बृज 84 कोस परिक्रमा मार्ग पर विकास की बड़ी तैयारी, मथुरा-अलीगढ़ के 137 किमी रूट के कायाकल्प की तैयारी

आगरा में मण्डलायुक्त नगेन्द्र प्रताप की अध्यक्षता में हुई बैठक में बृज चौरासी कोस परिक्रमा मार्ग को लेकर बड़ी तैयारी की गई। अधिक मास में संभावित 17 मई से 15 जून के बीच होने वाली परिक्रमा से पहले मथुरा और अलीगढ़ के 137 किमी PWD मार्ग को गड्ढामुक्त बनाने, पैच मरम्मत, पटरियों की सफाई और सुधार के निर्देश दिए गए। साथ ही प्रशासन ने इस मार्ग को स्थायी रूप से विकसित करने, चौड़ीकरण, जरूरत पड़ने पर भूमि अधिग्रहण, और पड़ाव स्थलों पर जनसुविधाएं विकसित करने के आदेश दिए हैं। यह पहल धार्मिक आस्था के साथ-साथ पर्यटन, स्थानीय अर्थव्यवस्था और क्षेत्रीय विकास को भी गति देगी।

Apr 9, 2026 - 19:47
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बृज 84 कोस परिक्रमा मार्ग पर विकास की बड़ी तैयारी, मथुरा-अलीगढ़ के 137 किमी रूट के कायाकल्प की तैयारी
बृज चौरासी कोस परिक्रमा मार्ग को मॉडल रूट बनाने के लिए लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों संग बैठक करते मंडलायुक्त नागेंद्र प्रताप।

बृज परिक्रमा मार्ग बनेगा मॉडल रूट, चौड़ीकरण, मरम्मत और जनसुविधाओं पर फोकस

आगरा। बृज चौरासी कोस परिक्रमा मार्ग को अब सिर्फ धार्मिक आस्था के रास्ते के रूप में नहीं, बल्कि क्षेत्रीय विकास, पर्यटन विस्तार और बुनियादी ढांचे के सुदृढ़ीकरण के बड़े प्रोजेक्ट के रूप में देखा जा रहा है। इसी दिशा में गुरुवार  को आयुक्त कार्यालय के लघु सभागार में मण्डलायुक्त नगेन्द्र प्रताप की अध्यक्षता में लोक निर्माण विभाग (PWD) के अधिकारियों के साथ महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई।

बैठक में आगामी अधिक मास में होने वाली बृज चौरासी कोस परिक्रमा की तैयारियों की समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि इस वर्ष यह परिक्रमा 17 मई से 15 जून 2026 के बीच आयोजित होने की संभावना है। यह परिक्रमा उत्तर प्रदेश, राजस्थान और हरियाणा के कई हिस्सों से होकर गुजरती है, जबकि मथुरा और अलीगढ़ से गुजरने वाला महत्वपूर्ण मार्ग लोक निर्माण विभाग के अधीन आता है।

आस्था के साथ विकास का रोडमैप तैयार

बैठक में स्पष्ट किया गया कि बृज चौरासी कोस बहिर्वेदी परिक्रमा मार्ग के अंतर्गत जनपद मथुरा में 112 किमी और जनपद अलीगढ़ में 25 किमी यानी कुल 137 किमी लंबा मार्ग लोक निर्माण विभाग के अधीन आता है। मण्डलायुक्त ने इस पूरे मार्ग को यात्री सुरक्षा, सुविधा और स्थायी विकास के नजरिए से प्राथमिकता पर लेने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि परिक्रमा मार्ग का संयुक्त सर्वे कराया जाए ताकि जहां-जहां सड़कें जर्जर हैं, वहां तत्काल सुधार की कार्ययोजना बनाई जा सके।

