'आंगन को आंगन ही रखना, इसमें दीवार नहीं करना'— कवि कुमार ललित का परिवार बचाने का भावपूर्ण संदेश, रेडियो मधुबन पर छाए रिश्तों के स्वर

आगरा। बदलते सामाजिक परिवेश में बिखरते पारिवारिक रिश्तों के बीच कवि एवं उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान से सम्मानित कुमार ललित ने आत्मीय संवाद, अपनापन और पारिवारिक मूल्यों को मजबूत बनाने का सशक्त संदेश दिया। ब्रह्माकुमारीज, माउंट आबू स्थित रेडियो मधुबन के चर्चित ऑनलाइन कार्यक्रम 'बातें मुलाकातें' की 2010वीं कड़ी में फैमिली रिलेशनशिप विषय पर आयोजित विशेष एपिसोड में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए कुमार ललित ने अपने विचारों और गीत-कविताओं के माध्यम से श्रोताओं को रिश्तों की गरिमा बनाए रखने का संदेश दिया।

Jul 25, 2026 - 20:19
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'आंगन को आंगन ही रखना, इसमें दीवार नहीं करना'— कवि कुमार ललित का परिवार बचाने का भावपूर्ण संदेश, रेडियो मधुबन पर छाए रिश्तों के स्वर
ब्रह्मा कुमारीज, माउंट आबू के रेडियो मधुबन के चर्चित ऑनलाइन कार्यक्रम 'बातें मुलाकातें' में आरजे रमेश खेड़े के साथ विचार साझा करते कवि कुमार ललित।

कार्यक्रम का संयोजन एवं संचालन आरजे रमेश खेड़े ने किया। कार्यक्रम के दौरान कुमार ललित ने कहा कि पारिवारिक रिश्तों में सामंजस्य बनाए रखने के लिए सबसे पहले अहंकार का त्याग करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि परिवार में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन मनभेद कभी नहीं होने चाहिए। यदि परिवार के सदस्य आत्मीय संवाद बनाए रखें तो अधिकांश समस्याओं का समाधान सहज रूप से हो सकता है।

कार्यक्रम के दौरान देश-विदेश से लाइव जुड़े दर्शकों और श्रोताओं के प्रश्नों का उत्तर देते हुए कुमार ललित ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी को पारिवारिक संस्कारों और मूल्यों से जोड़ना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि आधुनिक जीवनशैली के बावजूद परिवार की आत्मीयता और अपनापन ही व्यक्ति की सबसे बड़ी पूंजी है।

अपने संबोधन को भावनात्मक स्पर्श देते हुए कुमार ललित ने अपनी चर्चित गीत-पंक्तियों के माध्यम से रिश्तों को संजोने का संदेश दिया—

"कुछ तन अच्छा हो जाएगा।
कुछ मन अच्छा हो जाएगा।
अपनों से मिलते रहना तुम,
जीवन अच्छा हो जाएगा।
रिश्ते, नाते, संबंधों से बढ़कर संसार नहीं करना,
आँगन को आँगन ही रखना, इसमें दीवार नहीं करना।"

इन पंक्तियों ने कार्यक्रम से जुड़े श्रोताओं को भावविभोर कर दिया और परिवार की एकता, प्रेम तथा विश्वास का संदेश गहराई से पहुंचाया।

कार्यक्रम के दौरान सुधा दवे ने लोकप्रिय फिल्मी गीत "अजीब दास्तां है ये, कहां शुरू कहां खत्म..." प्रस्तुत कर वातावरण को संगीतमय बना दिया। उनकी प्रस्तुति को भी श्रोताओं ने खूब सराहा।

रेडियो मधुबन के इस विशेष एपिसोड में पारिवारिक संबंधों, संवाद, संस्कार और सामाजिक मूल्यों पर हुई सार्थक चर्चा को श्रोताओं ने काफी पसंद किया। कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि परिवार की मजबूती केवल रिश्तों से नहीं, बल्कि निरंतर संवाद, विश्वास, त्याग और प्रेम से बनी रहती है।

SP_Singh AURGURU Editor