पीलीभीत में गोमती उद्गम स्थल पर पर्यटन विकास की रफ्तार तेज, बनेगी टेंट सिटी; जल व्यवस्था होगी सुदृढ़
आरके सिंह- बरेली/पीलीभीत। पीलीभीत जिले के माधोटांडा स्थित गोमती नदी के उद्गम स्थल को धार्मिक, प्राकृतिक और पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने की दिशा में कार्य तेज हो गया है। उद्गम स्थल को यमुनोत्री और गंगोत्री की तर्ज पर विकसित करने की योजना है, जहां पर्यटकों को प्रकृति के साथ धार्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन का अनुभव मिल सके। पर्यटकों के ठहरने के लिए उद्गम स्थल के समीप टेंट सिटी विकसित करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है, जबकि इसके लिए सिंचाई विभाग की करीब 15 एकड़ भूमि पर्यटन विभाग को हस्तांतरित की जा चुकी है। उद्गम स्थल पर सालभर पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े कार्यों को लेकर भी सिंचाई विभाग के साथ समन्वय किया जा रहा है।
पर्यटन उप निदेशक रवीश कुमार ने बताया कि गोमती उद्गम स्थल को यमुनोत्री, गंगोत्री और बद्रीनाथ के निकट भारत के पहले गांव माणा में सरस्वती के उद्गम स्थल की तरह धार्मिक और प्राकृतिक रूप से समृद्ध तथा रमणीक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की योजना है। इसके लिए उद्गम स्थल पर पर्यटकों के ठहरने की सुविधाओं के साथ आवश्यक आधारभूत ढांचा तैयार किया जाएगा।
15 एकड़ जमीन पर टेंट सिटी की तैयारी
गोमती उद्गम स्थल के समीप टेंट सिटी विकसित करने के लिए सिंचाई विभाग की करीब 15 एकड़ भूमि पर्यटन विभाग को हस्तांतरित की जा चुकी है। पर्यटन विभाग ने टेंट सिटी के संचालन के लिए आवश्यक जल व्यवस्था को मजबूत करने के संबंध में सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता को पत्र भी भेजा है। विभाग का कहना है कि टेंट सिटी का निर्माण कार्य इसी वर्ष धरातल पर दिखाई देने लगेगा।
टेंट सिटी के साथ उद्गम स्थल पर पर्यटकों के ठहरने के लिए गेस्ट हाउस बनाने का प्रस्ताव भी तैयार किया गया है। इससे यहां आने वाले पर्यटकों को रुकने की बेहतर सुविधा उपलब्ध हो सकेगी और क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को विस्तार मिलेगा।
56.88 करोड़ की डीपीआर को मंजूरी
गोमती उद्गम स्थल के समग्र विकास के लिए केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय से 56.88 करोड़ रुपये की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने की मंजूरी पहले ही मिल चुकी है। डीपीआर तैयार करने की जिम्मेदारी डब्ल्यूएपीसीओएस लिमिटेड, नई दिल्ली को सौंपी गई है।
प्रस्तावित विकास योजना में उद्गम स्थल के घाटों का विकास, रास्तों का निर्माण, सांस्कृतिक परिसर, पर्यटक सुविधाएं, हरित क्षेत्र, पौधरोपण और पर्यावरण संरक्षण सहित कई कार्य शामिल किए गए हैं। योजना का उद्देश्य गोमती उद्गम स्थल को व्यवस्थित सुविधाओं से युक्त प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करना है।
पर्यटन के साथ स्थानीय रोजगार पर जोर
परियोजना के तहत पर्यटकों के लिए सुविधा केंद्र और अन्य आधारभूत सुविधाएं विकसित करने के साथ स्थानीय हस्तशिल्प, आजीविका और पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया जाएगा। इससे क्षेत्र में पर्यटन बढ़ने के साथ स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद है।
गोमती उद्गम स्थल की प्राकृतिक और धार्मिक महत्ता को देखते हुए यहां आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा। घाटों और मार्गों के विकास के साथ हरित क्षेत्र और पौधरोपण पर भी ध्यान दिया जाएगा, ताकि पर्यटन विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण का संतुलन बना रहे।
सालभर पानी की उपलब्धता की तैयारी
गोमती नदी के उद्गम स्थल पर सालभर पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करना भी प्रस्तावित विकास योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके लिए पर्यटन विभाग सिंचाई विभाग के साथ समन्वय कर रहा है। उद्गम स्थल पर सुरक्षा से संबंधित आवश्यक कार्य कराने के लिए भी सिंचाई विभाग से संपर्क किया गया है।
पर्यटन उप निदेशक रवीश कुमार के अनुसार, गोमती उद्गम स्थल को केवल एक धार्मिक स्थल तक सीमित रखने के बजाय इसे प्रकृति, आस्था और पर्यटन के समन्वय वाले प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना है। टेंट सिटी, गेस्ट हाउस, घाट, मार्ग, सांस्कृतिक परिसर और पर्यटक सुविधाओं के विकसित होने से यहां आने वाले पर्यटकों को बेहतर अनुभव मिलने की उम्मीद है।