संगीतमय सुंदरकांड से गूंजा लक्ष्मीनारायण मंदिर, जय श्रीराम से गुंजायमान हुआ परिसर
आगरा के लक्ष्मीनारायण मंदिर परिसर में मंगलवार शाम भक्ति, संगीत और साहित्य का अद्भुत संगम देखने को मिला। रामायण रिसर्च काउंसिल, निर्मल लिटरेचर एंड म्यूजिक फाउंडेशन और श्री श्री आनंदमयी माँ मानस परिवार के आयोजन में पं. योगेश चंद्र शर्मा ‘योगी’ एवं उनके मानस परिवार ने संगीतमय सुंदरकांड की प्रस्तुति दी। ‘रामकाज कीने बिना मोहि कहाँ विश्राम’ पर पूरा परिसर जय श्रीराम के उद्घोष से गूंज उठा। इस अवसर पर एक दर्जन से अधिक संस्थाओं ने पं. योगी का नागरिक अभिनंदन किया।
रामचरितमानस की गायन परंपरा के जनक पं. योगेश चंद्र शर्मा ‘योगी’ का हुआ नागरिक अभिनंदन, एक दर्जन से अधिक संस्थाओं ने किया सम्मान
आगरा। बंबई वाली बगीची-खंदारी स्थित लक्ष्मीनारायण मंदिर परिसर मंगलवार शाम भक्ति, संगीत और साहित्य की त्रिवेणी का साक्षी बना। रामायण रिसर्च काउंसिल, निर्मल लिटरेचर एंड म्यूजिक फाउंडेशन एवं श्री श्री आनंदमयी माँ मानस परिवार के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित समारोह में संगीतमय सुंदरकांड ने ऐसा आध्यात्मिक वातावरण रचा कि रामभक्त, श्रद्धालु और साहित्यप्रेमी भाव-विभोर हो उठे। भक्ति गीत-संगीत के साथ साहित्य सेवा के लिए वरिष्ठ कवि-साहित्यकार पंडित योगेश चंद्र शर्मा ‘योगी’ का नागरिक अभिनंदन भी किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ कानपुर से आए आचार्य गौरव शुक्ला द्वारा व्यास पूजन से हुआ। इसके बाद रामचरितमानस की वर्तमान गायन परंपरा के जनक और रामायणी सम्मान से विभूषित रामचरितमानस मर्मज्ञ पंडित योगेश चंद्र शर्मा ‘योगी’ ने अपने मानस परिवार के अभिन्न अंग आगरा के अजय पाठक तथा कानपुर के योगेश भसीन और विनय तिवारी के साथ संगीतमय सुंदरकांड की प्रस्तुति दी।
रामचरितमानस को विभिन्न रागों और तालों में निबद्ध कर जन-जन के कंठ तक पहुंचाने वाली इस गायन परंपरा की प्रस्तुति ने मंदिर परिसर को भक्तिरस से भर दिया। ‘श्री रामचंद्र कृपालु भजमन, हरण भवभय दारुणम्’ से वातावरण भक्तिमय हुआ। इसके बाद श्री श्री आनंदमयी मां के संकीर्तन और ‘मंगल भवन अमंगल हारी’ की सुमधुर धुन के साथ संगीतमय सुंदरकांड का शुभारंभ हुआ।
सुंदरकांड की संगीतमय प्रस्तुति जैसे-जैसे आगे बढ़ी, श्रद्धालु भक्ति में डूबते चले गए। जब गायन ‘रामकाज कीने बिना मोहि कहाँ विश्राम’ के भावपूर्ण प्रसंग पर पहुंचा तो पूरा मंदिर परिसर ‘जय श्रीराम’ के उद्घोष से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने भाव-विभोर होकर भक्ति गायन का आनंद लिया।
‘रामचरित भारत की आत्मा का स्वर’
