अब गाय नहीं, कसाई कांपता है-डेयरी कॉन्क्लेव में दुग्ध मंत्री धर्मपाल का बड़ा ऐलान
आगरा में गुरुवार को आयोजित “डेयरी कॉन्क्लेव/स्वर्णिम दुग्धामृत संवाद समागम” में प्रदेश के पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह ने डेयरी सेक्टर, गोवंश संरक्षण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने पर जोर दिया। आरबीएस कॉलेज सभागार में आयोजित कार्यक्रम में किसानों, दुग्ध उत्पादकों और निवेशकों ने हिस्सा लिया। मंत्री ने कहा कि गोबर गैस और जैविक खाद भविष्य की जरूरत हैं। सरकार की विभिन्न योजनाओं के तहत पशुपालकों को लाखों रुपये तक अनुदान और सब्सिडी दी जा रही है। कार्यक्रम में पराग डेयरी प्लांट जल्द शुरू करने की घोषणा भी हुई।
आगरा में ‘स्वर्णिम दुग्धामृत संवाद समागम’: डेयरी सेक्टर में निवेश, गोवंश संरक्षण और ग्रामीण विकास पर मंथन
आगरा। आगरा में गुरुवार को डेयरी क्षेत्र को नई दिशा देने के उद्देश्य से “डेयरी कॉन्क्लेव/स्वर्णिम दुग्धामृत संवाद समागम” का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रदेश के पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह रहे। उन्होंने आगरा के पराग डेयरी प्लांट को जल्द शुरू करने की घोषणा की। कॉन्क्लेव का आयोजन आरबीएस कॉलेज के सभागार में हुआ, जहां आगरा और अलीगढ़ मंडल के किसानों, गोपालकों, दुग्ध उत्पादकों, डेयरी उद्यमियों और निवेशकों की बड़ी भागीदारी देखने को मिली।
कार्यक्रम का उद्देश्य उन्नत और स्वस्थ गोवंश को बढ़ावा देना, डेयरी सेक्टर में निवेश आकर्षित करना तथा उत्तर प्रदेश को वन ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में गति प्रदान करना रहा।
दुनिया आर्थिक संकट में, भारत मजबूती से खड़ा
मंत्री धर्मपाल सिंह ने अपने संबोधन में वैश्विक आर्थिक हालात का जिक्र करते हुए कहा कि दुनिया युद्ध और आर्थिक संकट के दौर से गुजर रही है, लेकिन भारत पर उसका प्रभाव नहीं पड़ने दिया गया। उन्होंने कहा कि हॉर्मूज क्षेत्र में संकट के बावजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एलपीजी आपूर्ति बाधित नहीं होने दी गई। उन्होंने कहा कि आज रसोई गैस और अमोनिया गैस का संबंध सीधे आम आदमी के जीवन से जुड़ा है, लेकिन भविष्य में इसका स्थायी समाधान गौशालाएं और गोबर गैस ही बनेंगी। उन्होंने किसानों से गोबर से बनी जैविक खाद अपनाने और प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ने की अपील की।
मंत्री ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि पहले गाय माता कसाइयों से डरती थी, लेकिन आज योगी सरकार में हालात बदल चुके हैं। उन्होंने कहा कि पशुपालन में किसानों की घटती रुचि के कारण बाजार में नकली दूध, घी, पनीर और मावा जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं। ऐसे में हर परिवार को कम से कम एक गाय जरूर पालनी चाहिए। उन्होंने बताया कि प्रदेश की गौशालाओं को अब खाद उत्पादन, वर्मी कंपोस्ट और गोबर गैस निर्माण से जोड़ा जा रहा है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
डेयरी और पशुपालन के लिए सरकार की बड़ी योजनाएं
कार्यक्रम में मंत्री ने पशुपालकों और डेयरी उद्यमियों के लिए चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं की जानकारी भी दी। उन्होंने बताया कि नंदनी कृषक समृद्धि योजना में 31.50 लाख रुपये तक अनुदान, मिनी नंदनी योजना में 11.80 लाख रुपये तक सहायता, मुख्यमंत्री स्वदेशी गौ संवर्धन योजना में 80 हजार रुपये की सहायता, 200 गायों की यूनिट पर 4 करोड़ रुपये तक ऋण, जिसमें 2 करोड़ रुपये तक सब्सिडी, दो गायों की यूनिट पर 40 हजार रुपये तक अनुदान का प्रावधान किया गया है।
एक घंटे में घर पहुंचेगी पशु चिकित्सा टीम
मंत्री ने बताया कि पशुओं के इलाज के लिए प्रदेश में 520 मोबाइल वेटरनरी वैन संचालित की जा रही हैं। टोल फ्री नंबर 1962 पर कॉल करने के एक घंटे के भीतर पशु चिकित्सा टीम घर पहुंचकर इलाज करती है। उन्होंने कहा कि दुग्ध समितियों के भुगतान को और तेज करने की दिशा में काम चल रहा है। वर्तमान में मासिक भुगतान हो रहा है, जिसे जल्द साप्ताहिक करने की योजना बनाई जा रही है।
यूपी बना देश का नंबर-1 दुग्ध उत्पादक राज्य
कार्यक्रम में दुग्ध आयुक्त धन लक्ष्मी के. ने बताया कि उत्तर प्रदेश देश के कुल दुग्ध उत्पादन में 16 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ पहले स्थान पर है। उन्होंने कहा कि राज्य को अब तक करीब 5 हजार करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिनमें आगरा और अलीगढ़ मंडल की 18 प्रतिशत भागीदारी है। लक्ष्य दुग्ध उत्पादन, प्रोसेसिंग क्षमता और किसानों की आय को और बढ़ाना है।
पराग डेयरी प्लांट जल्द होगा शुरू
कॉन्क्लेव में आगरा के पराग डेयरी प्लांट को जल्द शुरू करने की घोषणा भी की गई। कार्यक्रम के विभिन्न सत्रों में नंद बाबा दुग्ध मिशन, दुग्ध नीति-2022 और दुग्धशाला विकास विभाग की योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी गई। उत्कृष्ट कार्य करने वाले पशुपालकों और डेयरी उद्यमियों को सम्मानित किया गया। निजी कंपनियों ने अपने स्टॉल लगाकर आधुनिक डेयरी तकनीकों, दुग्ध उत्पादों और नई मशीनों का प्रदर्शन किया। वहीं विशेषज्ञों ने स्वदेशी नस्ल सुधार, आधुनिक डेयरी प्रबंधन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर विचार साझा किए।