टेंपल कनेक्ट और ब्लूप्रिंट वॉटर की संयुक्त पहल: मंदिरों में प्लास्टिक बोतलों को हटाने के लिए अभियान
-बृज खंडेलवाल- आगरा। देशभर के मंदिरों और तीर्थस्थलों में तेजी से बढ़ते प्लास्टिक कचरे पर अब बड़ा अभियान शुरू हो गया है। आस्था के केंद्रों को स्वच्छ और पर्यावरण के अनुकूल बनाने के उद्देश्य से टेंपल कनेक्ट और ब्लूप्रिंट वाटर ने संयुक्त पहल करते हुए एकल-उपयोग प्लास्टिक बोतलों को चरणबद्ध तरीके से हटाने का निर्णय लिया है। इस पहल का उद्देश्य न केवल मंदिर परिसरों को स्वच्छ बनाना है, बल्कि श्रद्धालुओं में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी की भावना भी विकसित करना है।
मंदिरों में रोजाना लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं, जहां पानी की बोतलों का बड़े पैमाने पर उपयोग होता है और इसके बाद प्लास्टिक कचरे का अंबार लग जाता है। पवित्र स्थलों के आसपास फैलती यह गंदगी लंबे समय से चिंता का विषय बनी हुई थी। इसी समस्या को देखते हुए अब प्लास्टिक के स्थान पर कागज आधारित, रिसाइकिल होने वाली पैकेजिंग को बढ़ावा दिया जाएगा, जो पर्यावरण के लिए कम हानिकारक होगी।
इस अभियान के तहत श्रद्धालुओं को अपनी पानी की बोतल साथ लाने के लिए भी प्रेरित किया जाएगा। ‘इको-हीरो’ अभियान के माध्यम से लोगों को यह संदेश दिया जाएगा कि आस्था के साथ-साथ पर्यावरण की जिम्मेदारी निभाना भी उतना ही आवश्यक है।
इस पहल से जुड़े गिरीश वासुदेव कुलकर्णी ने कहा कि धर्म केवल पूजा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमें जिम्मेदारी निभाना भी सिखाता है। यदि मंदिर स्वयं पर्यावरण संरक्षण का उदाहरण बनते हैं, तो समाज में बड़ा बदलाव संभव है। वहीं, अनुज शाह ने इसे एक महत्वपूर्ण अवसर बताते हुए कहा कि मंदिर देश के सबसे बड़े उपभोग केंद्र हैं, जहां छोटे-छोटे बदलाव भी व्यापक प्रभाव डाल सकते हैं।
यह योजना चरणबद्ध तरीके से लागू की जाएगी। पहले कुछ चुनिंदा मंदिरों में इसकी शुरुआत होगी, इसके बाद बड़े धार्मिक आयोजनों और मेलों में इसे विस्तार दिया जाएगा। लक्ष्य है कि आने वाले समय में देश के अधिकांश धार्मिक स्थलों पर ‘ग्रीन वाटर’ व्यवस्था को सामान्य बना दिया जाए।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हर श्रद्धालु एक प्लास्टिक बोतल का उपयोग कम कर दे, तो प्रतिदिन भारी मात्रा में कचरे को कम किया जा सकता है। यह पहल न केवल स्वच्छता की दिशा में एक कदम है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के लिए भी एक मजबूत संदेश है।