उर्स-ए-रज़वी में गूंजा शिक्षा और सामाजिक सुधार का संदेश: वक्ताओं ने कहा—'नशे से दूर रहें, बेटियों को दें बेहतर शिक्षा, सुन्नी समाज रहे एकजुट'

-आरके सिंह- बरेली। उर्स-ए-रज़वी के दूसरे दिन शुक्रवार को आयोजित 'तहफ्फुज मजहब-ओ-मसलक कॉन्फ्रेंस' में शिक्षा, सामाजिक सुधार, नशामुक्ति और सुन्नी समुदाय की एकता प्रमुख विषय रहे। देशभर से आए इस्लामी विद्वानों ने मुस्लिम समाज से आधुनिक और उच्च शिक्षा को अपनाने, बेटियों की शिक्षा को प्राथमिकता देने, युवाओं को नशे से दूर रखने तथा समाज में आपसी भाईचारा और एकजुटता बनाए रखने का आह्वान किया। सम्मेलन में वक्ताओं ने धार्मिक और सामाजिक मुद्दों के साथ समसामयिक अंतरराष्ट्रीय घटनाओं पर भी अपने विचार व्यक्त किए।

Aug 7, 2026 - 21:03
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उर्स-ए-रज़वी में गूंजा शिक्षा और सामाजिक सुधार का संदेश: वक्ताओं ने कहा—'नशे से दूर रहें, बेटियों को दें बेहतर शिक्षा, सुन्नी समाज रहे एकजुट'
बरेली में चल रहे उर्स-ए-रजवी की एक झलक।

सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुफ्ती सलीम नूरी बरेलवी ने हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच हुए संघर्ष को राजनीतिक घटनाक्रम बताते हुए कहा कि इसे धार्मिक युद्ध के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मुस्लिम समाज को भावनात्मक बहसों से अधिक शिक्षा, सामाजिक विकास और आत्मनिर्भरता पर ध्यान देना चाहिए।

उन्होंने कहा कि प्रत्येक क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण शिक्षण संस्थानों की स्थापना समय की आवश्यकता है, ताकि नई पीढ़ी आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ नैतिक मूल्यों से भी जुड़ सके। उन्होंने युवाओं से नशे से दूर रहने की अपील करते हुए कहा कि नशा परिवार और समाज दोनों को कमजोर करता है। साथ ही उन्होंने कहा कि किसी भी विवाद का समाधान कानून और न्यायिक व्यवस्था के माध्यम से ही किया जाना चाहिए।

कार्यक्रम का संचालन कर रहे कारी यूसुफ रज़ा संभली ने मुस्लिम परिवारों से विशेष रूप से बेटियों की शिक्षा और संस्कार पर ध्यान देने की अपील की। उन्होंने कहा कि बच्चों को धार्मिक शिक्षा के साथ नैतिक मूल्यों और आधुनिक ज्ञान से भी जोड़ना आवश्यक है, ताकि वे समाज और देश के लिए उपयोगी नागरिक बन सकें।

कारी अब्दुर्रहमान कादरी ने अपने संबोधन में कहा कि मसलक-ए-आला हज़रत का मूल संदेश सुन्नी समुदाय में आपसी एकता, भाईचारा और धार्मिक मूल्यों के प्रचार-प्रसार का है। उन्होंने कहा कि बुजुर्गों ने इसी विचारधारा को देश और विदेश तक पहुंचाने का कार्य किया और आज भी उसी मिशन को आगे बढ़ाने की आवश्यकता है।

सम्मेलन को मौलाना साबिर-उल-कादरी (बिहार), मौलाना अव्वल रज़ा महकश, मुफ्ती नवाजिश आलम, मौलाना जैनुल आबेदीन सहित अन्य इस्लामी विद्वानों ने भी संबोधित किया। सभी वक्ताओं ने समाज में शिक्षा, नैतिकता, सामाजिक सद्भाव और धार्मिक मूल्यों को मजबूत करने पर बल दिया।

इससे पूर्व सुबह कुरानख्वानी के साथ इस्लामिया मैदान में मुख्य कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। सुबह 9:58 बजे कुल शरीफ की रस्म अदा की गई, जिसमें देश की तरक्की, अमन-चैन और समाज की खुशहाली के लिए विशेष दुआ की गई।

दोपहर में इस्लामिया मैदान में जुमे की नमाज अदा की गई, जिसमें बड़ी संख्या में अकीदतमंद शामिल हुए। नमाज के बाद दरगाह परिसर और आसपास के क्षेत्रों में धार्मिक माहौल बना रहा।

दिनभर बरेली और आसपास के विभिन्न क्षेत्रों से चादरों के जुलूस दरगाह पहुंचे। अकीदतमंदों ने दरगाह पर चादर पेश कर देश में शांति, भाईचारे और समृद्धि की दुआ मांगी। उर्स में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के मद्देनजर प्रशासन द्वारा सुरक्षा और यातायात की विशेष व्यवस्थाएं भी की गईं।

SP_Singh AURGURU Editor