कंगना रनौत प्रकरण में पुलिस रिपोर्ट पर वादी पक्ष ने उठाए गंभीर प्रश्न, कोर्ट ने स्पष्ट आख्या मांगी, 29 जनवरी को अगली सुनवाई
आगरा। भाजपा सांसद एवं फिल्म अभिनेत्री कंगना रनौत से जुड़े मामले में थाना न्यू आगरा द्वारा प्रस्तुत की गई पुलिस आख्या को लेकर अदालत में तीखी बहस देखने को मिली। वादी पक्ष के अधिवक्ताओं ने आख्या की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े किए, जिस पर स्पेशल कोर्ट एमपी-एमएलए ने स्पष्ट आख्या तलब करते हुए 29 जनवरी 2026 की तिथि नियत कर दी।
वादी पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रमाशंकर शर्मा के निर्देशन में वरिष्ठ अधिवक्ता सुखवीर सिंह चौहान एवं राजवीर सिंह ने अदालत को अवगत कराया कि पुलिस ने वादी अधिवक्ता और उनके गवाहों के बयान विधिवत रूप से लिए हैं, जिन पर संबंधित व्यक्तियों के हस्ताक्षर भी मौजूद हैं।
इसके विपरीत, विपक्षीया की ओर से उनकी अधिवक्ता अनुसूया चौधरी द्वारा दिए गए कथित बयान के आधार पर ही पुलिस ने आख्या प्रस्तुत कर दी, जबकि उस आख्या पर न तो विपक्षीया के हस्ताक्षर हैं और न ही उनकी अधिवक्ता के। ऐसे में यह आख्या विधिक कसौटी पर खरी नहीं उतरती और इसे विश्वसनीय नहीं माना जा सकता।
स्पेशल कोर्ट एमपी-एमएलए के न्यायाधीश अनुज कुमार सिंह ने वादी पक्ष के तर्कों को गंभीरता से सुनते हुए उनसे सहमति जताई। न्यायालय ने कहा कि पुलिस का दायित्व है कि वह विपक्षीया से स्वयं व्यक्तिगत रूप से मिलकर बयान ले, उस पर विधिवत हस्ताक्षर कराए और तभी आख्या प्रस्तुत करे।
कोर्ट ने थाना न्यू आगरा को निर्देशित किया कि वह हर हाल में 29 जनवरी 2026 तक स्पष्ट एवं विधिसम्मत आख्या न्यायालय में प्रस्तुत करे।
वादी अधिवक्ता रमाशंकर शर्मा की ओर से श्री राजेंद्र गुप्ता, धीरज, बी.एस. फौजदार, प्रीति तथा राकेश नोहवार सहित अन्य अधिवक्ताओं ने भी अपने-अपने तर्क न्यायालय के समक्ष रखे।
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