राज मर्डर केस में अब ‘गैंग कनेक्शन’ पर वार, आलोक यादव-मोनू यादव के करीबी रडार पर
आगरा के चर्चित राज हत्याकांड में पुलिस ने जांच तेज कर दी है। जांच के दौरान गैंगस्टर आलोक यादव और हिस्ट्रीशीटर मोनू यादव के नाम सामने आए हैं। 23 जनवरी को गेस्ट हाउस में राज की गोली मारकर हत्या की गई थी, जिसे वर्चस्व की जंग का नतीजा माना जा रहा है। मोनू यादव पहले ही कोर्ट में सरेंडर कर जेल जा चुका है। अब पुलिस सोशल मीडिया के जरिए गिरोह से जुड़े युवकों की पहचान कर रही है और फॉलोअर्स व संपर्कों की सूची बनाकर सहयोगियों पर भी कार्रवाई की तैयारी में है।
आगरा। शहर में चर्चित राज हत्याकांड की जांच अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती नजर आ रही है। इस सनसनीखेज हत्याकांड में पुलिस ने अपना शिकंजा और तेज कर दिया है। जांच के दौरान गैंगस्टर आलोक यादव और हिस्ट्रीशीटर मोनू यादव के नाम सामने आने के बाद पुलिस अब पूरे गिरोह की जड़ों तक पहुंचने की तैयारी में जुट गई है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार नाम सामने आने के बाद अब सिर्फ मुख्य आरोपियों तक सीमित रहने के बजाय उनके सहयोगियों, करीबी युवकों और रंगबाज तत्वों की पहचान के लिए एक बड़ी सूची तैयार की जा रही है। खास बात यह है कि पुलिस इस बार पारंपरिक मुखबिर तंत्र के साथ-साथ सोशल मीडिया को भी जांच का बड़ा हथियार बना रही है।
सोशल मीडिया से गिरोह के नेटवर्क की तलाश
जांच एजेंसियां और स्थानीय पुलिस अब उन युवकों की पहचान कर रही हैं, जो कथित तौर पर गैंगस्टर और हिस्ट्रीशीटर के संपर्क में रहे हैं। इसके लिए सोशल मीडिया अकाउंट्स, फॉलोअर्स लिस्ट, फ्रेंड सर्कल, फोटो-वीडियो पोस्ट, रील्स और कॉमेंट्स तक को खंगाला जा रहा है।
पुलिस उन युवकों की सूची तैयार कर रही है, जो सोशल मीडिया पर इन बदमाशों के साथ जुड़े हुए दिखाई दे रहे हैं या उनके साथ लगातार संपर्क में थे। माना जा रहा है कि गिरोह से जुड़े कई चेहरे इसी डिजिटल नेटवर्क के जरिए सामने आ सकते हैं।
23 जनवरी को गेस्ट हाउस में हुई थी हत्या
गौरतलब है कि 23 जनवरी को शहर के यमुना पार क्षेत्र स्थित एक गेस्ट हाउस में राज की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। वारदात ने पूरे शहर में सनसनी फैला दी थी। शुरुआती जांच में ही यह साफ हो गया था कि हत्या कोई अचानक हुई घटना नहीं, बल्कि वर्चस्व की जंग का नतीजा थी।
सूत्रों के मुताबिक, क्षेत्र में दबदबा कायम करने, आपसी रंजिश और गैंगवार जैसे कारणों ने इस हत्याकांड को जन्म दिया। पुलिस इसी एंगल पर गहराई से काम कर रही है कि हत्या की साजिश किस स्तर पर रची गई और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही।
मोनू यादव पहले ही जा चुका है जेल
इस मामले में नाम सामने आने के बाद हिस्ट्रीशीटर मोनू यादव ने पहले ही कोर्ट में सरेंडर कर दिया था, जिसके बाद उसे जेल भेजा जा चुका है। हालांकि पुलिस का मानना है कि केवल मुख्य आरोपी के जेल जाने से मामला खत्म नहीं होता। जांच का फोकस अब उन लोगों पर है, जिन्होंने वारदात से पहले या बाद में किसी भी स्तर पर मदद पहुंचाई हो।
रंगबाजों और सहयोगियों की बन रही लिस्ट
पुलिस अब शहर और आसपास के इलाकों में सक्रिय उन तथाकथित रंगबाज युवकों की पहचान कर रही है, जो इन गैंग्स के प्रभाव में हैं या उनके लिए काम करते हैं। बताया जा रहा है कि सोशल मीडिया से मिले इनपुट, आपराधिक रिकॉर्ड, कॉल डिटेल्स और स्थानीय खुफिया जानकारी के आधार पर एक संदिग्ध सूची तैयार की जा रही है।
इस सूची में ऐसे युवकों को शामिल किया जा रहा है, जो सीधे तौर पर आरोपियों के संपर्क में थे, उनके साथ तस्वीरों में दिखे हैं, या जिनकी गतिविधियां संदिग्ध रही हैं। पुलिस का मानना है कि यही लोग गैंग के लिए सूचना पहुंचाने, दबाव बनाने, हथियार छिपाने या शरण देने जैसी भूमिकाएं निभा सकते हैं।
सहयोगियों पर भी होगी कार्रवाई
डीसीपी सिटी ने साफ किया है कि राज हत्याकांड में सिर्फ शूटर या नामजद आरोपी ही नहीं, बल्कि उनके सहयोगियों, मददगारों और नेटवर्क से जुड़े लोगों पर भी सख्त कार्रवाई की जाएगी। पुलिस इस पूरे मामले को गैंगवार और आपराधिक नेटवर्क के रूप में देख रही है, इसलिए जांच का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है।
अधिकारियों के मुताबिक, यदि किसी युवक की भूमिका प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से सामने आती है, तो उसके खिलाफ भी वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। पुलिस का फोकस अब इस गैंग के लोकल मॉड्यूल को तोड़ने पर है।
कई और नाम आ सकते हैं सामने
राज हत्याकांड के बाद शहर में पुलिस की सतर्कता बढ़ गई है। सूत्रों की मानें तो आने वाले दिनों में जांच के दौरान कई और नाम सामने आ सकते हैं। पुलिस की नजर खास तौर पर उन युवकों पर है, जो सोशल मीडिया पर गैंगस्टर कल्चर को बढ़ावा दे रहे हैं और खुद को प्रभावशाली दिखाने के लिए बदमाशों के साथ नजदीकी प्रदर्शित करते हैं।
फिलहाल, पुलिस इस हत्याकांड को केवल एक हत्या नहीं, बल्कि अपराधी नेटवर्क और वर्चस्व की लड़ाई के रूप में देख रही है। यही वजह है कि अब कार्रवाई सिर्फ एक व्यक्ति पर नहीं, बल्कि पूरे गिरोह और उससे जुड़े युवकों पर केंद्रित कर दी गई है।