एफसीआरए बिल पर विपक्ष बंटा, उद्धव की पार्टी के बाद अब सुप्रिया सुले ने पकड़ी अलग राह,  टीएमसी, डीएमके, बीजद का कड़ा रुख

एफसीआरए संशोधन बिल को लेकर संसद में सियासी पारा चढ़ता दिख रहा है। ऐसी उम्मीद है कि सरकार 12 अगस्त को ये बिल लाने की तैयारी कर रही। इससे पहले विपक्ष बंटता दिख रहा। ऐसा इसलिए क्योंकि पहले शिवसेना यूबीटी अलग राह पकड़ती दिख रही। इस बीच सुप्रिया सुले ने भी जेपीसी में बिल भेजने की बात कही है।

Aug 11, 2026 - 18:32
Aug 11, 2026 - 18:48
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एफसीआरए बिल पर विपक्ष बंटा, उद्धव की पार्टी के बाद अब सुप्रिया सुले ने पकड़ी अलग राह,  टीएमसी, डीएमके, बीजद का कड़ा रुख

नई दिल्ली। 'विदेशी योगदान (विनियमन) संशोधन विधेयक 2026' यानी एफसीआरए संशोधन बिल 2026 पर विपक्ष के भीतर ही घमासान देखने को मिल रहा है। एक ओर जहां कांग्रेस की एक ही मांग है कि इस विधेयक को पूरी तरह वापस लिया जाए। पार्टी लगातार इसे वापस लेने की मांग उठा रही है। दूसरी ओर, उद्धव ठाकरे की पार्टी शिवसेना यूबीटी ने कांग्रेस से अलग राह लेते हुए बिल पर पॉजिटिव अप्रोच दिखाया है। सुप्रिया सुले की पार्टी एनसीपी शरद पवार गुट ने भी कहा है कि इस बिल को जेपीसी में भेजा जाए। कुछ ऐसा ही रिएक्शन टीएमसी, डीएमके और बीजेडी ने भी दिया है। इन दलों ने भी जेपीसी के रास्ते सहमति या शर्तों पर समर्थन के संकेत दिए हैं।

एफसीआरए बिल पर चर्चा को लेकर एनसीपी शरद पवार गुट की कार्यकारी अध्यक्ष सुप्रिया सुले ने कहा कि विदेशी फंडिंग को हमेशा संदेह की दृष्टि से नहीं देखा जा सकता। उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि या तो इसे वापस ले लिया जाए या फिर जेपीसी को भेजा जाए। उन्होंने ये भी कहा कि उनकी पार्टी एफसीआरए बिल के मौजूदा स्वरूप का विरोध करती है। इस बीच, लोकसभा में NCP(SP) के आठ सांसदों के एक प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की।

एफसीआरए संशोधन बिल पर शिवसेना (यू) के प्रवक्ता आनंद दुबे ने भी सरकार को राहत भरा रिएक्शन दिया है। उन्होंने कहा कि एफसीआरए एक्ट नया नहीं है। इसे इंदिरा गांधी 1976 में लाई थीं और तब से इसमें संशोधन होते रहे हैं। सरकार जो संशोधन बिल ला रही है- जिसके बारे में हमने सुना है, क्योंकि हमें अभी तक कोई ड्राफ्ट नहीं मिला है। अगर वह देश के हित में है, अगर किसी का ट्रस्ट या एनजीओ है और उन्हें विदेश से पैसा मिलता है, तो सरकार को उसका सोर्स जानने का हक है, चाहे कोई भी सरकार हो। हम चाहते हैं कि सरकार हमें एक बार ड्राफ्ट दिखाए, उस पर चर्चा हो। अगर सब ठीक रहा तो हम उसका समर्थन कर सकते हैं।

हालांकि, शिवसेना यूबीटी के नेता आगे ये भी कहा कि अगर बिल को लेकर कुछ छिपाया जाता है, विपक्ष को भरोसे में नहीं लिया जाता है और सिर्फ बहुमत के आधार पर बिल लाया जाता है, तो यह कहीं न कहीं तानाशाही है। यही विवाद की वजह है। हम बस बिल के बारे में जानना चाहते हैं। हम हर चीज का विरोध नहीं करते। उधर, एफसीआरए संशोधन बिल पर टीएमसी, डीएमके और बीजेडी ने भी कांग्रेस से अलग रुख अपनाया है। इन दलों ने भी जेपीसी के रास्ते चर्चा, सहमति या शर्तों पर समर्थन के संकेत दिए हैं।

सूत्रों के मुताबिक, केंद्र सरकार 12 अगस्त को संसद में एफसीआरए संशोधन बिल को लाने की तैयारी कर रही है। हालांकि, सोमवार को मानसून सत्र के बचे हुए तीन दिनों के लिए लोकसभा के एजेंडे पर सरकार और अलग-अलग पार्टियों के बीच हुई बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बातचीत में 'फॉरेन कंट्रीब्यूशन (रेगुलेशन) अमेंडमेंट बिल' पर चर्चा नहीं हुई। इससे इस बात को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है कि क्या सत्ताधारी गठबंधन इस विवादित कानून को पास कराने की कोशिश करेगा या नहीं।

कहा जा रहा कि सरकार ने कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्ष से संपर्क करके एफसीआरए बिल को जांच के लिए संसद की संयुक्त समिति (जॉइंट कमेटी) के पास भेजने पर उनकी राय मांगी है। सूत्रों ने बताया कि लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने सरकार के प्रस्ताव के बारे में कांग्रेस सांसद के.सी. वेणुगोपाल से बात की, लेकिन उन्होंने इसके बजाय कानून को पूरी तरह वापस लेने की मांग की। 'फॉरेन कंट्रीब्यूशन (रेगुलेशन) अमेंडमेंट बिल' लोकसभा के पिछले सत्र में 25 मार्च को पेश किया गया था, लेकिन विपक्षी दलों और अल्पसंख्यक समूहों, खासकर ईसाई संगठनों के कड़े विरोध के कारण इस पर अभी तक चर्चा नहीं हो पाई।

इस बीच तमिलनाडु विधानसभा ने मंगलवार को ‘विदेशी अंशदान (विनियमन) (एफसीआरए) संशोधन विधेयक, 2026’ के मौजूदा स्वरूप का विरोध करते हुए एक प्रस्ताव पारित किया। प्रस्ताव में केंद्र से इस विधेयक को वापस लेने का आग्रह करते हुए कहा गया है कि इस संशोधन से परमार्थ संगठनों की स्वायत्तता विशेष रूप से अल्पसंख्यकों द्वारा चलाए जा रहे शैक्षणिक और समाज कल्याण संस्थानों के कामकाज पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। प्रस्ताव पर चर्चा के बाद इसे ध्वनि मत से पारित कर दिया गया। इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष जे.सी.डी. प्रभाकर ने घोषणा की कि स्कूल शिक्षा मंत्री ए. राजमोहन द्वारा पेश किया गया प्रस्ताव पारित हो गया है।