मासूम से दुष्कर्म के दोषी को उम्रकैद, डीएनए और मेडिकल रिपोर्ट ने पलटा मां-बाप का झूठ

चार वर्षीय बालिका के साथ दुष्कर्म जैसी अमानवीय हरकत करने वाले आरोपी को बरेली की एक अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। बच्ची के मां-पिता ने अदालत में बयान बदलकर आरोपी को बचाने की कोशिश की, मगर डॉक्टर की रिपोर्ट और डीएनए परीक्षण ने सच्चाई सामने ला दी। कोर्ट ने मां के खिलाफ झूठी गवाही देने पर मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया है।

Jul 24, 2025 - 22:05
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मासूम से दुष्कर्म के दोषी को उम्रकैद, डीएनए और मेडिकल रिपोर्ट ने पलटा मां-बाप का झूठ

बरेली। बरेली की पॉक्सो विशेष अदालत ने बुधवार को 4 वर्षीय मासूम से हैवानियत करने के दोषी 25 वर्षीय फारुख को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही 20,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया। विशेष न्यायाधीश देवाशीष पांडेय ने फारुख को दोषी ठहराया, जबकि पीड़िता की मां व पिता द्वारा बयान बदल देने पर मां के विरुद्ध मुकदमा दर्ज करने का निर्देश दिया गया है।

यह था मामला
18 मार्च 2023 को बरेली के थाना हाफिजगंज क्षेत्र के एक गांव में चार साल की बच्ची अपने घर के बाहर खेल रही थी। उसी दौरान पड़ोसी युवक फारुख उसे टॉफी का लालच देकर एक खाली मकान में ले गया और उसके साथ क्रूरता की। बच्ची के घर पहुंचने पर मां को घटना का पता चला। इसी आधार पर थाने में रिपोर्ट दर्ज हुई।

गवाही में बदल गया पूरा रुख:
सुनवाई के दौरान बच्ची की मां और पिता दोनों अदालत में मुकर गए। उन्होंने कहा कि बच्ची खेलते समय ईंट के ढेर पर गिर गई थी, जिससे उसे चोट लगी। परंतु अदालत में डॉक्टर ए. कटियार ने मेडिकल रिपोर्ट के साथ पेश होकर स्पष्ट किया कि जननांग पर लगी ऐसी चोटें सामान्य गिरने से नहीं बल्कि गंभीर हिंसा से ही संभव हैं।

डीएनए रिपोर्ट ने की पुष्टि
वकील राजीव तिवारी ने बताया कि अभियोजन पक्ष ने 9 गवाह पेश किए। डीएनए रिपोर्ट ने यह भी साबित किया कि फारुख ही घटना का दोषी था। तमाम वैज्ञानिक और चिकित्सीय साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने फारुख को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

मां पर भी कार्रवाई
कोर्ट ने टिप्पणी की कि पीड़िता की मां ने न्याय में बाधा उत्पन्न करने का कृत्य किया। इसलिए उनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 344 (झूठे साक्ष्य देने) के तहत मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया गया।

SP_Singh AURGURU Editor