हिंदू धर्म विविध मतों का संगमः बरेली में संघ के शताब्दी वर्ष में डॉ. कृष्ण गोपाल का आह्वान –संगठित और सशक्त हिंदू समाज का निर्माण हो

-रमेश कुमार सिंह- बरेली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना के 100 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित जनगोष्ठी में संघ के सह सरकार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल ने कहा कि हिंदू धर्म किसी एक मत या पंथ तक सीमित नहीं, बल्कि यह विविध विचारधाराओं, मतों और दर्शन परंपराओं को आत्मसात करने वाला सनातन जीवन-दर्शन है। उन्होंने शताब्दी वर्ष को पूरे हिंदू समाज को एकजुट करने का ऐतिहासिक अवसर बताते हुए स्वयंसेवकों से मनोयोगपूर्वक जुटने का आह्वान किया।

Dec 15, 2025 - 15:48
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हिंदू धर्म विविध मतों का संगमः बरेली में संघ के शताब्दी वर्ष में डॉ. कृष्ण गोपाल का आह्वान –संगठित और सशक्त हिंदू समाज का निर्माण हो
बरेली के आईएमए सभागार में आरएसएस के शताब्दी वर्ष के मौके पर आयोजित जनगोष्ठी को संबोधित करते संघ के सह सरकार्यवाह डॊ. कृष्ण गोपाल।

रविवार सायं आइएमए सभागार में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष पर आयोजित जनगोष्ठी में मुख्य वक्ता डॉ. कृष्ण गोपाल ने कहा कि संघ के संस्थापक डॉ. हेडगेवार ने हताशा में डूबे हिंदू समाज में चेतना जगाने का संकल्प लिया था। आरंभ में उपेक्षा और विरोध हुआ, किंतु स्वयंसेवकों के निस्वार्थ सेवा कार्यों से समाज में सहयोग और स्वीकार्यता का वातावरण बना। स्थापना के 15 वर्षों के भीतर ही संघ की शक्ति का आभास विरोधियों को होने लगा।

उन्होंने कहा कि हिंदू संस्कृति की सबसे बड़ी शक्ति उसकी आध्यात्मिकता है, जो विविधता में एकता, समन्वय और प्रेम स्थापित करती है। हिंदू धर्म अनेक मतों और मजहबों को अपने भीतर समाहित करता है। आज जब विश्व अनेक संकटों से जूझ रहा है, तब भारतीय संस्कृति और हिंदू परंपराओं में समाधान खोजा जा रहा है। दुनिया भारत की ओर आशा भरी दृष्टि से देख रही है। हमें मार्गदर्शन के लिए स्वयं को तैयार करना होगा।

डॉ. कृष्ण गोपाल ने कहा कि हिंदू दर्शन की उदारता का श्रेष्ठ उदाहरण षड्दर्शन में चर्वाक जैसे नास्तिक दर्शन का समावेश है। हिंदू परंपरा संवाद और विमर्श को महत्व देती है। मेरा मत सही है और आपका मत भी सही हो सकता है। इसके विपरीत एकांगी सत्य के आग्रह ने विश्व में अराजकता को जन्म दिया है।

उन्होंने हजार वर्षों से अधिक की परतंत्रता के दुष्परिणामों का उल्लेख करते हुए कहा कि गरीबी, अशिक्षा, नशा, बेरोजगारी और छुआछूत जैसी कुरीतियों से समाज जूझा, किंतु अब पुनः हिंदू चेतना जागृत हो रही है। संयुक्त परिवार हमारी शक्ति रहे हैं—पश्चिमी प्रभाव में आई एकल परिवार प्रवृत्ति के स्थान पर कुटुंब व्यवस्था को फिर सुदृढ़ करना होगा।

कार्यक्रम का उद्घाटन सह सरकार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल, कार्यक्रम अध्यक्ष गुरु सिंह सभा गुरुद्वारा मॉडल टाउन के अध्यक्ष मलिक सिंह कालरा तथा सेंट्रल गुरुपूरब कमेटी के अध्यक्ष परमजीत सिंह ओबराय ने मां भारती और गुरु तेग बहादुर जी के चित्रों पर पुष्पार्चन कर किया।

अपने वक्तव्य में डॉ. कृष्ण गोपाल ने कहा कि भारतीय परंपरा अद्वितीय है—समय और परिस्थितियों के अनुरूप परंपराएं विकसित होती हैं। जब-जब समाज में विकृति आई, तब-तब दिव्य आत्माओं ने दिशा दी। उन्होंने गुरु नानक देव जी के संदेश- ईश्वर एक है, को रेखांकित करते हुए सिख परंपरा की संघर्षशील चेतना का स्मरण कराया। उन्होंने गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहादत वर्ष का उल्लेख करते हुए कहा कि उनका जीवन अत्याचार के विरुद्ध संघर्ष और बलिदान का प्रतीक है। उनके पुत्र गुरु गोविंद सिंह जी द्वारा खालसा की स्थापना ने समाज को पहचान और साहस दिया।

डॊ. कृष्ण गोपाल ने सामाजिक भेदभाव और नशे को बड़ी चुनौती बताते हुए कहा कि युवा हमारी संपदा हैं, उन्हें बचाना होगा। सिख समाज और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ मिलकर समाज-निर्माण में कार्य करें, पलायन रोका जाए और लोगों को जोड़ा जाए। उन्होंने गुरु तेग बहादुर जी के आदर्शों से जीवन-निर्माण का आह्वान किया।

कार्यक्रम के अंत में अध्यक्ष मलिक सिंह कालरा ने संवाद को सार्थक बताते हुए 1984 के सिख दंगों के दोषियों को सजा, सिख बंदियों की रिहाई सहित अन्य विषय उठाए। गोष्ठी में प्रांत प्रचारक धर्मेंद्र कुमार, प्रांत संघ चालक शशांक भाटिया, क्षेत्रीय कार्यकारिणी सदस्य कृष्ण चंद्र, विभाग प्रचार प्रमुख धर्मेंद्र सचान सहित अनेक पदाधिकारी उपस्थित रहे। संचालन सरदार भूपेंद्र सिंह ने किया।

SP_Singh AURGURU Editor