बुजुर्गों से संवाद कर मिलेगी सपनों की उड़ान, जया किशोरी ने युवाओं को दिया सफलता का मंत्र
बरेली। प्रसिद्ध कथा वाचक एवं मोटिवेशनल स्पीकर जया किशोरी ने युवाओं से आह्वान किया कि वे बुजुर्गों के अनुभवों से सीखें और सफलता की दिशा में आगे बढ़ें। उन्होंने कहा कि जीवन में स्थायित्व और सकारात्मक दिशा उन्हीं को मिलती है जो धैर्य से सुनते और समझते हैं। वे मंगलवार रात फरीदपुर स्थित फ्यूचर यूनिवर्सिटी में आयोजित ‘क्षितिज-विचारों से बदलाव तक’ कार्यक्रम में बोल रही थीं।
बुजुर्गों की बातों में छिपे होते हैं जीवन के रहस्य
जया किशोरी ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी छोटे असफल प्रयासों के बाद निराश हो जाती है। लेकिन अगर वे अपने घर के बुजुर्गों से बात करें, तो कई ऐसे रहस्य जान पाएंगे जो जीवन की दिशा बदल सकते हैं। उन्होंने ज़ोर दिया कि माता-पिता और अभिभावक ही ऐसे लोग होते हैं जो बिना शर्त खुश देखना चाहते हैं।
परवरिश में अपनापन ज़रूरी, ताने नहीं
आत्महत्या जैसे घातक कदमों पर चिंता ज़ाहिर करते हुए उन्होंने कहा कि ऐसे फैसले लेने वाले ज़्यादातर युवा अभिभावकों से माफ़ी मांगते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि वे उम्मीदों पर खरे नहीं उतर पाए। उन्होंने कहा कि बच्चों को डाँटने या ताना देने के बजाय उन्हें सुनना और प्रोत्साहित करना ज़रूरी है।
सोशल मीडिया और असली सफलता में अंतर जानें
उन्होंने युवाओं को चेताया कि सोशल मीडिया पर जो सफलता दिखती है, वह ज़रूरी नहीं कि असली हो। हर रुपये कमाने वाला व्यक्ति सफल नहीं होता। सफलता का मापदंड आत्मसंतुष्टि और समाज के लिए सार्थक कार्य है।
सपनों को पूरा करने में उम्र नहीं, जज़्बा ज़रूरी
कार्यक्रम की थीम पर बोलते हुए जया किशोरी ने कहा कि क्षितिज हमारी सोच से परे है, इसलिए बड़ा सोचें और जुट जाएं। उन्होंने कहा कि समाज की बातों से नहीं डरना चाहिए। हर सफल व्यक्ति की आलोचना होती है, पर इससे विचलित नहीं होना चाहिए।
महिला-पुरुष में नहीं, सोच में हो समानता
द्वापर युग की कथा सुनाते हुए जया किशोरी ने कहा कि शास्त्रों में कहीं नहीं लिखा कि महिला घर और पुरुष बाहर का काम करेंगे। यह समाज की बनाई व्यवस्था है। उन्होंने कहा कि संघर्ष महिलाओं और पुरुषों के बीच नहीं, बल्कि समानता की सोच के लिए होना चाहिए और इसमें दोनों की भूमिका अहम है।
सोशल मीडिया आलोचकों पर सीधा प्रहार
उन्होंने सोशल मीडिया पर मिलने वाली नकारात्मक समीक्षाओं पर भी टिप्पणी की। कहा कि दूसरों को जज करने वाले खुद अपनी सफलता से दूर होते हैं। आत्मनिरीक्षण करें और अकेले ही अपने सपनों की ओर बढ़ें। जब उन्होंने अपना मार्ग चुना था तो तमाम चुनौतियाँ आईं, लेकिन कभी हार नहीं मानी।