पाकिस्तान, तुर्की, सऊदी अरब ने बनाया इस्लामिक नाटो, रक्षा समझौते पर तीनों ने किए दस्तखत, भारत पर असर संभव
पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की ने संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते पर तीनों देशों के बीच लंबे समय से बातचीत चल रही थी। इस समझौते के तहत एक देश पर हमला तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। इसे भारत और इजरायल के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
रियाद। पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की ने शुक्रवार को "मक्का संयुक्त रक्षा समझौते" पर हस्ताक्षर किए। इसका मकसद किसी भी तरह के हमले के खिलाफ सामूहिक सुरक्षा को मजबूत करना है। मंत्रालय के बयान के अनुसार, समझौते में कहा गया है कि तीनों देशों में से किसी एक पर भी सशस्त्र हमला होने पर उसे उन सभी पर हमला माना जाएगा। पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच पहले से ही ऐसा एक समझौता है। इस समझौते को भारत और इजरायल के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। पाकिस्तान की भारत से पुरानी दुश्मनी है। वहीं, ये तीनों देश इजरायल के साझा दुश्मन हैं।
पाकिस्तान के विदेश कार्यालय ने बताया है कि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन ने इस समझौते पर हस्ताक्षर किए। पाकिस्तान ने इस त्रिपक्षीय रक्षा समझौते को सामूहिक सुरक्षा और क्षेत्र की शांति और स्थिरता से जोड़ा है। जबकि, पूरी दुनिया जानती है कि ये तीनों देश ही इस्लामी मुल्कों में आतंकवाद के सबसे बड़े संरक्षक हैं या रहे हैं। सऊदी अरब वहाबी विचारधारा का सबसे बड़ा पोषक है, जिसने 90 के दशक में पूरी दुनिया में आतंकवाद की फाइनेंसिंग की। पाकिस्तान तो आतंकवाद का जन्मदाता और संरक्षक देश है। वहीं, तुर्की कट्टरपंथी इस्लाम की नई फैक्ट्री बन रहा है।
इससे पहले शुक्रवार को, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज आर्मी चीफ फील्ड मार्शल असीम मुनीर के साथ मक्का में सऊदी क्राउन प्रिंस से मुलाकात की थी। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ गुरुवार को तीन दिन की आधिकारिक यात्रा पर सऊदी अरब पहुंचे थे। विदेश कार्यालय ने कहा कि हालांकि यह यात्रा खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच हो रही है, लेकिन इसका महत्व तत्काल संकट और अल्पकालिक विचारों से कहीं अधिक है।
पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के बीच हुए रक्षा समझौते से भारत और इजरायल की टेंशन बढ़ने की आशंका है। हालांकि, एक दिन पहले इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फोन करने से ऐसी उम्मीद जताई जा रही है कि भारत और इजरायल को इस डील के बारे में पहले से पता था। इसके बावजूद इन तीनों देशों की तिकड़ी को देखते हुए भारत और इजरायल को सतर्क रहने की आवश्यकता होगी। भारत की पाकिस्तान से पुरानी दुश्मनी है और दोनों देशों के बीच कई बार युद्ध हो चुके हैं। वहीं, तुर्की और इजरायल में गाजा और लेबनान युद्धों को लेकर चरम पर तनाव है। सऊदी अरब भी इजरायल को मान्यता नहीं देता है और उसे अपना दुश्मन मानता है।