राजद में उत्तराधिकार तय: तेजस्वी पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बने, लालू यादव का स्पष्ट संदेश- अब कोई दूसरा विकल्प नहीं

पटना। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने तेजस्वी यादव को राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष चुनकर पार्टी की कमान औपचारिक रूप से नई पीढ़ी को सौंप दी है। इस निर्णय पर राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव की सहमति के साथ ही यह संदेश भी साफ हो गया कि राजनीतिक उत्तराधिकार के प्रश्न पर पार्टी में अब किसी तरह का संशय नहीं बचा है। ऐसे समय में यह फैसला लिया गया है जब परिवार और संगठन, दोनों ही स्तरों पर घटनाक्रम तेज और संवेदनशील रहे हैं।

Jan 25, 2026 - 20:49
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राजद में उत्तराधिकार तय: तेजस्वी पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बने, लालू यादव का स्पष्ट संदेश- अब कोई दूसरा विकल्प नहीं

पारिवारिक उठापटक, संगठनात्मक चुनौतियों और चुनावी झटकों के बीच तेजस्वी यादव को राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने का अर्थ सिर्फ पदोन्नति नहीं, बल्कि राजद की दिशा और भविष्य का स्पष्ट निर्धारण है। लालू प्रसाद यादव ने एक बार फिर संकेत दिया है कि पार्टी की राजनीति, रणनीति और नेतृत्व, तीनों का केंद्र तेजस्वी ही हैं।

तेजस्वी यादव की नियुक्ति ऐसे दौर में हुई है जब उनके बड़े भाई तेज प्रताप यादव न केवल परिवार से, बल्कि पार्टी से भी अलग हो चुके हैं और अपनी स्वतंत्र राजनीतिक इकाई गठित कर चुके हैं। हाल ही में तेज प्रताप द्वारा आयोजित एक भोज कार्यक्रम में लालू प्रसाद यादव की मौजूदगी ने अटकलें जरूर तेज की थीं कि पारिवारिक सुलह संभव है, लेकिन संगठनात्मक फैसले ने उन कयासों पर विराम लगा दिया।

इसी क्रम में, लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य का घटनाक्रम भी चर्चा में रहा। किडनी दान कर पिता की जान बचाने वाली रोहिणी ने तेजस्वी यादव पर अपमानित करने के आरोप लगाए और नाराज होकर घर छोड़ दिया। यह सब लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी की मौजूदगी में हुआ, जिसने पारिवारिक तनाव को सार्वजनिक बहस में ला दिया था।

इन तमाम झंझावातों के बावजूद, राजद नेतृत्व ने तेजस्वी यादव पर भरोसा बनाए रखा। उल्लेखनीय है कि विधानसभा चुनाव में हार के बाद भी लालू प्रसाद यादव ने तेजस्वी को नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी सौंपी थी। अब राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाकर पार्टी ने संकेत दे दिया है कि संकट के समय भी नेतृत्व में निरंतरता ही प्राथमिकता है।

फैसले के मायने और राजद का भविष्य

उत्तराधिकार पर अंतिम मुहरः तेजस्वी की नियुक्ति ने यह स्पष्ट कर दिया कि राजद में नेतृत्व का सवाल अब बंद अध्याय है। लालू प्रसाद यादव ने व्यक्तिगत भावनाओं से ऊपर उठकर संगठनात्मक स्थिरता को चुना है।

 परिवार बनाम पार्टी में पार्टी की जीतः तेज प्रताप यादव की अलग राह और रोहिणी आचार्य की नाराजगी के बावजूद संगठनात्मक फैसले में किसी तरह का संशोधन न होना बताता है कि लालू प्रसाद यादव की ओर से पार्टी हित सर्वोपरि रखा गया है।

चुनावी हार के बाद भी भरोसाः बिहार के विधान सभा चुनाव में बुरी हार के बावजूद तेजस्वी को लगातार जिम्मेदारियां देना यह दर्शाता है कि राजद नेतृत्व उन्हें दीर्घकालिक निवेश मानता है। युवा चेहरा, प्रशासनिक अनुभव और जमीनी पकड़ उनके प्लस पॊइन्ट हैं।

कार्यकर्ताओं को संदेश यह फैसला कार्यकर्ताओं के लिए भी स्पष्ट संकेत है कि लाइन और कमांड तय है। कार्यकर्ताओं के बीच अंदरूनी गुटबाजी या भ्रम की गुंजाइश नहीं छोड़ी गई है।

भविष्य किन हाथों मेंः राजद का भविष्य अब तेजस्वी यादव के राजनीतिक कौशल, गठबंधन प्रबंधन, संगठन विस्तार और युवा–पिछड़ा–दलित आधार को मजबूत करने की क्षमता पर निर्भर है। उन्हें परिवार की छाया से बाहर निकलकर स्वतंत्र नेता के रूप में परिणाम देने होंगे।

SP_Singh AURGURU Editor