उर्स-ए-आला हज़रत में 'मुस्लिम एजेंडा-2027' जारी, ज्ञानवापी से वक्फ तक कई मुद्दों पर रखी स्पष्ट राय
-आरके सिंह- बरेली। 108वें उर्स-ए-आला हज़रत के अवसर पर ऑल इंडिया मुस्लिम जमात की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की विशेष बैठक संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रज़वी बरेलवी की अध्यक्षता में आयोजित हुई, जिसमें विभिन्न राज्यों से आए उलेमा और इस्लामी विद्वानों ने भाग लिया। बैठक के बाद संगठन ने वर्ष 2027 के लिए 'मुस्लिम एजेंडा-2027' जारी किया।
संगठन ने मांग की कि पैगंबर-ए-इस्लाम के कथित अपमान की घटनाओं को रोकने के लिए प्रभावी कानून बनाया जाए। साथ ही कहा कि वर्ष 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों से इस संबंध में विधानसभा में कानून का समर्थन करने का सार्वजनिक वादा लेने की अपील की जाएगी। संगठन के अनुसार मुस्लिम समाज इस मुद्दे को चुनावी विमर्श में प्रमुखता से उठाएगा।
बैठक में ज्ञानवापी मस्जिद (वाराणसी), शाही ईदगाह (मथुरा) और जामा मस्जिद (संभल) से जुड़े मामलों का भी उल्लेख किया गया। संगठन ने कहा कि मुस्लिम पक्ष इन मस्जिदों से जुड़े अपने दावों पर कायम रहेगा। साथ ही हिंदू पक्ष से इन मामलों में दायर मुकदमे वापस लेने की अपील भी की गई।
ऑल इंडिया मुस्लिम जमात ने केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार से वक्फ बोर्ड की संपत्तियों में कथित अनियमितताओं और घोटालों की जांच कराने की मांग की। संगठन का कहना था कि वक्फ संपत्तियों से होने वाली आय का उपयोग गरीब मुसलमानों के कल्याण के लिए किया जाना चाहिए।
अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर संगठन ने ईरान के खिलाफ अमेरिका और इज़राइल की कार्रवाई की निंदा की तथा मुस्लिम देशों से आपसी सहयोग और एकजुटता बढ़ाने का आह्वान किया। मस्जिद-ए-अक्सा की सुरक्षा के लिए संयुक्त प्रयासों की भी आवश्यकता जताई गई।
बैठक में मुस्लिम समाज से शिक्षा, व्यापार और बच्चों की बेहतर परवरिश पर विशेष ध्यान देने, दहेज और शादी-ब्याह में फिजूलखर्ची से बचने तथा युवाओं को नशा, जुआ और अन्य सामाजिक बुराइयों से दूर रखने की अपील की गई। साथ ही राज्य सरकारों से शरीयत में हस्तक्षेप नहीं करने, बुलडोजर कार्रवाई बंद करने तथा मुस्लिम समुदाय में सुरक्षा की भावना मजबूत करने वाली परिस्थितियां बनाने का आग्रह किया गया।
बैठक में मौलाना फूल मुहम्मद, मुफ्ती ताहिर हुसैन, मौलाना अबुल कलाम, मौलाना रिजवानुल हक, कारी सगीर अहमद, मुफ्ती फारुख आलम, डॉ. सैयद अशरफ कादरी, हाफिज नूर अहमद अजहरी, मौलाना इरशाद सकाफी, मौलाना हसन रजा, मौलाना इंकलाब नूरी, मौलाना बसारत अली, मुफ्ती फारुख मिस्बाही, मौलाना मुजाहिद हुसैन, राहत हुसैन हाशमी, नसीर अहमद नूरी, ताहिर हुसैन एडवोकेट और हाजी नाजिम बैग सहित विभिन्न राज्यों से आए उलेमा एवं पदाधिकारी मौजूद रहे।