धर्मांतरण पर पंजाबी विरासत का प्रचंड आक्रोश, धर्म और संस्कृति के विरुद्ध षड्यंत्रों पर एकजुट हुंकार

आगरा। सुनियोजित धर्मांतरण के षड्यंत्रों के विरोध में पंजाबी विरासत परिवार ने रविवार शाम पंजाब भवन में एक अभूतपूर्व बैठक का आयोजन किया, जिसमें सैकड़ों की संख्या में समाजजन जुटे। देशभर में लोभ, लालच, जादू-टोना और धमकियों से बेटियों का धर्म परिवर्तन कराए जाने की घटनाओं ने पंजाबी विरासत परिवार (पंजाबी, सिख, खत्री, बहावलपुरी व मुल्तानी समाज) को उद्वेलित कर दिया है। समाज की बृहद बैठक में इन घटनाओं की कड़ी निंदा की गई और इसे सभ्यता पर सीधा हमला करार दिया गया।

Jul 27, 2025 - 21:42
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धर्मांतरण पर पंजाबी विरासत का प्रचंड आक्रोश, धर्म और संस्कृति के विरुद्ध षड्यंत्रों पर एकजुट हुंकार
धर्मांतरण के मुद्दे पर रविवार सायं पंजाब भवन में पंजाबी विरासत के बैनर तले हुई बैठक में मंचस्थ अतिथि और उपस्थित लोग।

पंजाबी विरासत के बैनर तले हुई यह बैठक समाज में गहराते असंतोष का प्रतीक थी। इसमें सिख, पंजाबी, बहावलपुरी, मुल्तानी, खत्री समाज के प्रतिनिधियों के अलावा अन्य संगठनों से जुड़े लोग भी मौजूद थे।

प्रशासन की तत्परता की सराहना, सजगता की अपेक्षा

बैठक में समाज ने उन आगरा की दो बेटियों को मुक्त कराने में पुलिस की भूमिका की सराहना की, जिनको सुनियोजित तरीके से धर्मांतरण के जाल में फंसाया गया था। समाज ने कहा कि प्रशासन की सजगता ही ऐसे मामलों में अंकुश लगाने का प्रभावी उपाय है। बैठक में समाज के सभी वर्गों से अपील की गई कि वे सब अपने बच्चों को अपनी संस्कृति, सभ्यता और धर्म के बारे में बताएं ताकि वे किसी षडयंत्र में न फंस सकें।

समाज को एकजुट और जागरूक करना था बैठक का उद्देश्य

बैठक की अध्यक्षता पंजाबी विरासत परिवार के अध्यक्ष पूरन डावर एवं गुरुद्वारा गुरु के ताल के मुखी संत बाबा प्रीतम सिंह ने संयुक्त रूप से की। संचालन महामंत्री बंटी ग्रोवर और मीडिया समन्वयक भूपेश कालरा ने किया। उन्होंने बताया कि मुख्य उद्देश्य समाज को जागरूक करना, एकजुट करना और ठोस कदमों पर मंथन करना है।

धर्मांतरण के षड्यंत्रों पर चिंता

पंजाबी विरासत के कार्यकारी अध्यक्ष अनिल वर्मा ने कहा कि बेटियों को धर्म के नाम पर फंसाना सभ्यता पर सीधा आक्रमण है। उन्होंने धर्मांतरण विरोधी कानून को और कठोर बनाने की मांग की।

डॉ. तरुण शर्मा ने अपने विचार रखते हुए बल दिया कि हमें उन गुरुओं और पूर्वजों के बलिदानों को याद रखना चाहिए जिन्होंने अधर्म स्वीकार नहीं किया और अपने धर्म की रक्षा करते हुए प्राण दिए।

