दयालबाग में रिसर्च लेखन का महाकुंभ: वैश्विक विशेषज्ञों की मौजूदगी में अकादमिक गुणवत्ता और शोध नैतिकता पर मंथन

आगरा। दयालबाग शिक्षण संस्थान में अकादमिक और शोध लेखन कौशल को नई दिशा देने के उद्देश्य से दो दिवसीय क्षमता निर्माण कार्यशाला का शुभारंभ बुधवार को हुआ। एआईयू-डीईआई-एएडीसी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में देश-विदेश के प्रतिष्ठित शिक्षाविदों और विशेषज्ञ शोध लेखन की गुणवत्ता, नैतिकता और वैश्विक मानकों पर गहन विचार-विमर्श कर रहे हैं।

Apr 8, 2026 - 14:21
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दयालबाग में रिसर्च लेखन का महाकुंभ: वैश्विक विशेषज्ञों की मौजूदगी में अकादमिक गुणवत्ता और शोध नैतिकता पर मंथन
दयालबाग शिक्षण संस्थान में अकादमिक और शोध लेखन कौशल विषय पर आयोजित कार्यशाला की एक झलक।

उद्घाटन सत्र में गुणवत्ता आधारित शोध पर जोर

कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में संस्थान के निदेशक प्रोफेसर सी. पटवर्धन ने उच्च गुणवत्ता वाले शोध लेखन की अनिवार्यता पर बल देते हुए कहा कि प्रभावी शोध स्पष्ट समस्या निर्धारण, सुसंगत संरचना और तार्किक कार्यप्रणाली पर आधारित होना चाहिए। उन्होंने शोध में निष्पक्षता और व्यक्तिगत विचारों से परे रहकर काम करने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया।

शोध लेखन में स्पष्टता और नैतिकता जरूरी

कार्यक्रम संयोजक एवं नोडल अधिकारी प्रोफेसर ज्योति गोगिया ने कार्यशाला के उद्देश्यों को रेखांकित करते हुए कहा कि विद्वतापूर्ण लेखन में स्पष्टता, सुसंगति और नैतिक मानकों का पालन अत्यंत आवश्यक है।

मुख्य वक्ता के रूप में दिल्ली विश्वविद्यालय के दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स की पूर्व निदेशक और वरिष्ठ अर्थशास्त्री प्रोफेसर पमी दुआ ने अकादमिक प्रकाशन की बदलती अपेक्षाओं और शोध संप्रेषण की सटीकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने शोध को एक व्यवस्थित प्रक्रिया बताते हुए ईमानदारी, निष्पक्षता, जवाबदेही और जिम्मेदारी जैसे मूल्यों को सर्वोपरि बताया।

 ‘प्रीडेटरी जर्नल्स’ और कम फंडिंग पर चिंता

रॉयल सोसाइटी ऑफ केमिस्ट्री के भारत एवं दक्षिण एशिया के प्रबंध निदेशक डॉ. वेंकटेश सर्वसिद्धि ने भारतीय शोध व्यवस्था की चुनौतियों को उजागर करते हुए ‘प्रीडेटरी जर्नल्स’ के बढ़ते चलन और सीमित वित्तपोषण पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने गुणवत्ता-आधारित और नवाचार-प्रधान शोध को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई।

देश-विदेश के विशेषज्ञ साझा कर रहे अनुभव

कार्यशाला में विभिन्न तकनीकी और अकादमिक सत्रों की श्रृंखला आयोजित की जा रही है, जिनमें प्रमुख विशेषज्ञों में शामिल हैं- प्रो. अर्पिता घोष (जादवपुर विश्वविद्यालय, कोलकाता), प्रो. सुरेंद्र कुमार (दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स), डॉ. अजीत कुमार वर्मा (वेस्टर्न नॉर्वे यूनिवर्सिटी ऑफ एप्लाइड साइंसेज, नॉर्वे), डॉ. सोनम मनसुखानी (पीपी सवानी विश्वविद्यालय, सूरत), डॉ. किशोर भानुशाली (कर्णावती विश्वविद्यालय, गांधीनगर), प्रो. नीता एच. शाह (गुजरात विश्वविद्यालय), डॉ. लौरा फिशर (रॉयल सोसाइटी ऑफ केमिस्ट्री, यूके) और डॉ. अपर्णा गांगुली (रॉयल सोसाइटी ऑफ केमिस्ट्री, भारत) ।

प्रतिष्ठित पैनल कर रहा सत्रों की अध्यक्षता, 159 प्रतिभागियों की सहभागिता

सत्रों की अध्यक्षता प्रोफेसर कमलजीत संधू, प्रोफेसर कमल श्रीवास्तव, प्रोफेसर संदीप पॉल, डॉ. सोना दीक्षित, डॉ. रोहित राजवंशी और डॉ. मंजू श्रीवास्तव द्वारा की जा रही है।

कार्यक्रम में कुल 159 प्रतिभागी हाइब्रिड मोड में शामिल हो रहे हैं। आयोजन का संचालन डॉ. आयुषी कुकरेजा, श्री पुष्पेंद्र कुमार, सुश्री रितिका अग्रवाल, सुश्री सुहाना पांडे, सुश्री निधि और सुश्री शिवानी उपमन्यु द्वारा किया जा रहा है। प्रोफेसर रूपाली सत्संगी ने धन्यवाद ज्ञापन के साथ उद्घाटन सत्र का समापन किया।

SP_Singh AURGURU Editor