समारोह की अध्यक्षता अयोध्या धाम से पधारे संत प्रवर मिथिलेशशरण नंदिनी जी महाराज ने की। उन्होंने कहा कि श्रीरामचरित भारत की आत्मा का स्वर है। प्रतिकूल परिस्थितियों में रामचरित मनुष्य का संबल बनता आया है। उन्होंने पंडित योगेश चंद्र शर्मा ‘योगी’ की साहित्यिक एवं संगीतमय साधना की सराहना करते हुए कहा कि वे श्रीरामचरितमानस को केवल गाते ही नहीं, बल्कि उसके शब्द-शब्द की अर्थच्छवि को भी श्रोताओं के सामने उद्भासित करते हैं। अति विशिष्ट अतिथि मनकामेश्वर धाम के महंत योगेश पुरी और बल्केश्वर धाम के महंत कपिल नागर ने भी राम नाम की महिमा पर प्रकाश डालते हुए पंडित योगेश चंद्र शर्मा ‘योगी’ को शुभाशीष प्रदान किया।
एक दर्जन से अधिक संस्थाओं ने किया नागरिक अभिनंदन
समारोह में पंडित योगेश चंद्र शर्मा ‘योगी’ की साहित्यिक और सांस्कृतिक सेवाओं के लिए विभिन्न संस्थाओं की ओर से नागरिक अभिनंदन किया गया। रामायण रिसर्च काउंसिल और निर्मल लिटरेचर एंड म्यूजिक फाउंडेशन के साथ अखिल भारतवर्षीय ब्राह्मण महासभा, संस्कार भारती जिला आगरा, संस्कार भारती पश्चिम प्रताप शाखा, ऑथर्स गिल्ड ऑफ इंडिया-आगरा चैप्टर, रेस्पेक्ट एज इंटरनेशनल, आगरा बार एसोसिएशन, ब्रजभाषा काव्य मंच, माधुर्य साहित्यिक एवं सांस्कृतिक मंच, साहित्य निधि ओपन कला मंच, समानांतर, सारंग फाउंडेशन, ऑड ईवन फिल्म्स और जयवी सा ग्रुप प्रॉपर्टी वाला सहित एक दर्जन से अधिक संस्थाओं ने उन्हें सम्मानित किया।
‘रघुनंदन मोहि निकारियो ना...’ ने छुआ सभी का मर्म
समारोह में पंडित योगेश चंद्र शर्मा ‘योगी’ ने अपने कविता संग्रह ‘श्री राम चरणामृत’ से काव्य पाठ कर श्रोताओं को भावुक कर दिया। उन्होंने ‘कंटक करुण कथा’ के माध्यम से भगवान श्रीराम से कंटक की मार्मिक विनती प्रस्तुत की। उनकी पंक्तियों ने सभागार में मौजूद श्रद्धालुओं और साहित्यप्रेमियों के मन को छू लिया—
“तुम हो रक्षक प्रभु पतितन्ह के, निज नीति की रीति बिगारियो ना।
सब छाँडि के रावरे पाँव लगे, शरणागत जानि निवरियो ना।
पद लागि सरोज भए हमहूँ, अब कंटक नाम पुकारियो ना।
कसको जो करूँ, सहि लीजो व्यथा, रघुनंदन मोहि निकारियो ना।”
इन पंक्तियों के माध्यम से शरणागत की करुण पुकार और प्रभु श्रीराम के प्रति अटूट विश्वास का भाव उभरकर सामने आया। समारोह का संचालन निर्मल लिटरेचर एंड म्यूजिक फाउंडेशन के अध्यक्ष राकेश निर्मल ने किया। रामायण रिसर्च काउंसिल के ट्रस्टी एवं सेवानिवृत्त आईएएस देवदत्त शर्मा ने सभी अतिथियों, संस्थाओं और उपस्थित श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. श्रीमती कुसुम चतुर्वेदी, डॉ. मधु भारद्वाज, डॉ. गिरीश गुप्ता, श्रीमती रमा वर्मा, आचार्य पंडित दाऊ दयाल शास्त्री और राज बहादुर सिंह राज सहित अनेक साहित्यकार, संत और संस्कृति प्रेमी उपस्थित रहे।
इसके अलावा यतेंद्र सोलंकी, निशिराज, डॉ. युवराज सिंह, डॉ. ब्रज बिहारी लाल बिरजू, रामेंद्र शर्मा ‘रवि’, सूरज तिवारी, डॉ. ज्योत्सना शर्मा, श्रुति सिन्हा, डॉ. राजीव शर्मा निष्पृह, संजय गुप्त, प्रभु दत्त उपाध्याय, आचार्य उमाशंकर पाराशर, मोहित सक्सेना, अंकित सारस्वत, राजकुमार जैन, अशोक गोयल, सुधा वर्मा, यशोधरा यादव, अतुल कुमार, मयंक शर्मा और कुमार ललित प्रमुख रूप से मौजूद रहे।