‘राम आ गए हैं…’ से गूंज उठी जनकपुरी, सूर्यवंश के तिलक के दिव्य दर्शन से भावविभोर हुए श्रद्धालु

आगरा की भावना एस्टेट स्थित जनकपुरी महोत्सव में बुधवार शाम भक्ति और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। जनक मंच पर प्रभु श्रीराम, माता सीता और चारों भाइयों के दिव्य स्वरूपों के दर्शन ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। ‘देखो अपने रामलला मिथिला आए हैं, हमारे राम आ गए हैं…’ की काव्य प्रस्तुति के साथ पूरा परिसर जय श्रीराम के जयघोष से गूंज उठा। केंद्रीय राज्य मंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल ने 149 वर्ष पुरानी रामलीला परंपरा को आगरा की ऐतिहासिक विरासत बताते हुए श्रीराम के आदर्शों को आज के समय में भी प्रासंगिक बताया।

Oct 7, 2026 - 22:07
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‘राम आ गए हैं…’ से गूंज उठी जनकपुरी, सूर्यवंश के तिलक के दिव्य दर्शन से भावविभोर हुए श्रद्धालु
जनकपुरी के मंच पर विराजमान मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम और माता सीता। साथ हैं तीनों भाई व गुरुजन।

 

आगरा। बुधवार की शाम भावना एस्टेट स्थित जनकपुरी महोत्सव में भक्ति का ऐसा अद्भुत दृश्य साकार हुआ, मानो सूर्यवंश के तिलक प्रभु श्रीराम के मिथिला आगमन के साथ ही जनकपुरी में ऐसा सूर्य उदित हो गया हो, जिसका कभी अस्त नहीं होता। चारों ओर प्रकाश, मंच पर प्रभु श्रीराम का दिव्य स्वरूप, माता सीता की अलौकिक छवि और लक्ष्मण, भरत एवं शत्रुघ्न के साथ रघुनंदन का विराजना... पूरा वातावरण मानो त्रेता युग की उसी मिथिला में बदल गया, जहां जनकनंदिनी सीता अपने राम की प्रतीक्षा कर रही थीं।
अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कवयित्री डॉ. रुचि चतुर्वेदी की भावपूर्ण पंक्तियां “देखो अपने रामलला मिथिला आए हैं, हमारे राम आ गए हैं…” जैसे ही जनक मंच से गूंजीं, श्रद्धालुओं के जय श्रीराम के उद्घोष से पूरा परिसर गूंज उठा। ऐसा लगा मानो अंबर से देव सुमन बरस रहे हों और मिथिला के कण-कण में राम के आगमन का उत्सव उतर आया हो। प्रभु श्रीराम सूर्य तिलक से सुसज्जित दिव्य मुकुट और मनोहारी श्रृंगार में चारों भाइयों के साथ मंच पर विराजे तो श्रद्धालुओं की आंखें उनके दर्शन से तृप्त होने का नाम नहीं ले रही थीं। जिस सूर्यवंश में मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम ने जन्म लिया, उसी सूर्यवंश के तिलक का प्रकाश उस शाम पूरी मिथिला को आलोकित करता प्रतीत हुआ।

राजा जनक के आंगन में हुआ राम का भव्य स्वागत

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि केंद्रीय राज्य मंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल, प्रांत प्रचारक धर्मेंद्र जी, मधु बघेल, भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष बृज बहादुर, पुलिस कमिश्नर दीपक कुमार, जनकपुरी महोत्सव आयोजन समिति के अध्यक्ष राजू यादव और स्वागत अध्यक्ष अरविंद शर्मा ने प्रभु श्रीराम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न एवं माता सीता के स्वरूपों का मंच पर स्वागत एवं अभिनंदन किया।
इसके बाद राजा जनक अशोक कुमार गोयल और रानी सुनैना लता गोयल के साथ जनकपुरी महोत्सव आयोजन समिति के अध्यक्ष राजू यादव और अनीता यादव ने प्रभु श्रीराम सहित सभी स्वरूपों की विधिवत आरती उतारी। आरती की लौ और प्रभु श्रीराम के दिव्य मुखमंडल का प्रकाश जैसे एकाकार हो गया। पूरा जनक मंच “जय श्रीराम” के जयघोष से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने हाथ जोड़कर प्रभु के दर्शन किए और स्वयं को धन्य महसूस किया।

149 वर्ष पहले जली रामलीला की ज्योति आज भी आलोकित : प्रो. एसपी सिंह बघेल

केंद्रीय राज्य मंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल ने आयोजन को संबोधित करते हुए कहा कि 149 वर्ष पहले आगरा में श्री रामलीला महोत्सव का शुभारंभ हुआ था। तब से चली आ रही यह परंपरा आज भी निरंतर अपनी भव्यता के साथ आगे बढ़ रही है। उन्होंने इस ऐतिहासिक परंपरा को आगे बढ़ाने वाले रामलीला कमेटी और आयोजन से जुड़े सभी लोगों का आभार व्यक्त किया।
उन्होंने विशेष रूप से सेठ कोकामल का स्मरण करते हुए कहा कि उनकी परंपरा और योगदान ने आगरा की रामलीला को विशिष्ट पहचान देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

