राहुल गांधी ने लोकसभा स्पीकर को लिखा पत्र, कहा- मुझे जानबूझकर रोकने की कोशिश, यह हमारे लोकतंत्र पर धब्बा

ंकांग्रेस नेता राहुल गांधी ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से राष्ट्रपति के अभिभाषण पर बोलने न दिए जाने को लेकर कड़ा विरोध व्यक्त किया है। नेता प्रतिपक्ष ने दावा किया उन्हें चुप कराने की सरकार की तरफ से जानबूझकर कोशिश की जा रही है।

Feb 3, 2026 - 21:40
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राहुल गांधी ने लोकसभा स्पीकर को लिखा पत्र, कहा- मुझे जानबूझकर रोकने की कोशिश, यह हमारे लोकतंत्र पर धब्बा


नई दिल्ली। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने मंगलवार को स्पीकर ओम बिरला को एक चिट्ठी लिखी। राहुल ने लेटर में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर बोलने की अनुमति न दिए जाने पर अपना 'कड़ा विरोध"' जताया। नेता प्रतिपक्ष ने इसे 'हमारे लोकतंत्र पर एक धब्बा' बताया। सोमवार को सत्ता पक्ष के सांसदों ने कांग्रेस सांसद के पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे (रिटायर्ड) की एक अप्रकाशित किताब से जून 2020 में लद्दाख में भारत-चीन झड़पों से जुड़ा एक अंश पढ़ने पर आपत्ति जताई थी। उन्होंने तर्क दिया कि सदन के नियम किसी सदस्य को ऐसी किताब का हवाला देने से रोकते हैं जो अभी तक प्रकाशित नहीं हुई है।

राहुल गांधी ने लेटर में लिखा कि आज मुझे लोकसभा में बोलने से रोकना न सिर्फ इस परंपरा का उल्लंघन है, बल्कि इससे यह गंभीर चिंता भी पैदा होती है कि विपक्ष के नेता के तौर पर मुझे राष्ट्रीय सुरक्षा के मामलों पर बोलने से रोकने की जानबूझकर कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि यह दोहराना जरूरी है कि राष्ट्रीय सुरक्षा राष्ट्रपति के अभिभाषण का एक अहम हिस्सा था, जिस पर संसद में चर्चा होनी चाहिए।

राहुल गांधी ने कहा कि इन बुनियादी लोकतांत्रिक अधिकारों से इनकार करने से एक अभूतपूर्व स्थिति पैदा हो गई है। संसदीय इतिहास में पहली बार, सरकार के कहने पर स्पीकर को विपक्ष के नेता को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर बोलने से रोकना पड़ा है। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि यह हमारे लोकतंत्र पर एक धब्बा है, जिसके खिलाफ मैं अपना कड़ा विरोध दर्ज कराता हूं।

गांधी ने बिरला को लिखे अपने पत्र में कहा कि लंबे समय से चली आ रही परंपरा के अनुसार, सदन में किसी दस्तावेज का जिक्र करने की इच्छा रखने वाले सदस्य को उसे प्रमाणित करना होता है और उसकी सामग्री की जिम्मेदारी लेनी होती है। उन्होंने कहा कि एक बार यह शर्त पूरी हो जाने के बाद, स्पीकर सदस्य को दस्तावेज से उद्धरण देने या उसका ज़िक्र करने की अनुमति देते हैं।

इसके बाद, जवाब देना सरकार की जिम्मेदारी हो जाती है, और अध्यक्ष की भूमिका समाप्त हो जाती है। गांधी ने आरोप लगाया है कि सरकार किताब में लिखी बातों से 'डरी हुई' है। उन्होंने मंगलवार को भी इस मुद्दे पर बोलने की कोशिश की थी, लेकिन वे फिर ऐसा नहीं कर पाए।