अधिवक्ता अरुण दीक्षित की याचिका पर सीजेएम कोर्ट ने कुलपति सहित पूरी कार्य परिषद से जवाब मांगा

आगरा। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय में विधिक सलाहकार को कथित मनगढ़ंत आरोप लगाकर कार्यविरत किए जाने का मामला अब अदालत की चौखट पर पहुंच चुका है। इस मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) ने अधिवक्ता डॉ. अरुण कुमार दीक्षित की ओर से दाखिल याचिका को परिवाद के रूप में दर्ज करते हुए विवि कुलपति, कुलसचिव, परीक्षा नियंत्रक, प्रोफेसर, बाबू और पूरी कार्यपरिषद के सदस्यों को तलब किया है। सभी आरोपियों को 22 जुलाई 2025 तक न्यायालय में जवाब देने का आदेश दिया गया है।

Jul 4, 2025 - 21:10
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अधिवक्ता अरुण दीक्षित की याचिका पर सीजेएम कोर्ट ने कुलपति सहित पूरी कार्य परिषद से जवाब मांगा

-डॊ. आंबेडकर विवि के पूर्व विधिक सलाहकार और विवि प्रशासन के बीच का मामला अदालत तक जा पहुंचा

-सीजेएम कोर्ट का आदेश- कुलपति, कुलसचिव समेत सभी संबंधित 22 जुलाई को अदालत में अपना जवाब दें

अधिवक्ता बोले- झूठे दस्तावेजों और साजिश से हटाया गया

याचिकाकर्ता डॉ. दीक्षित ने कोर्ट को बताया कि उन्हें 8 दिसंबर 2021 से रिटर्नशिप पर दिखाकर उनका भुगतान रोक दिया गया, जबकि वे वास्तव में 28 मई 2022 से रिटर्नशिप पर हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विवि अधिकारियों ने उनकी फाइलें जानबूझकर गायब कर दीं और कूटरचित दस्तावेज बनाकर उनके खिलाफ साजिश रची गई।

30% कमीशन की मांग का लगाया आरोप

डॉ. दीक्षित ने अपनी याचिका में गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कुलपति प्रो. आशु रानी, कुलसचिव अजय मिश्रा, प्रोफेसर राजीव वर्मा और बाबू राधिका प्रसाद ने उनसे 30% कमीशन मांगा। जब उन्होंने इनकार किया, तो उन्हें गलत आरोप लगाकर हटाने की प्रक्रिया चलाई गई।

पूर्व में भी रोके गए थे भुगतान, कुलाधिपति को दी थी शिकायत

डॉ. दीक्षित ने बताया कि पूर्व कुलपति प्रो. अशोक मित्तल के कार्यकाल में भी उनके भुगतान रोके गए थे। इस पर उन्होंने कुलाधिपति से शिकायत की थी, जिसके बाद सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति रंजना पंड्या की अध्यक्षता में जांच समिति गठित की गई थी, जिसने अधिवक्ताओं के बिल रोकना अनुचित माना था।

जांच कमेटी बनी और रिपोर्ट भी आ गई, पर अधिवक्ता को नहीं बुलाया गया

डॉ. दीक्षित ने यह भी कहा कि कुलपति ने मीडिया को बताया कि सेवानिवृत्त जज विष्णु गुप्ता की अध्यक्षता में गठित जांच कमेटी ने उन्हें दोषी पाया। लेकिन अधिवक्ता का कहना है कि उन्हें जांच में बुलाया ही नहीं गया। उन्होंने आरटीआई के माध्यम से जांच कमेटी से जुड़ी जानकारी मांगी, जो अब तक नहीं दी गई।

इन्हें बनाया गया है आरोपी

अधिवक्ता अरुण दीक्षित की याचिका में जिन लोगों को आरोपी बनाया गया है उनमें कुलपति प्रो. आशु रानी, तत्कालीन कुलसचिव डॉ. ओमप्रकाश, वर्तमान कुलसचिव अजय मिश्रा, परीक्षा नियंत्रक उपकुलसचिव पवन कुमार, प्रो. राजीव वर्मा, प्रो. संजय चौधरी, आईईटी निदेशक प्रो. मनु प्रताप सिंह, उप कुलसचिव अनूप केशरवानी, बाबू राधिका प्रसाद के अलावा 6 जून 2025 को हुई कार्यपरिषद के सभी सदस्य विश्वविद्यालय की जांच समिति के सभी सदस्य शामिल हैं।

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सीजेएम कोर्ट ने सभी को 22 जुलाई 2025 को जवाब देने के आदेश दिए हैं।

SP_Singh AURGURU Editor