प्रो. बघेल ने कहा कि आगरा की ऐतिहासिक रामबारात को केवल उत्तर भारत की सबसे बड़ी रामबारात कहना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह पूरे भारत की सबसे भव्य रामबारात के रूप में अपनी पहचान रखती है। उन्होंने जनकपुरी महोत्सव की भव्यता और आयोजन समिति के प्रयासों की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम का जीवन आज भी उतना ही प्रासंगिक है। राम हमें मर्यादा, कर्तव्य, त्याग, सत्य और परिवार तथा समाज के प्रति जिम्मेदारी का संदेश देते हैं। आज के समय में श्रीराम के आदर्शों को जीवन में उतारना और भी आवश्यक है।

नेपाल के जनकपुर की स्मृतियां हुईं जीवंत

भावना एस्टेट स्थित जनकपुरी महोत्सव का पूरा परिसर नेपाल के जनकपुर की स्मृतियों को जीवंत कर रहा था। भव्य जनक मंच को महलनुमा स्वरूप दिया गया था। विशाल शंकर द्वार से प्रवेश करते ही श्रद्धालुओं का स्वागत राममय वातावरण में हो रहा था। चारों ओर विद्युत सज्जा ऐसी थी कि मानो मिथिला के आकाश में दीपों का सूर्य उतर आया हो। सड़कों के किनारे श्रीरामचरितमानस की चौपाइयां लिखी गई थीं। विभिन्न झांकियों में रामायण के प्रसंगों को जीवंत किया गया था। चौपाइयों, झांकियों, भजनों और प्रकाश सज्जा ने पूरे परिसर को रामकथा के जीवंत मंच में परिवर्तित कर दिया।

एक ओर जनक मंच पर राम, दूसरी ओर सांस्कृतिक मंच पर कला की गंगा

जनकपुरी महोत्सव में जहां एक ओर जनक मंच पर प्रभु श्रीराम, माता सीता और चारों भाइयों के दिव्य स्वरूपों के दर्शन हो रहे थे, वहीं दूसरी ओर सांस्कृतिक मंच पर भारतीय कला और संस्कृति की मनोहारी प्रस्तुतियां दर्शकों को आकर्षित कर रही थीं। सांस्कृतिक मंच पर ‘इंडिया गॉट टैलेंट’ की विशेष प्रस्तुति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। वहीं विशेष गणेश वंदना की प्रस्तुति ने वातावरण को भक्तिरस से भर दिया। कलाकारों की प्रस्तुतियों पर दर्शकों ने तालियों से उत्साहवर्धन किया। इस तरह एक ओर राममय मिथिला थी तो दूसरी ओर भारतीय संस्कृति और कला की प्रस्तुति—पूरा जनकपुरी परिसर धर्म, भक्ति, संस्कृति और उत्सव के अद्भुत संगम में बदल गया।

दशरथ-कौशल्या के साथ मंच पर विराजे राम के चारों भाई

जनक मंच पर प्रभु श्रीराम अपने अनुज लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न के साथ विराजमान हुए। उनके साथ माता सीता का स्वरूप भी मंच पर उपस्थित रहा। राजा दशरथ के स्वरूप संजय सिंघल और रानी कौशल्या के स्वरूप नीता सिंघल भी मंच पर विराजित थीं।
प्रभु श्रीराम के मस्तक पर सुसज्जित सूर्य तिलक और दिव्य मुकुट विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। ऐसा प्रतीत हो रहा था कि सूर्यवंश के तिलक स्वयं राम के रूप में मिथिला की धरती पर आकर जनकपुर को अपने तेज से प्रकाशित कर रहे हैं।

रुचि चतुर्वेदी की पंक्तियों में साकार हुई राम के आगमन की अनुभूति

अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कवयित्री डॉ. रुचि चतुर्वेदी ने अपनी भावपूर्ण काव्य प्रस्तुति से राम के मिथिला आगमन की अनुभूति को शब्द दिए। उनकी पंक्तियों में भक्ति, वात्सल्य और राम-सीता मिलन की प्रतीक्षा का भाव दिखाई दिया। “देखो अपने रामलला मिथिला आए हैं, हमारे राम आ गए हैं…” की गूंज ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। मंच संचालन डॉ. रुचि चतुर्वेदी और दीपक जैन ने किया।

देव सुमन बरसने जैसा था दृश्य

जनकपुरी की सड़कों पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, रोशनी से नहाया परिसर, रामचरितमानस की चौपाइयां, रामायण प्रसंगों की झांकियां और मंच पर विराजमान प्रभु श्रीराम का दिव्य स्वरूप—हर दृश्य भक्ति की अलग कहानी कह रहा था।
ऐसा लग रहा था मानो देवताओं ने आकाश से पुष्पों की वर्षा कर दी हो, सूर्य ने अपनी सारी आभा मिथिला को समर्पित कर दी हो और जनकपुरी के कण-कण में केवल एक ही स्वर गूंज रहा हो—“राम आ गए हैं।”

आयोजन समिति के पदाधिकारी रहे मौजूद

कार्यक्रम में जनकपुरी महोत्सव आयोजन समिति के अध्यक्ष राजू यादव के साथ अजय अवागढ़, नरेंद्र सिंह सेंगर, अशोक गुप्ता, संजय गोयल, मनोज बंसल, संतोष कटारा, धर्मेश जैन, मनोज जादौन, हितेश लवानियां, मीडिया प्रभारी राणा सुशील सिंह, अरविंद शर्मा, आकाश ग्वाला, पार्षद वेद प्रकाश गोस्वामी, सतीश ठाकुर, रोहन गुप्ता, अनुज भारद्वाज, पंकज पाठक, हेमंत जादौन, भोले चौहान, धीरज शर्मा, धीरज मंगल, रामवली यादव सहित आयोजन समिति के पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे।