रूस फिर आया काम,  भारत को बड़ी मात्रा में भेजा तेल,  टूटा 9 महीने का रिकॉर्ड

रूस ने भारत के साथ अपनी वर्षों पुरानी दोस्ती फिर निभाई।  भारत के लिए वह फिर बड़ा मददगार बनकर सामने आया।  29 मार्च तक भारत का रूसी तेल आयात 5.55 करोड़ बैरल तक पहुंच गया। यह खरीद 9 महीने में सबसे ज्‍यादा है। भारत की तेल खरीद में अंगोला भी पिक्‍चर में आया है। उसकी सप्‍लाई में 255 फीसदी का भारी इजाफा हुआ है।

Mar 31, 2026 - 23:12
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रूस फिर आया काम,  भारत को बड़ी मात्रा में भेजा तेल,  टूटा 9 महीने का रिकॉर्ड

नई दिल्‍ली। शिप ट्रैकिंग डेटा से पता चलता है कि भारत का 29 मार्च तक रूसी तेल आयात 5.55 करोड़ बैरल तक पहुंच गया। जून 2025 के बाद से यह सबसे ज्‍यादा है। । ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि भारतीय रिफाइनरों ने मॉस्को से तेल खरीदना बढ़ा दिया। मिडिल ईस्‍ट से सप्‍लाई में रुकावट इसकी वजह बनी।

एक डेटा के अनुसार, रूस से आयात में भी 89 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। फरवरी में यह 2.9 करोड़ बैरल था। वैसे तो भारतीय रिफाइनरों ने रूसी तेल खरीदना कभी बंद नहीं किया। लेकिन, जब अमेरिका ने प्रमुख तेल उत्पादक कंपनियों रोसनेफ्ट और लुकॉइल पर प्रतिबंध लगा दिए तब इन बैरलों के प्रति उनकी दिलचस्पी कुछ कम हो गई।

इसकी वजह से रूस से तेल के आयात में भी कमी आई। नवंबर में यह अपने पिछले ऊंचे स्‍तर 5.5 करोड़ बैरल पर था, जो फरवरी में घटकर 2.9 करोड़ बैरल रह गया।

 डेटा के अनुसार, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और होर्मुज स्ट्रेट में आई रुकावट के चलते देश के कच्चे तेल के आयात में काफी कमी आई है। मार्च में यह घटकर 12.7 करोड़ बैरल रह गया, जबकि पिछले महीने यह 14.5 करोड़ बैरल था।

होर्मुज स्ट्रेट फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। यहां से हर दिन दुनिया भर के तेल की लगभग 20 फीसदी खेप गुज़रती है। इसी वजह से इसे दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण एनर्जी चोकपॉइंट्स (तंग रास्तों) में से एक माना जाता है।

भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़े तेल आयातक है। उसके कच्चे तेल के आयात का लगभग 40-50 फीसदी हिस्सा होर्मुज स्‍ट्रेट से होकर गुजरता है।

जहां एक ओर सऊदी अरब से होने वाले आयात में फरवरी के मुकाबले 38 फीसदी की कमी आई। वहीं दूसरी ओर अंगोला से होने वाली खरीद में महीने-दर-महीने के आधार पर जबरदस्त 255 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। यह अपने अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया।

भारत की ओर से इराक से की जाने वाली खरीद में भी 73 फीसदी की कमी आई। यह घटकर 73 लाख बैरल रह गई। इसी तरह संयुक्‍त अरब अमीरात (UAE) से होने वाली खरीद में भी 59 फीसदी की कमी आई। यह 64 लाख बैरल पर पहुंच गई।

भारत ने इस महीने के दौरान अंगोला, ओमान, इक्वाडोर, गैबॉन और सूडान से अपनी खरीद बढ़ा दी ताकि मिडिल ईस्‍ट के अपने पारंपरिक सप्लायर्स से होने वाली कमी की भरपाई की जा सके।

हाल के घटनाक्रमों में यमन के हूती विद्रोहियों ने सप्ताहांत में इजरायल पर हमला किया। पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के बाद यह पहला मौका था, जिससे बाब-अल-मंडेब स्‍ट्रेट में संभावित रुकावट को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।

यह स्‍ट्रेट ग्‍लोबल एनर्जी ट्रेड के लिए एक और अहम रास्ता (चोकपॉइंट) है। बाब-अल-मंडेब स्‍ट्रेट लाल सागर को अदन की खाड़ी और हिंद महासागर से जोड़ता है।

विश्लेषकों का कहना है कि इस क्षेत्र में किसी भी तरह की रुकावट से माल ढुलाई की लागत और देश का आयात बिल बढ़ सकता है।