17 डिग्री में जर्सी सिटी का नीला आसमान और 24 AQI, आगरा में धुंध और धुआं क्यों? एक ही ठंड, फिर हवा में इतना बड़ा फर्क क्यों?

ठंड अपने आप प्रदूषण नहीं बढ़ाती; समस्या तब गंभीर होती है जब पहले से मौजूद धूल और धुएं को हवा अपने साथ दूर नहीं ले जा पाती। आगरा में सड़क की धूल, वाहनों का धुआं, निर्माण कार्य, कूड़ा जलाना और आसपास के क्षेत्रों से आने वाला प्रदूषण मिलकर हवा को खराब करते हैं। सवाल यह है कि क्या आगरा को साफ हवा के लिए हर बार बारिश या लॉकडाउन जैसी असाधारण परिस्थिति का इंतजार करना पड़ेगा?

Sep 22, 2026 - 20:01
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17 डिग्री में जर्सी सिटी का नीला आसमान और 24 AQI, आगरा में धुंध और धुआं क्यों? एक ही ठंड, फिर हवा में इतना बड़ा फर्क क्यों?
यह चित्र अमेरिका के जर्सी सिटी के आसमान का है, जो 21 सितम्बर 2026 को लिया गया। वायु गुणवत्ता सूचकांक 24 था। ऐसा नीला आसमान हम आगरावासियों को कोविड काल में ही देखने को मिला था

-जर्सी सिटी से एसपी सिंह-

जर्सी सिटी। सोमवार सुबह करीब पांच बजे नींद खुली तो यहां का तापमान 17 डिग्री सेल्सियस था। बाहर देखा तो हवा में ठंडक थी, लेकिन घुटन या धुएं का नामोनिशान नहीं। वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी AQI 24 था। सूर्योदय के बाद आसमान की ओर देखा तो एकदम नीला आसमान और सफेद बादल अपनी अलग ही छटा बिखेर रहे थे।

17 डिग्री तापमान और इतना साफ आसमान देखकर अचानक आगरा याद आ गया। आगरा में दिसम्बर-जनवरी की किसी सुबह तापमान 17 डिग्री हो तो क्या तस्वीर ऐसी ही दिखाई देगी? शायद नहीं। वहां अक्सर जमीन से कुछ ऊंचाई पर धुएं और धुंध की एक परत दिखाई देती है। सांस लेने पर हवा का भारीपन महसूस होता है और AQI तेजी से खराब श्रेणी में पहुंच जाता है।

यहीं से एक सीधा सवाल उठा कि अगर 17 डिग्री तापमान जर्सी सिटी की हवा को खराब नहीं कर रहा, तो आगरा में तापमान गिरते ही हवा इतनी खराब क्यों हो जाती है?

क्या ठंड ही प्रदूषण की असली वजह है?

आगरा में सर्दियों के दिनों में अक्सर यह सुनने को मिलता है कि तापमान गिर गया, इसलिए वाहनों और दूसरे स्रोतों से निकलने वाला धुआं ऊपर नहीं जा पा रहा है। जमीन के पास धुएं की परत जम गई है।

इस बात में कुछ सच्चाई जरूर है, लेकिन पूरी कहानी इतनी सरल नहीं है। ठंड में जब हवा की गति कम हो जाती है तो वातावरण में मौजूद धुआं और बारीक धूल के कण आसानी से दूर नहीं जा पाते। कई बार ऊपर की हवा और नीचे की ठंडी हवा की स्थिति ऐसी बन जाती है कि प्रदूषण जमीन के आसपास ही ठहर जाता है। सुबह के समय यह धुंध और धुएं की परत के रूप में दिखाई देता है।

लेकिन सवाल फिर वही है कि अगर प्रदूषण पैदा ही कम हो, तो जमीन के पास जमा होने के लिए धुआं आएगा कहां से? यही वह बिंदु है जहां आगरा और जर्सी सिटी की कहानी अलग हो जाती है।

21 सितंबर को भी आगरा का AQI 105 क्यों?

