बारिश को विदा हुए महीने भर से ज्यादा हो गया पर पिनाहट में पौंटून पुल का नामोनिशान तक नहीं

आगरा। विकास की फाइलें फिर कछुए की चाल चल रही हैं! पिनाहट में चंबल नदी पर बनने वाला पौंटून पुल इस बार भी समय पर तैयार नहीं हो सका है। दीपावली बीत चुकी, मगर पुल का नामोनिशान तक नहीं। बरसात खत्म हुए महीने भर से ज्यादा गुजर गया, पर लोक निर्माण विभाग अब भी नींद में है। नतीजा, मध्य प्रदेश के 50 गांव आगरा जिले से कटे हुए हैं। दीपावली की खरीददारी हो या बटेश्वर पशु मेला, मध्य प्रदेश के गांवों के लोगों को पिनाहट-बाह पहुंचने के लिए धौलपुर होकर 100 किलोमीटर लंबा चक्कर काटना पड़ रहा है।

Nov 4, 2025 - 14:35
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बारिश को विदा हुए महीने भर से ज्यादा हो गया पर पिनाहट में पौंटून पुल का नामोनिशान तक नहीं
चंबल नदी पर पिनाहट को एमपी के गांवों से जोड़ने वाला पौंटून पुल तैयार न होने के कारण लोग इस तरह करते हैं चंबल नदीं को पार।

हर साल यह पुल चंबल के दोनों तटों को जोड़ने वाला जीवन-रेखा बनता था। बरसात में जब जलस्तर बढ़ता है तो इसे हटाया जाता है और शरद ऋतु आते ही दोबारा जोड़ दिया जाता है।

पौंटून पुल हर वर्ष यह दीपावली से पहले तैयार हो जाया करता था। इस पौंटून पुल के जरिए चंबल के पार मध्य प्रदेश के 50 गांवों के लोगों का आवागमन इसी के जरिए पिनाहट और बाह क्षेत्र में होता है।

चंबल में बरसात के दिनों में पौंटून का पुल हटा लिया जाता है क्योंकि जलस्तर पर पीपों के बहने का खतरा रहता है, लेकिन बरसात खत्म होते ही जब चंबल का जलस्तर कम हो जाता है तो पौंटून पुल फिर से तैयार कर दिया जाता है। जब पौंटून पुल नहीं होता तो चंबल को पार करने के लिए स्टीमर की एकमात्र सहारा होते हैं। स्टीमरों से पैदल, साइकिल और बाइक सवार तो इधर से उधर आ जाते हैं, लेकिन चार पहिया वाहनों को स्टीमर से पार नहीं कराया जा सकता।

इन दिनों शादियों का सीजन शुरू हो चुका है। आगरा के पिनाहट और चंबल के उस पर मध्य प्रदेश के 50 गांवों की इधर से उधर रिश्तेदारियां हैं। शादियों के सीजन में लोगों का आवागमन बहुत बढ़ गया है। लोगों को स्टीमर का सहारा लेकर इधर से उधर जाना पड़ रहा है जबकि चारपहिया वाहनों को सौ किलोमीटर से ज्यादा का चक्कर लगाकर यहां तक पहुंचना पड़ता है।

क्षेत्र के निवासी प्रशांत भारद्वाज कहते हैं, पिनाहट के पौंटून पुल को तैयार करने में देरी अब हर साल की कहानी हो चुकी है। पिछले साल भी एक महीने की देरी से पौंटून पुल तैयार हो पाया था। इस बार भी यही हाल है। आखिर लोक निर्माण विभाग समय पर क्यों नहीं चेतता, यह जानते हुए भी कि यह पौंटून पुल दो राज्यों के लोगों को जोड़ता है।

SP_Singh AURGURU Editor