किसी को पॉलिथीन का उपयोग करते देखें तो बहस मत कीजिए, बस ताली बजाइए...संदेश खुद पहुंच जाएगा
बरसात के मौसम में पॉलिथीन से जाम नालियां जलभराव, गंदगी और बीमारियों का बड़ा कारण बनती हैं। सोल्जर्स ऑफ सोसाइटी (SOS) के निदेशक डॉ. नवीन जैन का अनूठा संदेश है कि पॉलिथीन का उपयोग करने वालों से झगड़ा या बहस करने के बजाय उनके लिए ताली बजाकर उन्हें सामाजिक जिम्मेदारी का एहसास कराया जाए। यह सकारात्मक पहल जागरूकता के माध्यम से व्यवहार परिवर्तन का संदेश देती है और स्वच्छ, सुरक्षित एवं जलभराव-मुक्त शहर बनाने का आह्वान करती है।
आगरा। बरसात का मौसम शुरू होते ही शहर की सबसे बड़ी समस्या सामने आ जाती है-जलभराव। थोड़ी सी बारिश में सड़कें तालाब बन जाती हैं, नालियां उफनने लगती हैं और गंदगी पूरे शहर में फैल जाती है। अक्सर इसका सबसे बड़ा कारण कोई प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि हमारी अपनी छोटी-छोटी लापरवाहियां होती हैं। इनमें सबसे बड़ा दोषी है पॉलिथीन का अंधाधुंध उपयोग।
सुविधा के नाम पर कुछ मिनट इस्तेमाल की जाने वाली पॉलिथीन वर्षों तक नष्ट नहीं होती। यही पॉलिथीन नालियों में फंसकर पानी के प्रवाह को रोक देती है। परिणामस्वरूप जलभराव, मच्छरों का प्रकोप, संक्रामक बीमारियां, दुर्गंध और यातायात की परेशानियां पूरे समाज को झेलनी पड़ती हैं। एक व्यक्ति की सुविधा, हजारों लोगों की असुविधा बन जाती है।
हम अक्सर सोचते हैं कि एक पॉलिथीन से क्या फर्क पड़ेगा? लेकिन यही सोच लाखों लोगों की आदत बन जाए तो पूरा शहर उसकी कीमत चुकाता है।
साफ सुथरे आगरा के लिए हमेशा चिंतन मनन करने वाले सोल्जर्स ऑफ सोसाइटी (एसओएस) के निदेशक डॉ. नवीन गुप्ता ने इस स्थिति से निपटने के लिए एक अनोखा और सकारात्मक विचार दिया है। उनका मानना है कि बदलाव हमेशा टकराव से नहीं, बल्कि जागरूकता से आता है।
डॊ. नवीन गुप्ता कहते हैं, जब भी किसी व्यक्ति को पॉलिथीन का उपयोग करते देखें, तो उससे बहस या झगड़ा करने के बजाय उसके लिए ताली बजाइए। यह ताली सम्मान की नहीं, बल्कि एक शांत सामाजिक संदेश होगी। बिना कुछ कहे यह एहसास दिलाएगी कि उसकी यह आदत समाज, पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों के लिए कितनी नुकसानदायक है।
डॊ. गुप्ता के अनुसार, कई बार शब्दों से अधिक प्रभाव एक संकेत छोड़ जाता है। ताली उस व्यक्ति को सोचने पर मजबूर कर सकती है कि आखिर लोग ऐसा क्यों कर रहे हैं। संभव है, वही क्षण उसकी आदत बदलने की शुरुआत बन जाए।
समाज में परिवर्तन कानून से पहले जन-जागरूकता से आता है। यदि प्रत्येक नागरिक पॉलिथीन का उपयोग बंद करने का संकल्प ले और कपड़े या जूट के थैले अपनाए, तो नालियां जाम होने की समस्या काफी हद तक कम हो सकती है। जलभराव रुकेगा, शहर स्वच्छ रहेगा और पर्यावरण भी सुरक्षित रहेगा।
आइए, इस बरसात केवल मौसम का आनंद ही न लें, बल्कि अपनी जिम्मेदारी भी निभाएं। पॉलिथीन को ‘ना’ कहें, पर्यावरण को ‘हां’ कहें और अपने शहर को स्वच्छ, सुरक्षित तथा जलभराव-मुक्त बनाने में सक्रिय भागीदारी निभाएं। ध्यान रहे, एक छोटी-सी आदत बदलने से पूरे शहर की तस्वीर बदल सकती है।