संस्कृति, शिक्षा और संवाद की आवश्यकता

आर्य समाज के प्रधान वीरेन्द्र कनवर ने कहा कि हमें अपनी पीढ़ी को शास्त्र, धर्म, और संस्कारों की शिक्षा देनी होगी। उन्होंने बताया कि जब तक घर से शिक्षा नहीं मिलेगी, बाहर की ताकतें उन्हें भटका देंगी।

गुरुद्वारा प्रतिनिधि भाई अमरीक सिंह ने कहा कि हमारी पीढ़ी अब ग्रंथ और इतिहास से कट चुकी है। इसका कारण यह है कि अभिभावक उन्हें समय नहीं देते।

बैठक में आए ये सामूहिक सुझाव और प्रस्ताव

बैठक में सर्वसम्मति से कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए गए। तय किया गया कि अभिभावकों को बच्चों के साथ संवाद बढ़ाना चाहिए। धर्मांतरण विरोधी कानून को सख्ती से लागू किया जाए। सनातन बोर्ड की स्थापना की जाए, जैसे अन्य धर्मों के बोर्ड हैं। बच्चों को शस्त्र और शास्त्र दोनों की शिक्षा दी जाए। स्कूलों में भारतीय संस्कृति के अनुरूप वेशभूषा अनिवार्य की जाए। स्कर्ट संस्कृति के विरोध में स्कूलों से परिपत्र जारी हों धार्मिक स्थलों की ओर बच्चों का झुकाव बढ़ाया जाए। तिलक व जनेऊ की परंपरा को पुनर्जीवित किया जाए। आगरा में पंजाबी विरासत परिवार द्वारा इंग्लिश मीडियम स्कूल खोला जाए।

प्रमुख वक्ताओं ने क्या-क्या कहा

चरणजीत थापर: समाज को अब मौन नहीं रहना, बल्कि सतर्क और सक्रिय होना होगा।

वीर महेंद्र पाल सिंह: धार्मिक पहचान की रक्षा हर समाजजन का कर्तव्य है।

मनमोहन निरंकारी: बेटियों को आत्मनिर्भर बनाकर इन जालों से बचाया जा सकता है।

रानी सिंह: स्त्रियों को अपने अधिकारों और संस्कृति की समझ दिलाना जरूरी है।

सरदार कंवलदीप सिंह (प्रधान, श्री गुरु सिंह सभा माईथान): गुरुद्वारे और मंदिर फिर से युवाओं के केंद्र बनें।

किशोर खन्ना, मधु बघेल, मोनिका सचदेवा, अंजना असीजा, सुनंदा अरोड़ा, मन्नू महाजन ने कहा कि संस्कृति की रक्षा केवल सरकार नहीं, समाज की भी जिम्मेदारी है।

समाज के प्रमुख सदस्य जो रहे उपस्थित

बैठक में नरेंद्र तनेजा, चंद्र मोहन सचदेवा, दीपक ढल, दलजीत सेठिया, रंजीत सामा, राज सेठ कपूर, ज्ञानी कुलविंदर सिंह, रवि नारायण, जगदीश बत्रा, अमित खत्री, राजकुमार घई, रणजीत सिंह, रमेश खन्ना, अजय हिंदुस्तानी, यशपाल जोगिया (मुल्तान समाज), विकास कक्कड़, आर.के. टंडन, नितिन मेहरा, भद्रसेन वाधवा, श्याम जगिया, सुधीर जगिया आदि समेत बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।

बैठक में पंजाब भवन पूरी तरह भरा हुआ था। ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे पूरा पंजाबी समाज एक स्वर में अपनी संस्कृति की रक्षा हेतु एकत्र हुआ हो। इसमें सर्व समाज के लोग भी शामिल हुए, जिसने इस विरोध को जनआंदोलन का स्वरूप दे दिया।

बैठक का संदेश स्पष्ट था कि यदि समाज सजग रहेगा, संवाद और संस्कार बढ़ाएगा, तो कोई भी शक्ति उसकी संस्कृति को नहीं मिटा सकती।

SP_Singh AURGURU Editor