गड्ढामुक्त सड़कें, साफ पटरियां और सुरक्षित मार्ग पर जोर

मण्डलायुक्त ने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि अपने-अपने क्षेत्र में परिक्रमा मार्ग को पूरी तरह गड्ढामुक्त बनाया जाए। इसके तहत सड़क की पैच मरम्मत और अनुरक्षण,  मार्ग के किनारों की पटरियों की जंगल सफाई, कंधों/पटरियों का सुधार, क्षतिग्रस्त हिस्सों का त्वरित पुनर्निर्माण, यात्रियों के आवागमन को सुरक्षित बनाने के लिए मार्ग का समतलीकरण के कार्य प्राथमिकता पर पूरे किए जाएंगे। यह सिर्फ एक अस्थायी तैयारी नहीं, बल्कि प्रशासन इसे दीर्घकालिक इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार के रूप में आगे बढ़ाना चाहता है।

स्थायी समाधान की दिशा में बड़ा कदम

बैठक की सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि मण्डलायुक्त ने केवल परिक्रमा अवधि तक सीमित मरम्मत के बजाय बृज चौरासी कोस परिक्रमा मार्ग को स्थायी रूप से पूर्ण विकसित बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि मार्ग के चौड़ीकरण की संभावनाएं तलाशें। जहां आवश्यकता हो वहां भूमि अधिग्रहण का प्रस्ताव तैयार किया जाए। निर्माण कार्य की लागत का आकलन (आंगणक/एस्टीमेट) बनाया जाए।  भविष्य की जरूरतों को देखते हुए इसे दीर्घकालिक धार्मिक-पर्यटन कॉरिडोर के रूप में विकसित किया जाए। इस फैसले को बृज क्षेत्र के लिए बड़ी विकासात्मक पहल माना जा रहा है।

पड़ाव स्थलों पर भी मिलेंगी बेहतर जनसुविधाएं

परिक्रमा मार्ग में आने वाले पड़ाव स्थलों को भी विकास योजना में शामिल करने के निर्देश दिए गए। मण्डलायुक्त ने कहा कि सिर्फ सड़कें बनाना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि श्रद्धालुओं को मूलभूत सुविधाएं भी मिलनी चाहिए। इसलिए पेयजल व्यवस्था, शौचालय, विश्राम स्थल, प्रकाश व्यवस्था, साफ-सफाई और कचरा प्रबंधन, प्राथमिक चिकित्सा/स्वास्थ्य सहायता, सुरक्षा एवं यातायात प्रबंधन से जुड़ी व्यवस्थाएं को भी प्रस्तावित विकास कार्यों में शामिल किया जाएगा। इससे परिक्रमा मार्ग पर आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को राहत मिलेगी और धार्मिक पर्यटन को भी मजबूती मिलेगी। धार्मिक आस्था से आगे पर्यटन और अर्थव्यवस्था को भी लाभ मिलेगा। 

मंडलायुक्त ने कहा कि बृज चौरासी कोस परिक्रमा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि यह स्थानीय अर्थव्यवस्था, ग्रामीण संपर्क, पर्यटन गतिविधियों और छोटे कारोबारों के लिए भी बड़ा अवसर है। सड़क और सुविधाओं के बेहतर होने से परिक्रमा में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ सकती है। स्थानीय दुकानदारों, होटल, ढाबों और परिवहन सेवाओं को लाभ मिलेगा। ग्रामीण क्षेत्रों का संपर्क बेहतर होगा। धार्मिक पर्यटन का नया मॉडल विकसित हो सकता है। बृज क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को और मजबूती मिलेगी। यानी यह पहल सिर्फ श्रद्धालुओं के लिए नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के सामाजिक और आर्थिक विकास से जुड़ी हुई है।

आस्था के मार्ग पर विकास की रफ्तार

बैठक से साफ संकेत मिला है कि इस बार प्रशासन बृज चौरासी कोस परिक्रमा मार्ग को केवल रस्म अदायगी के तौर पर नहीं, बल्कि मॉडल धार्मिक मार्ग के रूप में विकसित करने की तैयारी में है। यदि समयबद्ध तरीके से सर्वे, मरम्मत, चौड़ीकरण और जनसुविधाओं का काम पूरा होता है, तो यह परियोजना बृज क्षेत्र के लिए आस्था, पर्यटन और विकास तीनों के संगम की मिसाल बन सकती है।