रोहिलखंड विश्वविद्यालय ने खोले वैश्विक शिक्षा के द्वारः ताइवान एजुकेशन सेंटर से समझौता, मंदारिन भाषा, छात्रवृत्ति और इंटरनेशनल एक्सचेंज को मिलेगा विस्तार
-आरके सिंह- बरेली। महात्मा ज्योतिबा फुले रोहिलखंड विश्वविद्यालय ने अंतरराष्ट्रीय शिक्षा और वैश्विक अवसरों की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए ताइवान एजुकेशन सेंटर, इंडिया (टीईसीसी) के साथ ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते के जरिए विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों और शिक्षकों को मंदारिन भाषा शिक्षण, छात्रवृत्ति, इंटर्नशिप, शोध और अंतरराष्ट्रीय अकादमिक विनिमय कार्यक्रमों का लाभ मिलेगा।
विश्वविद्यालय परिसर स्थित आरआईएफ भवन के कॉन्फ्रेंस रूम में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर मल्टीलिंगुअल स्टडीज एवं डायरेक्टरेट ऑफ इंटरनेशनल रिलेशंस के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित समारोह में इस महत्वपूर्ण एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। समारोह की अध्यक्षता प्रो. केपी सिंह ने की, जबकि ताइवान एजुकेशन सेंटर इंडिया की ओर से निदेशक सुश्री जिल लाई ने प्रतिनिधित्व किया।
उच्च शिक्षा अब वैश्विक स्वरूप ले चुकी है
अपने अध्यक्षीय संबोधन में कुलपति प्रो. केपी सिंह ने कहा कि उच्च शिक्षा अब सीमाओं में बंधी नहीं है, बल्कि उसका स्वरूप वैश्विक हो चुका है। उन्होंने कहा कि यह समझौता विद्यार्थियों को भाषा, संस्कृति, उच्च शिक्षा और शोध के अंतरराष्ट्रीय अवसरों से जोड़ेगा तथा विश्वविद्यालय को वैश्विक शैक्षणिक मंच पर नई पहचान दिलाएगा।
उन्होंने कहा कि महात्मा ज्योतिबा फुले रोहिलखंड विश्वविद्यालय राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शैक्षणिक उत्कृष्टता की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहा है।
भाषा संस्कृति और संबंधों का पुल
टीईसीसी इंडिया की निदेशक सुश्री जिल लाई ने कहा कि भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि संस्कृति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों को जोड़ने वाला मजबूत पुल है। उन्होंने कहा कि संस्था का उद्देश्य भारतीय विद्यार्थियों को मंदारिन भाषा और ताइवान की उन्नत शिक्षा प्रणाली से जोड़ना है। आने वाले समय में और अधिक छात्र एवं शिक्षक विनिमय कार्यक्रम शुरू किए जाएंगे।
2020 से जारी है शैक्षणिक सहयोग
सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर मल्टीलिंगुअल स्टडीज की समन्वयक प्रो. अनीता त्यागी ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि विश्वविद्यालय और टीईसीसी के बीच सहयोग अक्टूबर 2020 में शुरू हुआ था और तब से यह विद्यार्थियों के लिए बेहद लाभकारी साबित हुआ है।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2022-23 में छह विद्यार्थी, वर्ष 2023-24 में सात विद्यार्थी और वर्ष 2024-25 में तीन विद्यार्थी ताइवान छात्रवृत्ति के अंतर्गत ताइवान जाकर विभिन्न शैक्षणिक कार्यक्रमों में भाग ले चुके हैं।
उन्होंने यह भी घोषणा की कि इस वर्ष पहली बार विद्यार्थियों के साथ विश्वविद्यालय के एक शिक्षक सदस्य को भी तीन माह की छात्रवृत्ति प्रदान की जा रही है, जो शिक्षक विकास की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।
विद्यार्थियों को मिलेंगे वैश्विक अवसर
डायरेक्टरेट ऑफ इंटरनेशनल रिलेशंस के निदेशक प्रो. एसएस बेदी ने कहा कि यह समझौता विश्वविद्यालय की वैश्विक पहचान को मजबूत करेगा और विद्यार्थियों को स्थानीय सीमाओं से बाहर अंतरराष्ट्रीय मंच प्रदान करेगा।
एमओयू के तहत टीईसीसी विश्वविद्यालय में मंदारिन चीनी भाषा शिक्षण, पाठ्यक्रम, शिक्षण पद्धति और मूल्यांकन को बढ़ावा देगा। टीईसीसी की ओर से परिसर में मंदारिन प्रशिक्षक की व्यवस्था भी की जाएगी। साथ ही विद्यार्थियों और शिक्षकों को ताइवान में छात्रवृत्ति, इंटर्नशिप और एक्सचेंज प्रोग्राम के अवसर प्राप्त होंगे। विश्वविद्यालय की ओर से प्रशिक्षकों और केंद्र के लिए आवश्यक कक्ष, कार्यालय और शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
कई विदेशी भाषाओं के पाठ्यक्रम पहले से संचालित
गौरतलब है कि सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर मल्टीलिंगुअल स्टडीज वर्तमान में मंदारिन के अलावा फ्रेंच, जर्मन और स्पेनिश भाषाओं के डिप्लोमा कार्यक्रम भी संचालित कर रहा है, ताकि विद्यार्थियों की वैश्विक रोजगार संभावनाओं को मजबूत किया जा सके।
समारोह में मिस चियाली चेन सहित विभिन्न संकायों के अधिष्ठाता, विभागाध्यक्ष, शिक्षकगण, शोधार्थी और विद्यार्थी उपस्थित रहे, जिनमें नीरज मेहरा, प्रो. संजय गर्ग, प्रो. अलोक श्रीवास्तव, प्रो. अर्चना गुप्ता, प्रो. विजय बहादुर सिंह यादव, प्रो. सुमित्रा, प्रो. शोभना सिंह, प्रो. के.के. महेश्वरी, प्रो. संतोष अरोड़ा, डॉ. एम.एस. करूणा, प्रो. जे.एन. मौर्य, प्रो. यतींद्र कुमार, प्रो. उपेंद्र कुमार एवं सुधांशु शर्मा के नाम उल्लेखनीय हैं।