आगरा में अभी जनवरी जैसी ठंड नहीं है। इसके बावजूद 21 सितंबर को एक उपलब्ध वायु गुणवत्ता रिपोर्ट में शहर का AQI 105 दर्ज किया गया। यानी समस्या केवल सर्दियों की नहीं है।

तो फिर सवाल यह है कि जब सितंबर में तापमान इतना नीचे नहीं गया है, तब भी आगरा की हवा साफ क्यों नहीं है? इसका जवाब हमारे आसपास ही दिखाई देता है। सड़कों पर उड़ती धूल, निर्माण स्थलों से निकलते बारीक कण, ट्रैफिक, पुराने या अधिक धुआं छोड़ने वाले वाहन, खुले में कूड़ा जलाना और विभिन्न प्रकार के ईंधन का इस्तेमाल, ये सब मिलकर आगरा की हवा को दूषित करते हैं।

आगरा की एक बड़ी समस्या सड़क की धूल भी है। सड़क किनारे जमा मिट्टी और धूल वाहनों के गुजरने से बार-बार हवा में उड़ती है। यानी एक बार सड़क पर गिर चुकी धूल वहीं नहीं रहती, वह फिर हवा का हिस्सा बन जाती है।

क्या आगरा में हर गाड़ी धुआं छोड़ती है?

नहीं। समस्या को सिर्फ वाहनों तक सीमित करना भी ठीक नहीं होगा। लेकिन यह जरूर है कि शहर में वाहनों की संख्या लगातार बढ़ी है। ट्रैफिक में रेंगते वाहन, बार-बार ब्रेक और तेज रफ्तार, डीजल से चलने वाले भारी वाहन, इन सबका असर हवा पर पड़ता है।

इसके साथ सड़क की धूल जुड़ जाती है। फिर कहीं कूड़ा जल रहा हो, कहीं निर्माण कार्य चल रहा हो, कहीं लकड़ी या अन्य ईंधन जल रहा हो तो हवा में नए प्रदूषक जुड़ते जाते हैं।

यानी आगरा की हवा को खराब करने वाला कोई एक खलनायक नहीं है। कई छोटे-बड़े स्रोत मिलकर समस्या पैदा करते हैं।

फिर जर्सी सिटी में ऐसा क्या अलग है?

यहां भी वाहन हैं, ट्रक हैं, उद्योग हैं और निर्माण कार्य होते हैं। यानी न्यू जर्सी स्टेट कोई प्रदूषण-मुक्त जगह नहीं है। फिर भी कई दिनों में हवा साफ क्यों दिखाई देती है? सबसे बड़ा अंतर यह है कि वहां हवा की आवाजाही, मौसम और बारिश प्रदूषकों को लंबे समय तक एक ही जगह टिकने नहीं देते। बीते कल जिस सुबह 17 डिग्री तापमान में AQI 24 दिखाई दिया, उस समय साफ आसमान यह बता रहा था कि केवल ठंड से हवा खराब नहीं होती।

हवा चलती रहे, वातावरण में अच्छा मिश्रण बना रहे और प्रदूषण पैदा करने वाले स्रोत नियंत्रित हों तो ठंड के बावजूद हवा साफ रह सकती है। यानी ठंड समस्या को बढ़ा सकती है, लेकिन ठंड खुद समस्या पैदा नहीं करती।

क्या आगरा का भूगोल भी जिम्मेदार है?

