सुरक्षा पर सवालः जामा मस्जिद में नापाक हरकत 18 घंटे बाद पता चल पाई
आगरा। शहर की सबसे प्रमुख और ऐतिहासिक शाही जामा मस्जिद की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो चुके हैं। 10 अप्रैल को दोपहर में एक व्यक्ति जानवर का कटा हुआ सिर मस्जिद परिसर में रख देता है और मस्जिद प्रशासन को इसकी जानकारी 11 अप्रैल की सुबह करीब 6 बजे होती है। वह भी तब जब नमाजी इस बारे में इमाम को बताते हैं।
-नजरुद्दीन की हरकत के बाद चार बार नमाज अदा हुई और किसी का ध्यान इस ओर नहीं गया
-मस्जिद में निगरानी की कोई व्यवस्था नहीं, सीसीटीवी की भी मानीटरिंग होती तो आरोपी तभी पकड़ा जाता
यहां यह उल्लेखनीय है कि आगरा की शाही जामा मस्जिद पुरातत्व विभाग के अधीन एक संरक्षित स्मारक है। इसकी देखरेख इंतजामिया कमेटी करती है। मस्जिद के सामने ही सुभाष बाजार पुलिस चौकी है। इंतजामिया कमेटी ने मस्जिद परिसर में सीसीटीवी कैमरे भी लगवाए हुए हैं। इंतजामिया कमेटी और पुरातत्व विभाग की ओर से एक-एक कर्मचारी यहां तैनात हैं।
मस्जिद में हौज के पास जानवर का कटा हुआ सिर रखने की हरकत 11 बजकर 40 मिनट के आसपास हुई। इसके बाद दो बजे मस्जिद में जौहर की नमाज हुई। शाम पांच बजे असर की नमाज के लिए भी तमाम नमाजी यहां पहुंचे। साढ़े छह बजे मगरिब और रात आठ बजे इशा की नमाज अदा हुई और इसके बाद मस्जिद के दरवाजे बंद हो गए।
सुबह छह बजे फजर की नमाज की नमाज के लिए जामा मस्जिद फिर से खुली। फजर की नमाज के लिए पहुंचे लोग जब वजू के लिए हौज के पास पहुंचे तो उन्हें दुर्गंध महसूस होने पर वह पैकेट खोला जिसमें जानवर का कटा हुआ सिर रखा हुआ था।
इस घटना ने इस एतिहासिक मस्जिद की सुरक्षा इंतजामों की पोल खोलकर रख दी है। मस्जिद में सीसीटीवी कैमरे, गार्ड तैनाती और नाइट पेट्रोलिंग जैसे आवश्यक सुरक्षा उपाय कितने प्रभावी हैं, यह इस घटना के बाद स्पष्ट हो गया है। स्पष्ट है कि मस्जिद में कोई निगरानी नहीं होती। मस्जिद रात में बंद किये जाने के समय भी कोई निगरानी नहीं होती। परिसर में कोई निगरानी व्यवस्था सक्रिय होती तो यह हरकत करने वाला उसी समय पकड़ा जा सकता था।
मस्जिद में सीसीटीवी कैमरे तो लगे हुए हैं, लेकिन ऐसा लगता है कि इन कैमरों को देखने की व्यवस्था भी इंतजामिया कमेटी की ओर से नहीं हैं। धार्मिक स्थलों पर विशेष सतर्कता रखने के निर्देश होते हैं, खासकर जब अगले दिन जुमे की नमाज हो। इसके बावजूद मामला दूसरे दिन सुबह 6 बजे सामने आना गंभीर लापरवाही को दर्शाता है।
शाही जामा मस्जिद में हुई घटना ने न सिर्फ धार्मिक सौहार्द को ठेस पहुंचाने की कोशिश की, बल्कि मस्जिद प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था को भी कटघरे में खड़ा कर दिया है। अब देखना यह है कि क्या पुलिस और प्रशासन इस घटना से सीख लेकर सुरक्षा को मजबूत बनाने के ठोस कदम उठाते हैं या फिर यह भी बाकी मामलों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा।
असली चेहरे सामने लाए पुलिस प्रशासन-शब्बीर अब्बास
समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता शब्बीर अब्बास ने आगरा की जामा मस्जिद में आज सुबह की घटना पर रोष व्यक्त करते हुए कहा है कि इसके पीछे बहुत बड़ी साजिश की बू आ रही है। एक व्यक्ति जो नामसमझ बताया जा रहा है, ने यह घटना की है। आगरा की पुलिस की बधाई की पात्र है कि उसने सजगता से घंटों में इसका खुलासा कर दिया। इस घटना का पूरे देश में असर हो सकता था। मैं इसके लिए आगरा पुलिस को अपनी कंपनी की ओर से 11 हजार रुपये का पुरस्कार देना चाहता हूं। उन्होंने कहा कि कुछ लोग आगरा की फिजां को बिगाड़ना चाहते हैं। कुछ दिन पहले ऐसे ही लोगों ने सांसद सुमन के आवास पर तोड़फोड़ की थी और कल भी प्रदर्शन करने जा रहे हैं।
श्री अब्बास ने कहा कि इस घटना के पीछे के असली चेहरों को सामने लाए और सख्त सजा दिलाए ताकि इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके।