ईएमआई दे रहे, घर नहीं मिला: सीबीआई ने शुरू की नोएडा-ग्रेटर नोएडा में कई बिल्डर प्रोजेक्ट्स की जांच
नोएडा। नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्रों में हज़ारों घर खरीदने वालों के लिए राहत और उम्मीद की खबर सामने आई है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने तीनों विकास प्राधिकरण क्षेत्रों में संचालित कई बिल्डर प्रोजेक्ट्स की जांच शुरू कर दी है। ये जांच रियल एस्टेट सेक्टर में बड़े स्तर पर हुए हाउसिंग लोन घोटाले, पजेशन में देरी और बायर्स के साथ धोखाधड़ी से जुड़ी गंभीर शिकायतों के आधार पर हो रही है।
तीन प्राधिकरणों से सीबीआई ने मांगी डिटेल्स
सीबीआई ने नोएडा प्राधिकरण से 9, ग्रेटर नोएडा से 11 और यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (येडा) से 4 प्रोजेक्ट्स की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। इसमें निम्न बिंदुओं की जांच की जा रही है-
-प्रोजेक्ट अप्रूवल और स्वीकृति दस्तावेज।
-बैंक लोन संबंधी फाइलें।
-फ्लैट बायर्स की लिखित शिकायतें।
-लोन वितरण और सबवेंशन स्कीम से जुड़े रिकॉर्ड।
सबवेंशन स्कीम बना घोटाले का ज़रिया
जांच का फोकस सबवेंशन स्कीम में हुई गड़बड़ियों पर भी है। इस स्कीम के तहत बिल्डर बायर्स की ओर से कुछ समय तक ईएमआई चुकाने का वादा करते हैं, लेकिन सीबीआई को ऐसे कई मामले मिले हैं जहां बिल्डर ने बायर्स के नाम पर लोन लेकर उसका उपयोग कहीं और किया। ईएमआई देना बंद कर दिया गया। पजेशन देने में वर्षों की देरी की गई। इससे बायर्स को न तो घर मिला, न ही ईएमआई से छुटकारा। वे मानसिक, आर्थिक और कानूनी संकट में फंस गए।
इन प्रमुख बिल्डरों पर जांच का शिकंजा
सीबीआई ने जिन नामी बिल्डरों की फाइलें कब्जे में ली हैं, उनमें ये शामिल हैं-
सुपरटेक लिमिटेड, जेपी ग्रीन इन्फ्राटेक लिमिटेड, शुभकामना बिल्डटेक लिमिटेड, एवीजे हाइट्स, लॉजिस्टिक सिटी डेवलपर्स, इम्प्लेक्स इंफ्रास्ट्रक्चर, आईवीआर प्राइम, सिक्वल बिल्डकान, लाजिक्स हाइट्स और नेक्सजेन इंफोकॉम। इनमें से कई प्रोजेक्ट्स पहले से रेरा, कोर्ट और उपभोक्ता फोरम में विवादों के घेरे में हैं।
सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में कार्रवाई
इस हाई-प्रोफाइल मामले की जांच सीधे सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हो रही है, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि बायर्स को न्याय मिले। दोषी बिल्डरों के खिलाफ आपराधिक मुकदमे दर्ज हों। सरकार अधूरी परियोजनाओं को टेकओवर कर पूरा करवाए। जांच में दोषी पाए गए बिल्डरों की संपत्तियां ज़ब्त की जा सकती हैं और उन पर सख्त कानूनी कार्यवाही की जाएगी।
बायर्स को मिला नया विश्वास
रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता और भरोसा बहाल करने के लिए सीबीआई की यह पहल मील का पत्थर साबित हो सकती है। वर्षों से अपने सपनों का घर पाने के लिए संघर्ष कर रहे बायर्स को अब न्याय की उम्मीद की नई किरण दिख रही है।