विषयों पर गहन अकादमिक विमर्श हुआ। देश-विदेश से आए विशेषज्ञों और युवा शोधकर्ताओं ने अपने शोध प्रस्तुत किए, जबकि पोस्टर सत्र और नेटवर्किंग कार्यक्रम में प्रतिभागियों ने एक-दूसरे के शोध और विचारों पर संवाद किया।

Sep 22, 2026 - 19:22
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डीईआई में चेतना से एआई तक गूंजा वैश्विक अकादमिक विमर्श, डीएससी-एनएससी सम्मेलन के दूसरे दिन शोध और विचारों का संगम
दयालबाग एजुकेशनल इंस्टीट्यूट में चल रहे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन और 49वें राष्ट्रीय प्रणाली सम्मेलन के दूसरे दिन की एक झलक।

14 व्याख्यानों से शुरू हुआ अकादमिक सफर

दूसरे दिन की शुरुआत NSC के 14 योगदानात्मक व्याख्यानों से हुई। इन सत्रों की अध्यक्षता डॉ. प्रेम सरन तिरुमलाई, डॉ. नाजिया सिद्दीकी, डॉ. ए. चरण कुमारी और डॉ. अमन प्रसाद ने की।

इसके बाद जर्मनी के कील विश्वविद्यालय के प्रो. वोल्फगैंग दुशल ने DSC का मुख्य व्याख्यान दिया। उन्होंने ‘क्या हम एक निरंतर विस्तारशील चक्रीय-ब्रह्मांड में रहते हैं?’ विषय पर विचार प्रस्तुत किए।

युवा शोधकर्ताओं ने चेतना और एआई पर रखे विचार

युवा शोधकर्ता मंच (यंग रिसर्चर फोरम) में विभिन्न महत्वपूर्ण शोध विषयों पर प्रस्तुतियां हुईं। जॉर्जिया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, USA के डॉ. अपूर्व रतन मूर्ति ने ‘मस्तिष्क, मन और मशीनों में चेतना की आधुनिक अवधारणाएं’ विषय पर विचार रखे।

कनाडा के यूनिवर्सिटी ऑफ मैनिटोबा के डॉ. अनुराग मूर्ति ने ‘भौतिक नेटवर्क’ विषय पर चर्चा की। वहीं वेस्टर्न यूनिवर्सिटी, ओंटारियो, कनाडा के दया कुमार (MSc) ने ‘एआई के युग में शारीरिक संकेतों के लिए Resolution-Independent Models की दिशा में’ विषय पर अपना शोध प्रस्तुत किया। इस सत्र की अध्यक्षता डॉ. नीरत रे ने की।

भोजनावकाश से पहले युवा शोधकर्ता मंच के अंतर्गत DEI के डॉ. शिरोमन प्रकाश ने ‘क्वांटम फाउंडेशन और मन के दर्शन में संदर्भपरकता एवं Panpsychism: Leibniz के Principle of the Identity of Indiscernibles’ विषय पर व्याख्यान दिया। सत्र की अध्यक्षता DEI के प्रो. सुखदेव राय ने की।

पोस्टर सत्र में शोधकर्ताओं ने साझा किया काम

भोजनावकाश के दौरान NSC प्रतिभागियों का पोस्टर सत्र आयोजित किया गया। इसमें चयनित प्रतिभागियों ने गणमान्य अतिथियों, निर्णायकों और अन्य प्रतिनिधियों के साथ संवाद करते हुए अपने शोध कार्य प्रस्तुत किए।

भोजन के बाद प्रतिनिधियों और DEI के विद्यार्थियों के लिए अनौपचारिक संवाद एवं नेटवर्किंग सत्र हुआ। इसमें विभिन्न विषयों पर विद्वतापूर्ण चर्चाओं के साथ प्रतिभागियों को एक-दूसरे के शोध और अकादमिक रुचियों को समझने का अवसर मिला।

धर्म, ज्ञान और वैश्विक चेतना पर विमर्श

सायंकालीन सत्र में जर्मनी के यूनिवर्सिटी ऑफ एर्लांगेन-न्यूरेंबर्ग के प्रो. एंड्रियास नेहरिंग ने DSC का मुख्य व्याख्यान दिया। उन्होंने ‘ज्ञानमीमांसीय बदलाव—धर्म, ज्ञान-निर्माण और वैश्विक चेतना की उत्तर-औपनिवेशिक चुनौतियां’ विषय पर विचार रखे। इस सत्र की अध्यक्षता DEI के प्रो. के. स्वामी दया ने की।

इसके बाद जर्मनी के गोएथे विश्वविद्यालय, फ्रैंकफर्ट के प्रो. विश्वनाथन रमेश ने ‘सामाजिक-तकनीकी प्रणालियों के विज्ञान एवं अभियांत्रिकी का अंतर्विषयी दृष्टिकोण: प्रणालियां, अधिगम एवं मानव विकास’ विषय पर व्याख्यान दिया। सत्र की अध्यक्षता DEI के प्रोफेसर डी.के. चतुर्वेदी ने की।

छह शोधकर्ताओं ने प्रस्तुत किए शोध-पत्र

दिवस के समापन की ओर DSC के योगदानात्मक शोध-पत्रों का सत्र आयोजित किया गया। इसमें छह चयनित शोधकर्ताओं ने अपने शोध-पत्र प्रस्तुत किए और विभिन्न विषयों पर विद्वतापूर्ण चर्चा में भाग लिया। सत्र की अध्यक्षता DEI की प्रो. सोना आहूजा ने की।

सम्मेलन का दूसरा दिन चेतना, विज्ञान, तकनीक और मानव विकास से जुड़े विविध विषयों पर उच्चस्तरीय अकादमिक विमर्श, शोध प्रस्तुतियों, संवाद और अंतरराष्ट्रीय विद्वानों के बीच ज्ञान-विनिमय के साथ सम्पन्न हुआ।

SP_Singh AURGURU Editor