मालेगांव ब्लास्ट केस: कोर्ट ने कहा- फॊरेंसिक सबूतों में मिलावट थी, एटीएस-एनआईए जांच में भारी अंतर

मुंबई। मालेगांव बम धमाका केस में विशेष एनआईए अदालत ने बुधवार को बड़ा फैसला सुनाते हुए सभी सात आरोपियों को बरी कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने में पूरी तरह असफल रहा और मामले में जो साक्ष्य पेश किए गए वे या तो अपूर्ण थे या संदिग्ध।

Jul 31, 2025 - 12:57
 0
मालेगांव ब्लास्ट केस: कोर्ट ने कहा- फॊरेंसिक सबूतों में मिलावट थी, एटीएस-एनआईए जांच में भारी अंतर

-जज ने कहा- यह साबित नहीं हुआ कि विस्फोट में इस्तेमाल की गई मोटरसाइकिल साध्वी प्रज्ञा सिंह की थी

-यह भी साबित नहीं कि कर्नल पुरोहित कश्मीर से आरडीएक्स लाए, यह भी साबित नहीं कि बम कहां प्लांट किया 

जज ने अपने फैसले में कहा कि आरोपियों के खिलाफ कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया गया। सबसे अहम यह कि बम कहां प्लांट किया गया, यह साबित नहीं हो पाया। कश्मीर से आरडीएक्स लाया गया या लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित आरडीएक्स लेकर आए, इस संबंध में भी कोई सबूत नहीं दिए गए।

कोर्ट ने कहा कि फॉरेंसिक सबूतों में मिलावट थी, पंचनामा सही तरीके से नहीं किया गया और घटनास्थल से कोई फिंगरप्रिंट तक नहीं लिया गया। गोली के शेल मिलने के कोई पुख्ता प्रमाण नहीं मिले। जज ने टिप्पणी की कि कई मिलावटी सबूत फॉरेंसिक जांच के लिए भेजे गए, जिससे जांच की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा हो गया।

साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर की मोटरसाइकिल विस्फोट में इस्तेमाल हुई, इसे लेकर भी कोई पुख्ता प्रमाण सामने नहीं आया। कोर्ट ने साफ किया कि बाइक किसने खड़ी की, इसका भी कोई सबूत नहीं मिला।

यूएपीए (गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम) के तहत लगाए गए आरोप भी कोर्ट द्वारा खारिज कर दिए गए। जज ने कहा कि इस मामले में यूएपीए लागू नहीं होगा, क्योंकि आतंकी मंशा या कृत्य को साबित करने लायक कोई साक्ष्य नहीं मिला। साथ ही यह भी कहा गया कि एटीएस और एनआईए की जांच में भारी अंतर था, जिससे भ्रम और विरोधाभास उत्पन्न हुए।

कोर्ट ने फैसले में कहा कि कर्नल पुरोहित के आवास पर विस्फोटक होने के सबूत नहीं पाए गए। यह भी साबित नहीं हो पाया कि उन्होंने बम तैयार किया या किसी को इसकी आपूर्ति की। अभिनव भारत संगठन को लेकर कोर्ट ने कहा कि उसका नाम केवल सामान्य संदर्भ में आया है, और उसके फंड का उपयोग आतंकी गतिविधियों में किया गया, यह साबित नहीं हुआ।

जज ने कहा कि लेफ्टिनेंट कर्नल पुरोहित और अजय रहिरकर के खातों में पैसों के लेन-देन के सबूत जरूर मिले, लेकिन कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ये पैसे कंस्ट्रक्शन जैसे वैध कार्यों के लिए उपयोग किए गए, न कि किसी आतंकी साजिश में।

फैसले में यह भी कहा गया कि प्रसाद पुरोहित के खिलाफ कोई भी प्रमाण ऐसा नहीं था, जिससे उन्हें इस विस्फोट से जोड़ा जा सके।

इस प्रकार कोर्ट ने पाया कि जांच में गंभीर खामियां, साक्ष्यों की कमी, और तकनीकी त्रुटियां होने के कारण सभी आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए निर्दोष घोषित किया गया।

SP_Singh AURGURU Editor