पीएम के दिमागी नक्सली बयान पर विपक्ष का हमला, हताशा का संकेत, आत्मविश्वास की कमी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस भाषण में दिमागी नक्सल टिप्पणी को लेकर विपक्ष ने तीखी प्रतिक्रिया दी। कांग्रेस के जयराम रमेश, पवन खेड़ा, अरविंद केजरीवाल और वाम नेताओं ने इसे असहमति की आवाज दबाने और राजनीतिक हताशा का संकेत बताया।
नई दिल्ली। विपक्ष ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की दिमागी नक्सल वाली टिप्पणी को लेकर उन पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि वह असहमति को निशाना बनाने के लिए ऐसे विशेषणों का इस्तेमाल कर रहे हैं। विपक्ष ने कहा यह उनकी हताशा का स्पष्ट संकेत भी है। विपक्षी नेताओं ने महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करने संबंधी प्रधानमंत्री की अपील पर भी सवाल उठाए और इसे परिसीमन से जोड़ने पर आपत्ति जताई।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि प्रधानमंत्री ने पहले अपने विरोधियों को ‘शहरी नक्सल’ कहा और अब उन्हें ‘दिमागी नक्सल’ कह रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह उनकी हताशा का स्पष्ट संकेत है।
कांग्रेस नेता ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा, 'यह उनकी हताशा का पक्का संकेत है। यह अलग बात है कि आखिर में वे वही करते हैं जिनकी मांग या वकालत ये तथाकथित 'अर्बन नक्सल' या अब 'दिमागी नक्सल' करते हैं। ऐसे ही नहीं कहा जाता कि PM के पास 'एंटायर पॉलिटिकल साइंस' में 'मास्टर एब्यूजर' (गालियां देने में माहिर) की डिग्री है।'
दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी पीएम मोदी का वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट किया। इस वीडियो के जरिए उन्होंने पीएम मोदी पर निशाना साधा। केजरीवाल ने कैप्शन में लिखा- 'आत्मविश्वास की कमी, घबराया हुआ और डगमगाता हुआ प्रधानमंत्री।'
माकपा महासचिव एम ए बेबी ने कहा कि उनकी पार्टी नक्सलवाद का विरोध करती है, लेकिन सरकार पर माओवादियों से निपटने में कानून और संविधान का उल्लंघन करने के भी खिलाफ है। उन्होंने प्रधानमंत्री द्वारा ‘दिमागी नक्सल’ लोगों का जिक्र किए जाने को विपक्ष को निशाना बनाने की कोशिश बताया।
बेबी ने कहा, 'नक्सलवाद एक राजनीतिक दृष्टिकोण और विचारधारा है, जिससे हम सभी पूरी तरह असहमत हैं। हम माओवादियों या नक्सलियों के तौर-तरीकों का समर्थन नहीं करते। वे हथियार उठाते हैं और सामान्य लोकतांत्रिक राजनीतिक गतिविधियों में हिस्सा नहीं लेते।'
उन्होंने कहा, 'लेकिन अब उनका विमर्श यह है कि शहरी नक्सल हैं और अब वह ‘नक्सली मानसिकता वाले लोगों’ की बात कर रहे हैं... वे हमेशा विपक्ष के लोगों को राष्ट्र-विरोधी बताना चाहते हैं और उन्हें पाकिस्तान जाने के लिए कहते हैं। यह कहना कि उनके दिमाग में माओवादी विचार हैं, एक सुविधाजनक आरोप है। यह बेहद आपत्तिजनक आरोप है।'
माकपा नेता डी राजा ने भी प्रधानमंत्री पर स्वतंत्रता दिवस जैसे महत्वपूर्ण अवसर पर असहमति जताने वालों को निशाना बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने दिमागी नक्सल शब्द को सरकार से सवाल करने वालों को कलंकित करने का एक और प्रयास बताया।
भाकपा के राज्यसभा सदस्य पी संदोष कुमार ने कहा कि जब सभी दल महिला आरक्षण विधेयक का समर्थन कर रहे हैं, तो सरकार के पास इसे लागू करने में देरी का कोई औचित्य नहीं है। कुमार ने कहा, 'सभी दल विधेयक का समर्थन कर रहे हैं, तो प्रधानमंत्री और उनके सहयोगियों को महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करने से कौन रोक रहा है? जवाब बहुत सरल है। हमारा रुख स्पष्ट है कि 543 लोकसभा सीटों में से 181 सीट बिना किसी देरी के महिलाओं के लिए आरक्षित की जानी चाहिए।'
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने जानबूझकर महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़ दिया है और कहा कि परिसीमन की प्रतीक्षा किए बिना इसे लागू किया जाना चाहिए।
तृणमूल कांग्रेस के नेता और पूर्व राज्यसभा सदस्य साकेत गोखले ने भी मोदी की टिप्पणी की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने स्वतंत्रता दिवस के मंच का इस्तेमाल अपने आलोचकों को निशाना बनाने के लिए किया।
गोखले ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘शर्म की बात है कि मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर का इस्तेमाल अपने विरोधियों को ‘दिमागी नक्सल’ कहकर सस्ता तंज कसने के लिए किया।’’
प्रधानमंत्री मोदी ने शनिवार को लालकिले की प्राचीर से कहा कि जंगलों में ‘हथियारी नक्सल’ को खत्म करने में सफलता मिली है, लेकिन अब ‘दिमागी नक्सल’ से सावधान रहना होगा तथा उनकी पहचान कर उन्हें अलग-थलग करना होगा।