रोहिणी आचार्य के विदाई पोस्ट से दिखने लगीं लालू परिवार की दरारें, एक पोस्ट से उठा सियासी तूफान

पटना। बिहार विधानसभा चुनाव में राजद की करारी हार का सदमा अभी ताज़ा ही था कि लालू प्रसाद यादव के परिवार में गहरे तूफ़ान ने खून के रिश्तों की जमीन को हिला दिया। लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया पर ऐलान कर दिया कि वह राजनीति छोड़ रही हैं और अपने परिवार से नाता तोड़ रही हैं। यह घोषणा सिर्फ़ एक भावनात्मक विस्फोट नहीं, बल्कि राजद के सियासी भविष्य, परिवार की एकता और नेतृत्व की क्षमता पर सवालिया निशान खड़ा कर रही है।

Nov 15, 2025 - 19:58
Nov 15, 2025 - 20:01
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रोहिणी आचार्य के विदाई पोस्ट से दिखने लगीं लालू परिवार की दरारें, एक पोस्ट से उठा सियासी तूफान

रोहिणी का पोस्ट: कटु-स्पष्ट और संकेतों भरा

रोहिणी आचार्य ने X पर लिखा- मैं राजनीति छोड़ रही हूं और अपने परिवार से नाता तोड़ रही हूं। संजय यादव और रमीज़ ने मुझसे यही करने को कहा था। मैं सारे दोष अपने ऊपर ले रही हूं।
यह वक्तव्य किसी तत्काल ग़ुस्से का नहीं बल्कि लम्बे समय से पनप रहे पारिवारिक तनाव का नतीजा दिखाई दे रहा है। खासकर जब यह पोस्ट चुनाव परिणाम आने के अगले ही दिन किया गया। यह तय था कि अंदरूनी खींचतान और गुटबाजी यहीं तक सीमित नहीं रहनी थी।

वही बेटी जिसने पिता को अपनी किडनी दी

रोहिणी वही बेटी हैं जिन्होंने 2022 में अपने पिता लालू प्रसाद यादव को जीवनदान देने के लिए अपनी किडनी दान की थी। उस समय वह विदेश में रहती थीं और पिता की सर्जरी के बाद भारत लौटीं। राजनीति में सक्रिय होने का संकेत दिया, समर्थकों में भी उत्साह जगा। माना जा रहा था कि उन्हें चुनाव लड़ाया जा सकता है। लेकिन धीरे-धीरे सुर बदला, सोशल मीडिया पर संकेत मिलने लगे कि वे पार्टी की गतिविधियों से नाराज़ हैं। अब यह विदाई उनकी भावनात्मक और राजनीतिक दोनों ही सीमाओं का चरम है।

चुनावी दौर में भी निरंतर संकेत दे रही थीं रोहिणी

चुनाव प्रचार के दौरान रोहिणी ने कभी तेज प्रताप का पक्ष लिया, तो कभी राजद के भीतर उठापटक को लेकर सार्वजनिक संकेत दिए। उन्होंने कई बार पार्टी से जुड़े कुछ लोगों को सोशल मीडिया पर अनफॉलो भी किया। ये छोटी-छोटी घटनाएं अब उस बड़े झटके का प्रारूप बन चुकी हैं जो उन्होंने अपने पोस्ट से दे दिया कि अब असली घर से दूर जाना ही होगा।

यह परिवार ही नहीं, राजद के लिए भी गहरा संकट

रोहिणी का परिवार और राजनीति से रिश्ता तोड़ने जैसा निर्णय केवल परिवार की भावनाओं पर चोट नहीं है, यह पार्टी की जड़ों में मौजूद दिक्कतों को उजागर करता है। नेतृत्व की कमजोरी तो सामने आई है ही, गुटबाजी के खुले चेहरे के रूप में संजय यादव और रमीज़ जैसे नाम लेकर रोहिणी ने यह साफ कर दिया कि परिवार और पार्टी में अलग-अलग शक्ति केंद्र सक्रिय हैं।

जब वह बेटी जो पिता की जान बचाती है, पार्टी को छोड़ने तक मजबूर हो जाए, तो यह संदेश पूरे संगठन में भ्रम और अविश्वास पैदा करता है। ऐसी दरारें राजद जैसी पारिवारिक-आधारित पार्टी के लिए घातक साबित हो सकती हैं। कार्यकर्ता भी उलझन में आ सकते हैं कि वास्तविक नेतृत्व कौन संभालेगा।

रोहिणी आचार्य ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में जिस संजय यादव का नाम लिया है वो तेजस्वी यादव के सबसे खास रणनीतिकार और सलाहकार माने जाते हैं। हरियाणा के महेंद्रगढ़ के मूल निवासी हैं और कंप्यूटर साइंस में मास्टर्स की डिग्री रखते हैं। मैनेजमेंट और डेटा एनालिसिस में मजबूत पकड़ रखने वाले संजय, 2013 से तेजस्वी के राजनीतिक करियर को संवार रहे हैं। वर्तमान में, वो राजद की ओर से राज्यसभा सांसद हैं। लालू परिवार में उनकी भूमिका को लेकर पहले भी नाराजगी सामने आ चुकी है, जिसमें तेजस्वी के बड़े भाई तेज प्रताप यादव उन्हें 'जयचंद' तक कह चुके हैं और आरोप लगा चुके हैं कि संजय के चलते ही उन्हें पार्टी और परिवार से बेदखल किया गया।  
 
रोहिणी आचार्य के पोस्ट में संजय यादव के साथ रमीज का नाम भी सामने आया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रमीज या रमीज नेमत खान उत्तर प्रदेश के बलरामपुर के निवासी हैं और तेजस्वी यादव की कोर टीम का हिस्सा हैं। वो तेजस्वी के कैंपेनिंग और डेली रूटीन से जुड़े काम देखते हैं। रमीज को भी तेजस्वी के पुराने दोस्तों में गिना जाता है और वो पार्टी के सोशल मीडिया और चुनाव प्रबंधन में भी शामिल रहे हैं। वो समाजवादी पार्टी के पूर्व सांसद रिजवान जहीर के दामाद हैं।

रोहिणी आचार्य ने सीधे तौर पर इन दोनों का नाम लेकर ये संकेत दिया है कि पार्टी की चुनावी हार के बाद नेतृत्व और रणनीतिकार ही परिवार में कलह का केंद्र बन गए हैं। रोहिणी और तेज प्रताप दोनों ने ही इन सलाहकारों पर परिवार में फूट डालने का आरोप लगाया है, जिससे ये जाहिर होता है कि पार्टी के प्रमुख फैसलों में इन दोनों सलाहकारों का दखल लालू परिवार के अन्य सदस्यों को नागवार गुजर रहा है।

रोहिणी आचार्य की घोषणा केवल एक बेटी की अलग राह नहीं, बल्कि राजद के लिए एक गहरी चेतावनी है। परिवार के भीतर टूट, भरोसे की कमी, नेतृत्व की कमजोरी और राजनीतिक हार के बाद पार्टी का भविष्य ही सवालों के घेरे में है। अगर जल्द ही पारिवारिक सुलह और राजनीतिक समाधान नहीं निकाले गए, तो यह घटना सिर्फ़ भावुक क्षण नहीं बल्कि राजद के लिए टर्निंग प्वाइंट बन सकती है।

SP_Singh AURGURU Editor