भारतीय उच्चायुक्त बोले, खालिस्तान भारत का नहीं, कनाडा का मुद्दा, हिंसा और अपराध बर्दाश्त नहीं
कनाडा में भारत के उच्चायुक्त दिनेश पटनायक ने खालिस्तान मुद्दे पर कड़ा जवाब दिया है। उन्होंने कहा है कि खालिस्तान भारत में कोई मुद्दा नहीं है, यह कनाडा में मुद्दा है। इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा कि खालिस्तान हिंसा और अपराध को बढ़ावा दे रहे हैं। उन्होंने कनाडा में सिखों के खिलाफ बढ़ते नफरत का भी जिक्र किया।
ओटावा। कनाडा में भारत के उच्चायुक्त दिनेश पटनायक ने खालिस्तान के मुद्दे पर कड़ा जवाब दिया है। उन्होंने दो-टूक कहा है कि भारत में खालिस्तान कोई मुद्दा नहीं है। यह सिर्फ कनाडा में मुद्दा है। उन्होंने चेतावनी भी दी कि खालिस्तान समर्थक जितना मन करे उतना विरोध प्रदर्शन करें, लेकिन हिंसा और अपराध बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे। उन्होंने कनाडा में मौजूद मुट्ठी पर खालिस्तान समर्थकों और बड़ी सिख आबादी के बीच का अंतर भी समझाया। भारतीय उच्चायुक्त ने वर्ल्ड सिख ऑर्गनाइजेशन के उस रिपोर्ट का भी हवाला दिया, जिसमें बताया गया है कि कनाडा में सिखों के प्रति नफरत में लगभग 80% की बढ़ोतरी हुई है।
उन्होंने एक इंटरव्यू के दौरान होस्ट के सवाल का जवाब देते हुए कहा, "कनाडा में मौजूद खालिस्तान समर्थक चरमपंथियों की तुलना सिख आबादी से न करें, जैसा कि मीडिया और बहुत से लोग करते हैं। और मैं आपको एक उदाहरण देता हूं कि मैं इन दोनों के बीच फर्क क्यों कर रहा हूं। भारत के एक मशहूर गायक दिलजीत दोसांझ थे। कनाडा में उनके कई शो हुए थे। मैं टोरंटो में उनके एक शो में मौजूद था, जहां रोजर्स स्टेडियम के अंदर 45,000 सिख दिलजीत दोसांझ को सुन रहे थे। 45,000 सिख। और स्टेडियम के बाहर 15 खालिस्तान समर्थक चरमपंथी खड़े थे, जो विरोध कर रहे थे और स्टेडियम में घुसने की कोशिश कर रहे थे, जिन्हें सुरक्षाकर्मियों ने रोक दिया।"
उन्होंने आगे कहा, "खुद दिलजीत दोसांझ ने कहा, "कृपया उन्हें यहां से हटा दें।" मैं बस यह कहना चाहता हूँ कि स्टेडियम के अंदर 45,000 लोग थे और बाहर 15 लोग। अगर आप यह मानने लगें कि ये 15 लोग उन 45,000 लोगों की बात कह रहे हैं, तो हम आगे नहीं बढ़ सकते। इसलिए सबसे पहले हम सोच में बदलाव चाहते हैं, ताकि यह समझा जा सके कि सिखों के साथ जो हो रहा है, वह खालिस्तान समर्थक चरमपंथियों के साथ हो रही घटनाओं जैसा नहीं है।"
भारतीय उच्चायुक्त ने कहा, वर्ल्ड सिख ऑर्गनाइज़ेशन ने हाल ही में एक रिपोर्ट जारी की है जिसमें कहा गया है कि कनाडा में सिखों के प्रति नफ़रत में लगभग 80% की बढ़ोतरी हुई है। और इसलिए मैं उनमें से कुछ लोगों और सिख समुदाय के कई लोगों से बात कर रहा था। और उनमें से कई लोग इस बात से सहमत थे कि कनाडा में सिखों के प्रति नफरत बढ़ने की वजह कुछ चरमपंथी हैं, जो हिंसा और आत्मघाती हमलावरों को बढ़ावा देते हैं।
कनाडा में भारत के उच्चायुक्त दिनेश पटनायक ने खालिस्तानियों के आतंकवाद, हिंसा के समर्थन की निंदा की। उन्होंने कहा, "अगर आप उनके पोस्टर देखें, तो उनमें नेताओं की हत्या और आत्मघाती हमलावरों की तस्वीरें होती हैं। अगर आप कोई राजनीतिक काम कर रहे हैं, खालिस्तान बनाना चाहते हैं, जनमत संग्रह (रेफरेंडम) कराना चाहते हैं या इन मुद्दों पर काम करना चाहते हैं, तो इसे राजनीतिक तरीके से करें। आपको किसी ने नहीं रोका है। भारत में पिछले 40-50 सालों से ऐसी राजनीतिक पार्टियां रही हैं जिन्होंने खालिस्तान के विचार का समर्थन किया है।"
दिनेश पटनायक ने कहा, "सिमरनजीत सिंह मान की पार्टी 'शिरोमणि अकाली दल (अमृतसर)' खालिस्तान बनाने का समर्थन करती है। एक समय था - 1984 के बाद, जिसे मैं मानता हूं कि हमारे सिस्टम की एक बड़ी गलती थी, जब हमने कुछ ऐसा किया जो हमें नहीं करना चाहिए था - तब खालिस्तान समर्थक पार्टी के प्रांतीय संसद में लगभग सात सदस्य और राष्ट्रीय संसद में दो सदस्य थे। आज उनका कोई सदस्य नहीं है। भारत में यह कोई राजनीतिक मुद्दा नहीं है। खालिस्तान भारत में कोई मुद्दा नहीं है। यह कनाडा में है। इसलिए कनाडा को यह समझना होगा कि अगर कनाडाई नागरिक खालिस्तान से जुड़ी गतिविधियां करते हैं, तो वे कनाडा में ही होंगी। भारत में ऐसा कुछ नहीं है।"
उन्होंने कहा, "मैं पहले दिन से ही कह रहा हूं कि कनाडाई, सिख और भारतीय - सभी को शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने का अधिकार है, चाहे वे खालिस्तान में विश्वास करते हों या किसी अलग देश की मांग करते हों। राजनीतिक तौर पर हमें इससे कोई दिक्कत नहीं है। जैसा कि मैंने आपको बताया, भारत में भी पिछले 40 सालों से राजनीतिक पार्टियां इसकी वकालत करती रही हैं। इसलिए कनाडाई लोग जो कर रहे हैं, वह कोई नई बात नहीं है। और हमने हमेशा इसका समर्थन किया है। हमने कभी भी शांतिपूर्ण राजनीतिक विरोध-प्रदर्शन को दबाने की कोशिश नहीं की है। हम बस इतना कहते हैं कि नकारात्मकता, गंदगी, आतंकवादी तत्व, हथियारों की तस्करी, ड्रग्स की तस्करी, संगठित अपराध और जबरन वसूली जैसी चीज़ों को इसमें शामिल न करें।"