यह सवाल भी महत्वपूर्ण है। आगरा उत्तर भारत के उस बड़े क्षेत्र का हिस्सा है, जहां सर्दियों में हवा की गति कम होने पर आसपास के इलाकों का प्रदूषण भी एक जगह से दूसरी जगह पहुंच सकता है। दिल्ली-एनसीआर और उत्तर भारत के दूसरे हिस्सों में बढ़ने वाला प्रदूषण केवल वहीं नहीं रुकता।

सर्दियों में पराली और दूसरे जैविक पदार्थों के जलने से निकलने वाला धुआं भी हवा के साथ दूर तक जा सकता है। इसलिए आगरा की हवा का मतलब केवल 'आगरा में आज कितना धुआं निकला' नहीं है। सवाल यह भी है कि आज आगरा की ओर हवा क्या लेकर आ रही है?

अक्सर बारिश के बाद आगरा में प्रदूषण नगण्य हो जाता है। आम तौर पर आगरा में बारिश के बाद ही आसमान नीला दिखाई देता है। लेकिन कुछ दिन बाद सड़क की धूल फिर उड़ने लगती है, वाहन चलते रहते हैं और दूसरे स्रोतों से प्रदूषण फिर हवा में आने लगता है और नीला आसमान विलुप्त हो जाता है।

जर्सी सिटी की सुबह आगरा को क्या संदेश दे रही?

जर्सी सिटी की बीते कल की सुबह का सबसे बड़ा संदेश यही है कि 17 डिग्री तापमान और साफ हवा एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं।

अगर आगरा में सर्दियों में तापमान गिरते ही AQI बढ़ जाता है तो केवल मौसम को दोष देना आसान रास्ता है। असली सवाल यह होना चाहिए कि जब हवा की गति कम होती है, तब हमारे शहर में इतना प्रदूषण मौजूद क्यों रहता है कि वह जमीन के पास जमा होकर सांस लेना मुश्किल कर दे?

क्या सड़कों पर धूल कम नहीं की जा सकती? क्या निर्माण स्थलों से उड़ने वाली धूल को रोका नहीं जा सकता? क्या खुले में कूड़ा जलाने पर पूरी तरह रोक नहीं लग सकती? क्या वाहनों के प्रदूषण की नियमित जांच नहीं हो सकती? क्या सार्वजनिक परिवहन को इतना सुविधाजनक नहीं बनाया जा सकता कि हर व्यक्ति को निजी वाहन निकालने की जरूरत न पड़े?

और सबसे बड़ा सवाल कि क्या हम आगरा की हवा को केवल सर्दियों में याद करेंगे या पूरे साल इसे साफ रखने की कोशिश करेंगे?

आगरा को नीले आसमान का इंतजार कब तक?

कोविड लॉकडाउन के दौरान आगरा में भी आसमान का रंग बदला था। कारखाने बंद थे, सड़कों पर वाहनों की संख्या अचानक कम हो गई थी और हवा में प्रदूषण घटने से आसमान असाधारण रूप से साफ दिखाई देने लगा था। उस समय आगरा वालों ने अपनी आंखों से देखा था कि जब प्रदूषण के स्रोत अचानक कम हो जाते हैं तो शहर की हवा कितनी बदल सकती है।

जर्सी सिटी की 17 डिग्री वाली यह सुबह उसी याद को फिर सामने ले आई। सवाल यह नहीं है कि जर्सी सिटी में हवा इतनी साफ क्यों है। असली सवाल यह है कि आगरा की हवा को साफ रखने के लिए हमें क्या बदलना होगा?

आगरा को साफ आसमान देखने के लिए न लॉकडाउन चाहिए, न कोई चमत्कार और न ही जनवरी की जगह कोई दूसरा मौसम। जरूरत सिर्फ इतनी है कि हवा में जाने वाले प्रदूषण को कम किया जाए और शहर की धूल, धुआं तथा वाहनों के उत्सर्जन पर लगातार नियंत्रण रखा जाए।

शायद तब किसी आगरा के किसी निवासी को विदेश की किसी सुबह 17 डिग्री तापमान देखकर यह सोचने की जरूरत नहीं पड़ेगी कि 'हमारे आगरा में ऐसा आसमान कब दिखाई देगा?'

SP_Singh AURGURU Editor